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श्रद्धांजलि : अब्दुल जब्बार- ख़ामोश हो गयी भोपाल गैस पीड़ितों की आवाज़

Puja Mathur | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 15, 2019, 1:52 PM IST
श्रद्धांजलि : अब्दुल जब्बार- ख़ामोश हो गयी भोपाल गैस पीड़ितों की आवाज़
अब्दुल जब्बार नहीं रहे

गुरुवार को ही मध्य प्रदेश सरकार ने घोषणा की थी कि वो 1984 के यूनियन कार्बाइड गैस रिसाव त्रासदी के पीड़ितों के लिए काम करने वाले प्रमुख कार्यकर्ता अब्दुल जब्बार का इलाज कराएगी. खुद सीएम कमलनाथ (cm kamalnath) ने ट्वीट कर इसका एलान किया था. पार्टी नेता दिग्विजय सिंह (digvijay singh)उन्हें देखने अस्पताल गए थे.

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भोपाल. भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal gas tragedy) के पीड़ितों की आवाज़ खामोश हो गयी. अब्दुल जब्बार (abdul jabbar) नहीं रहे. वो 'भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन' के संयोजक थे.गैस पीड़ितों की तकलीफ को उन्होंने इस क़दर अपनाया कि जीवनभर अपना दर्द भी भूले रहे.

अब्दुल जब्बार, विश्व की भयावह औद्योगिक त्रासदी के बाद से लगातार भोपाल गैस पीड़ितों (Bhopal Gas Victims) के हक़ की लड़ाई लड़ते रहे जब्बार का गुरुवार रात भोपाल में निधन हो गया. वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे. इससे पहले दिन में, मध्य प्रदेश सरकार ने घोषणा की थी कि वो 1984 के यूनियन कार्बाइड गैस रिसाव त्रासदी के पीड़ितों के लिए काम करने वाले प्रमुख कार्यकर्ता अब्दुल जब्बार का इलाज कराएगी. खुद सीएम कमलनाथ (cm kamalnath) ने ट्वीट कर इसका एलान किया था. पार्टी नेता दिग्विजय सिंह (digvijay singh)उन्हें देखने अस्पताल गए थे.

भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन
अब्दुल जब्बार का गैर सरकारी संगठन 'भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन’ तीन दशक से भोपाल गैस कांड के पीड़ितों के हक़ के लिए लड़ रहा था. बल्कि ये कहें कि पीड़ितों को जो हक़ मिला वो जब्बार के लंबे संघर्ष के कारण ही हासिल हुआ. 3 दिसंबर 1984 की उस भयानक औद्योगिक त्रासदी में 15000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और जो बचे वो गंभीर बीमारियों के शिकार हो गए.

संघर्ष और गुरबत की ज़िंदगी
अब्दुल जब्बार ने 1984 की गैस त्रासदी में पीड़ित महिलाओं के लिए संगठन बनाया था. वो उन्हें हक दिलाने के लिए जिंदगी भर जुटे रहे. गैस त्रासदी में जब्बार ने अपने माता-पिता और भाई को खो दिया था. उन्होंने खुद भी उस ज़हरीली गैस की मार झेली थी और ताउम्र उससे पीड़ित रहे. दूसरों के हक़ के लिए संघर्ष में अपनी ज़िंदगी का सुख-चैन भूलने वाले अब्दुल जब्बार ने कभी अपनी सेहत की भी परवाह नहीं की. ज़िंदगी के इसी संघर्ष के बीच उनके बाएं पैर में एक चोट लगी, जिसने गैंगरीन का रूप ले लिया. अपने सीमित साधनों के कारण वो इसका इलाज कराते कराते आर्थिक तंगी में पहुंच गए थे. कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और मित्रों ने उनके इलाज के लिए फंड जुटाने की सोशल मीडिया पर मुहिम शुरू की. उसके बाद सरकार जागी और अब्दुल जब्बार के इलाज का एलान किया. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इलाज मिलने से पहले ही वो अपने अंतिम सफर पर रवाना हो गए, कभी ना लौटने के लिए.

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भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों की लड़ाई लड़ने वाले जब्बार भाई का निधन

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First published: November 15, 2019, 12:52 PM IST
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