उज्जैन शराब मौत मामला: अब सीएसपी और एसपी पर गिरी गाज, एक को सस्पेंड दूसरे को हटाने के निर्देश

उज्जैन में तीन दिन पहले जहरीली शराब पीने से 14 लोगों की मौत हो गई. (सांकेतिक तस्वीर)
उज्जैन में तीन दिन पहले जहरीली शराब पीने से 14 लोगों की मौत हो गई. (सांकेतिक तस्वीर)

उज्जैन शराब मौत मामले की जांच के लिए बनी उच्च स्तरीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) को सौंप दी. जिसके बाद सीएसपी रजनीश कश्यप को सस्पेंड और एसपी मनोज सिंह को हटाने के निर्देश दिए गये हैं.

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भोपाल. उज्जैन में जिंजर शराब (Liquor) पीने से 14 लोगों की मौत के बाद शिवराज सरकार (Shivraj Government) एक्शन मोड में है. पूरे मामले की जांच के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी ने रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपनी रिपोर्ट सौंप दी. रिपोर्ट के आधार पर सीएम शिवराज ने उज्जैन के सीएसपी और एसपी (SP) को हटाने के निर्देश दिए हैं. सीएसपी रजनीश कश्यप को सस्पेंड करने और एसपी मनोज सिंह को हटाने के निर्देश दिए गये हैं.

उज्जैन शराब कांड मामले में यह सरकार की सबसे बड़ी कार्रवाई है. इससे पहले सरकार की गाज खाराकुआ थाने के टीआई समेत दूसरे पुलिसकर्मियों पर गिरी. दो आबकारी अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो चुकी है. सहायक आबकारी आयुक्त का तबादला किया जा चुका है.

नशे के कारोबार को लेकर सख्त हुए सीएम 



मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए पूरे प्रदेश में माफिया राज के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई का निर्देश दिया. प्रदेश में अवैध तरीके से नशीली वस्तुओं की हो रही बिक्री और कारोबार पर रोक लगाने का भी आदेश दिया गया है. सीएम ने साफ कहा है कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
मुख्यमंत्री ने जबलपुर में नाबालिग की हत्या के मामले में भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि राज्य में अफसरों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी. जो अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करेंगे, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी. मुख्यमंत्री ने माफिया राज के खिलाफ कार्रवाई के सख्त निर्देश दिये हैं.

कांग्रेस ने कार्रवाई को बताया नाकाफी 

वहीं कांग्रेस ने उज्जैन मौत मामले में सरकार की कार्रवाई को नाकाफी बताया है. कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने कहा है कि इस मामले में उच्च स्तरीय अधिकारियों पर कार्रवाई की जाना चाहिए. पूरे प्रदेश में मिलावटखोरी धड़ल्ले से चल रही है. लेकिन इस पर अंकुश लगाने में सरकार नाकाम साबित हो रही है.
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