लोकसभा चुनाव 2019 : मालवा-निमाड़ में अबकी बार किसकी बारी, कौन पड़ेगा किस पर भारी?

विधानसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर कांग्रेस के पास इस लोकसभा चुनाव में 2009 दोहराने का अवसर है. 2009 में बीजेपी के अधिकांश दिग्गज मालवा में धराशाही हो गए थे.

News18 Madhya Pradesh
Updated: May 16, 2019, 7:26 AM IST
लोकसभा चुनाव 2019 : मालवा-निमाड़ में अबकी बार किसकी बारी, कौन पड़ेगा किस पर भारी?
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Updated: May 16, 2019, 7:26 AM IST
मध्य प्रदेश की बाकी बची 8 सीटों पर आखिरी चरण में 19 मई को मतदान है. ये सीटें मालवा निमाड़ की हैं. ये वो इलाका है, जो भाजपा और संघ का गढ़ रहा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां सारी सीटें बीजेपी ने जीत ली थीं. बाद में 2015 के लोकसभा उप चुनाव में कांग्रेस को झाबुआ-रतलाम सीट मिली थी. लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में सीन बदल गया. मालवा-निमाड़ की 8 में 6 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी पर बढ़त बनाई है. इसलिए इस बार मुकाबला टक्कर का है.

मध्यप्रदेश में आखिरी चरण की जंग में कौन किस पर भारी पड़ेगा.मालवा-निमाड़ की आठ सीटें किसके खाते में जाएंगी.कांग्रेस की रणनीति काम आएगी या फिर बीजेपी अपने जीते हुए किलों को बचा पाएगी. बस यही सवाल इन दिनों सियासी गलियारों में चर्चा में हैं. कांग्रेस ने अपनी स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी तक को यहां प्रचार के लिए उतारा. पीएम मोदी और रांहुल गांधी लगातार यहां के दौरे कर रहे हैं.



मध्यप्रदेश का एक ऐसा अंचल मालवा-निमाड़, जहां पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं.इस अंचल में विधानसभा से लेकर लोकसभा की सबसे ज्यादा सीटें आती हैं.ऐसे में सरकार बनने की की राह भी यहीं से तय होती है.मालवा-निमाड़ के दम पर बीजेपी प्रदेश में15 साल से सत्ता में थी.हालांकि, 2018 के विधानसभा चुनाव के परिणामों ने यहां के सियासी समीकरण बदल दिए हैं. लोकसभा चुनाव में भी वही परिणाम दोहराने के लिए कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है, तो बीजेपी ने भी अपने जीते हुए किलों को बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है..विधानसभा चुनाव के नतीजों को आधार मानें तो मालवा-निमाड़ अंचल में आने वाली आठ लोकसभा सीटों में कांग्रेस 6 सीटों में बीजेपी पर भारी नजर आ रही है.

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बीजेपी को सिर्फ मंदसौर में ही बढ़त मिली है.यहां बीजेपी ने 8 में से 7 विधानसभा सीटों में जीत दर्ज की थी.
-इंदौर में बीजेपी को कांग्रेस के बराबर 4 विधानसभा सीटें मिली थीं.
-मालवा-निमाड़ की 8 में 6 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी पर बढ़त बनाई है.ये भी पढ़ें-ज्योतिरादित्य सिंधिया की नसीहत- BJP कर्जमाफी के बारे में पूछे तो उनसे 15 लाख का करना सवाल
-देवास, उज्जैन के अलावा झाबुआ, खंडवा, खरगोन और धार में बीजेपी पर कांग्रेस भारी पड़ी.झाबुआ में कांग्रेस ने 8 में से 5, खंडवा में 4, खरगोन-धार में 6-6 विधानसभा सीटों में जीत दर्ज की थी.
2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां ज़बरदस्त जीत हासिल की थी. इस बार भी वैसी ही जीत दोहराने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने पुराने नेताओं पर भरोसा जताया है.क्षेत्र के इन दिग्गज नेताओं में दस साल पुराना प्रदर्शन दोहराने की जिम्मेदारी दी गई है.कांग्रेस पिछले बीस साल से सबसे ज्यादा सीटें 2009 चुनाव में मालवा-निवाड़ से जीती थी.2009 में कांग्रेस ने देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, खंडवा सीटों पर जीत दर्ज की थी. उस साल प्रदेश में कांग्रेस ने 29 में से 12 सीट जीती थीं, जिसमें से 6 सीटें मालवा-निमाड़ की थीं.ऐसे में इन्हीं छह सीटों पर फिर से टारगेट तय कर जीत का प्लान तैयार किया गया है.

2009 के चुनाव में देवास से सज्जन सिंह वर्मा ने बीजेपी के थावरचंद गेहलोत को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था.इसी तरह उज्जैन सीट से कांग्रेस उम्मीदवार प्रेम चंद्र गुड्डू ने भाजपा के सत्यनारायण जटिया को 15 हजार से ज्यादा वोटों से, मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन ने डॉक्टर लक्ष्मीनारायण पांडेय और रतलाम झाबुआ में कांतिलाल भूरिया ने दिलीप सिंह भूरिया को हराया था.र से गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी ने मुकाम सिंह किराड़े को 2 हजार से ज्यादा वोट से हराया था.निमाड़ की खंडवा सीट से अरुण यादव ने भाजपा के नंद कुमार सिंह चौहान को 49 हजार से ज्यादा वोटों हराया था.इनमें से प्रेम चंद्र गुड्डू अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं.
इन  मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी
-देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, खंडवा सीट को जीतने का टारगेट
-देवास लोकसभा सीट - मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा, सज्जन सिंह वर्मा
-धार लोकसभा सीट - मंत्री उमंग सिंघार, सुरेंद्र सिंह बघेल
-इंदौर लोकसभा सीट - मंत्री जीतू पटवारी, तुलसी सिलावट
-खरगौन लोकसभा सीट - मंत्री बाला बच्चन को मिली जिम्मेदारी

विधानसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर कांग्रेस के पास इस लोकसभा चुनाव में 2009 दोहराने का अवसर है.2009 में बीजेपी के अधिकांश दिग्गज मालवा में धराशाही हो गए थे. विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस नए जोश के साथ चुनाव मैदान में है. बीजेपी भी अपनी सीटें बचाने के लिए पूरा ज़ोर लगा रही है.

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