यूपी में खतरे में था मंत्री पद, अब एमपी में कांग्रेस के लिए बनेंगे खतरे की घंटी..!
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यूपी में खतरे में था मंत्री पद, अब एमपी में कांग्रेस के लिए बनेंगे खतरे की घंटी..!
स्वतंत्र देव सिंह (File Photo)

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के गढ़ वाले तीन लोकसभा सीटों पर जीत दिलाने के लिए भाजपा नेता और उत्तरप्रदेश के परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है.

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मध्य प्रदेश में कांग्रेस के गढ़ वाले तीन लोकसभा सीटों पर जीत दिलाने के लिए भाजपा नेता और उत्तरप्रदेश के परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है.

अगले लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा, गुना और झाबुआ सीट पर जीत दिलाने के लिए प्रभारी नियुक्त होने के बाद स्वतंत्रदेव सिंह पहली बार शुक्रवार शाम को भोपाल पहुंचे. एयरपोर्ट से सीधे प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के सरकारी निवास पहुंचे और बैठक की. बैठक में पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास कुमार भगत भी शामिल थे.

करीब दो घंटे चली बैठक में छिंदवाड़ा, गुना और झाबुआ में कांग्रेस की ताकत परखने और कमजोर कड़ी जानने के लिए स्वतंत्रदेव के तीनों लोकसभा क्षेत्रों का दौरा करने पर सहमति बनी.



हालांकि, एमएलसी के लिए उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के पहले स्वतंत्रदेव का मंंत्री पर खतरे में नजर आ रहा था. हालांकि, पांच सीटों के लिए उपचुनाव का ऐलान होने के बाद स्वतंत्रदेव के चुने जाने का रास्ता साफ हो गया, जिसके बाद अब वह दिग्गज कांग्रेस नेताओं के लिए खतरे की घंटी बनने की तैयारी में जुट गए है.
दरअसल, मध्यप्रदेश में सत्ताधारी भाजपा साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में राज्य में मिशन क्लीन स्वीप की रणनीति पर काम कर रही है. लेकिन भाजपा के इस ड्रीम मिशन में कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांतिलाल भूरिया जैसे दिग्गज नेता रोड़ा हैं. कांग्रेस के तीनों नेताओं को उनके गढ़ में घेरने के लिए अमित शाह ने स्वतंत्रदेव सिंह को कमान सौंपी है.

वर्तमान में प्रदेश में कुल 29 लोकसभा सीटों में से 26 पर बीजेपी का कब्जा है, बाकी तीनों लोकसभा सीटें छिंदवाड़ा, गुना और झाबुआ पर कांग्रेस की बादशाहत है. मोदी लहर में भी कमलनाथ छिंदवाड़ा से 9वीं बार लोकसभा का चुनाव जीत कर सांसद बने.

इसी तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया 4 बार के सांसद है. सिंधिया राजघराने से आने वाले कांग्रेस नेता सिंधिया का ग्वालियर चंबल में एक छत्र साम्राज्य है. मोदी लहर में गुना में ज्योतिरादित्य का किला नहीं ढह सका.

भूरिया पांच बार के सांसद हैं. कद्दावर आदिवासी नेता हैं. साल 2014 में दिलीप सिंह भूरिया से चुनाव हारे लेकिन एक साल बाद ही उपचुनाव में मोदी और शिवराज की लहर को भेदते हुए भूरिया ने अपनी ताकत दिखाई और एक लाख से ज्यादा वोटों से जीते.

फिलहाल, यूपी में ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा की बनी सरकार में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह
चुनावी सियासत के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं. ऐसे में स्वतंत्र देव सिंह के लिए कांग्रेस के कब्जे वाली तीनों लोकसभा सीटों पर कमल को जिताने की बड़ी चुनौती है.
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