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Madhya Pradesh : 80 दिन से थमें हैं बसों के पहिए : शिवराज सरकार नहीं ले पा रही फैसला

एमपी में बसें बंद होने से हजारों ड्राइवर-कंडक्टर बेरोज़गार
एमपी में बसें बंद होने से हजारों ड्राइवर-कंडक्टर बेरोज़गार

मध्य प्रदेश (MP) में बसें बंद होने के कारण 60,000 ड्राइवर्स और 90,000 कंडक्टर-क्लीनर बेरोज़गार (unemployed) हो गए हैं. एक बस के ज़रिए दो ड्राइवर और 3 से ज्यादा कंडक्टर, क्लीनर का रोज़गार चलता है.

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भोपाल.पूरा देश अनलॉक हो गया है,लेकिन मध्य प्रदेश में बसों के पहिए अब भी लॉक हैं.लॉक डाउन (LOCKDOWN) के कारण मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में बंद की गयीं बसें दोबारा शुरू करने के बारे में सरकार (government) अभी तक कोई फैसला नहीं ले पायी है. बस ऑपरेटर्स (Bus operators) की भी अपनी कई मांग हैं लेकिन कई दौर की मीटिंग के बाद भी उन पर फैसला नहीं हो पाया है.  पूरे प्रदेश में बसें (bus) स्टैंड पर खड़ी हुई हैं.हजारों यात्री बसों के पहिए थमने की वजह से ड्राइवर,क्लीनर और कंडक्टर के सामने रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हुआ है और यात्री परेशान हैं.

सरकार को लेना है फैसला
परिवहन विभाग और प्रदेश के बस ऑपरेटरों के बीच कई दौर की मीटिंग हो चुकी है. इसके बावजूद कोई रास्ता नहीं निकला है. अभी भी सिर्फ बातचीत से खानापूर्ति हो रही है. बस ऑपरेटरों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं उन पर सरकार को अंतिम फैसला लेना है. ऑपरेटर्स का कहना है सरकार को 3 महीनों का टैक्स माफ कर देना चाहिए और किराया भी बढ़ाना चाहिए. उन्होंने किराया बढ़ाने को लेकर तर्क दिया है कि सरकार ने यात्री बसों में 50 फीसदी यात्रियों को मंजूरी दी है, इसलिए हम अपने नुकसान की भरपायी कैसे कर पाएंगे. ऊपर से तीन महीने से बसें बंद हैं तो जो नुकसान हुआ है वो अलग. अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो फिर  50 फीसदी यात्रियों के साथ बसें नहीं चलायी जा सकतीं.

हजारों का रोज़गार छीना
प्रदेश में बसें बंद होने के कारण 60,000 ड्राइवरों और 90,000 कंडक्टर-क्लीनर बेरोजगार हो गए हैं.  एक बस के ज़रिए दो ड्राइवर और 3 से ज्यादा कंडक्टर, क्लीनर का रोजगार चलता है. इसके साथ ही बसों की रिपेयरिंग, उनकी डेंटिंग-पेंटिंग के साथ उसकी आयल ग्रेसिंग करने से जुड़े लोगों को भी रोजगार मिलता है. बसों से जुड़ा व्यापार भी होता है. कई व्यापारियों कारोबारी का बिजनेस बस ही हैं.



छिन गयी रोजी-रोटी

पूरे मध्य प्रदेश में यात्री बसों के पहिए थमे हुए 80 दिन से ज्यादा हो गया है. सरकार बसों के संचालन को लेकर कोई फैसला नहीं ले पा रही है.बस ड्राइवर रामविलास ने बताया कि बस बंद होने के कारण काम धंधा बंद है. परिवार पालना मुश्किल हो गया है. कंडक्टर जावेद ने बताया कि बसों के जरिए ही उनका रोजगार चलता था. लेकिन उनका ही रोजगार छिन गया है.हम लोग भुखमरी के कगार पर आ गए हैं. सरकार को जल्द कोई फैसला लेना चाहिए, क्योंकि यात्री बसों के संचालन से हजारों लोगों का रोजगार जुड़ा है.

यात्री भी परेशान

बसें बंद होने से लोग भी परेशान हैं. अभी तक तो लॉकडाउन के कारण सब घरों में बंद थे.आवाजाही रुकी हुई थी. लेकिन अनलॉक होते ही लोगों का घरों से निकलना शुरू हो गया है. बसें न चलने के कारण आम लोग परेशान हैं. जिनके पास अपने साधन नहीं हैं वो कैसे एक से दूसरी जगह जाएं.

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