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MP ELECTIONS: सात बड़े मुद्दे जो मध्य प्रदेश चुनाव में रहे हावी!

MP ELECTIONS: सात बड़े मुद्दे जो मध्य प्रदेश चुनाव में रहे हावी!

(News18 Creative)

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Madhya Pradesh Elections: कुछ ऐसे मुद्दे जरूर रहे जो चुनाव प्रचार के दौरान छाए रहे. भले ही वे मुद्दे जनता से ना जुड़े रहे हों फिर भी बीजेपी और कांग्रेस के सभी नेताओं ने चुनाव प्रचार में जमकर इन मुद्दों को जनता के सामने रखा

    मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के चुनावी नतीजे मंगलवार को आएंगे, इस दिन तय हो जाएगा कि प्रदेश का अगला किंग कौन होगा. मध्य प्रदेश का यह चुनाव कई मायनों में अलग रहा. उसका कारण यह भी रहा कि इस बार का चुनाव इतनी खामोशी से हुआ कि शायद नेताओं को भी इस बात का यकीन नहीं रहा होगा. चुनाव प्रचार से लेकर मतदान तक पूरे प्रदेश में राजनीतिक सस्पेंस बना रहा. इतना ही नहीं एग्जिट पोल के नतीजों ने भी वही सस्पेंस बरकरार रखा.

    हालांकि कुछ ऐसे मुद्दे जरूर रहे जो चुनाव प्रचार के दौरान छाए रहे. भले ही वे मुद्दे जनता से ना जुड़े रहे हों फिर भी बीजेपी और कांग्रेस के सभी नेताओं ने चुनाव प्रचार में जमकर इन मुद्दों को जनता के सामने रखा. एक ओर जहां बीजेपी ने कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा तो वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी सहित अन्य नेताओं शिवराज पर और उनकी योजनाओं पर निशाना साधा.

    1. मंदसौर गोलीकांड का मुद्दा
    चुनाव तक मंदसौर में हुए गोलीकांड के एक साल से ज्यादा हो गए. 6 जून 2017 को मंदसौर में हुए किसानों के हिंसक प्रदर्शन में शिवराज सरकार बैकफुट पर आ गई थी. किसी ने नहीं सोचा था कि मध्यप्रदेश में एसएमएस और सोशल मीडिया से शुरू हुआ किसान आंदोलन इतना खतरनाक रूप ले लेगा. इस पूरे चुनाव में यह मुद्दा छाया रहा. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपना चुनावी शंखनाद भी यहीं से किया था. इसी रैली में उन्होंने कर्ज माफ़ी का ऐलान किया था.

    2. किसानों के लिए कर्जमाफी
    मंदसौर में राहुल गांधी द्वारा किसानों के लिए कर्ज माफी का ऐलान भी इस चुनावी कैम्पेन का अहम हिस्सा था. इस ऐलान के बाद कांग्रेस बीजेपी पर हमलावर हो गई थी कि बीजेपी सरकार ने कर्ज माफी का ऐलान क्यों नहीं किया. इसके बाद शिवराज सरकार ने अपने घोषणापत्र में किसानों के लिए बोनस का ऐलान किया था.

    3.'माई का लाल'
    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह बयान सियासी तूफान खड़ा करने के लिए काफी था. दरअसल शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता. मध्य प्रदेश में हालांकि आरक्षण को लेकर प्रदर्शन चुनाव से काफी पहले शुरू हो गया था. चंबल इलाके में इस पर जबरदस्त हिंसा भी हुई थी. लेकिन चुनाव आते-आते इस प्रदर्शन ने राजनीतिक रूप ले लिया. सपाक्स नाम से बने संगठन ने आरक्षण विरोधी प्रदर्शन किए. इसके बाद सपाक्स ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया.

    4. राहुल द्वारा शिवराज को घोषणा मशीन बोलना
    कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक रैली के दौरान कहा कि जैसे क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर रनमशीन हैं वैसे राजनीति में शिवराज सिंह चौहान घोषणामशीन हैं. इस बयान के बाद राजनीति गरमा गई थी. राहुल गांधी के बयान के बाद प्रदेश के अन्य कांग्रेस नेताओं ने शिवराज सिंह चौहान पर तंज कसे. हालांकि इसके बाद भोपाल में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी के आरोपों का ज़वाब दिया.

    5. 'मेड इन मध्य प्रदेश'
    मंदसौर की पहली रैली से ही राहुल गांधी ने अपने चुनावी प्रचार में मेड इन मध्य प्रदेश और मेड इन मंदसौर जैसी बातें बोलकर जनता से कनेक्ट होने की कोशिश की. राहुल गांधी जिस भी जिले में प्रचार करने जाते वहां स्थानीय लोगों को मेड इन इंडिया से जोड़ते. हालांकि राहुल गांधी के इन बयानों का खूब मजाक उड़ा. शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे मेड इन अमेठी क्यों नहीं बनाते.

    6. कांग्रेस का सीएम पद का उम्मीदवार 
    यूं तो कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए कोई उम्मीदवार घोषित नहीं किया था लेकिन यह मुद्दा भी छाया रहा. कांग्रेस छत्रपों के समर्थकों ने अपने अपने नेताओं की उम्मीदवारी का जमकर प्रचार किया. हालांकि कांग्रेस ने कई समितियों का गठन कर कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को जिम्मेदारियां सौंप दी थीं. लेकिन कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों के बीच मुख्यमंत्री पद की जंग देखने को मिली. वहीं दिग्विजय सिंह के बयान भी समय-समय पर चर्चा में रहे.

    7. कमलनाथ के वायरल वीडियो
    चुनाव के अंतिम चरण में कमलनाथ के वायरल वीडियोज ने भी खूब धूम मचाई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर शिवराज और अमित शाह ने भी कमलनाथ के वायरल वीडियोज पर निशाना साधा. दरअसल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के कई वीडियो वायरल हुए थे. एक वीडियो में वे टिकट बंटवारे को लेकर बात कर रहे थे कि किसी को भी टिकट दिया जाएगा बस वः जिताऊ हो. इसके अलावा एक वीडियो में वे यह भी कहते दिखाई दिए कि एक खास समुदाय का हमें 90 प्रतिशत वोट मिलना चाहिए.

    अब विधानसभा चुनाव के लिए नतीजे आने ही वाले हैं. 11 दिसंबर को होने वाली मतगणना न सिर्फ मध्य प्रदेश के राजनीतिक भविष्य को तय करेगी बल्कि शिवराज सिंह चौहान, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सरीखे नेताओं के राजनीतिक सफर के लिए भी निर्णायक साबित होगी.

    यह भी पढ़ें- MadhyaPradesh Election 2018: डेब्यू कर रहे हैं कांग्रेस-बीजेपी के ये 10 युवा नेता

    Tags: Assembly Election 2018, Assembly elections, Assembly Elections 2018, Jyotiraditya Madhavrao Scindia, Kamal nath, Madhya Pradesh Assembly Election 2018, Madhya pradesh elections, Rahul gandhi, Shivraj singh chouhan

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