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विदेश भाग सकते हैं ई-टेंडर के घोटालेबाज़! एक का वीजा रद्द

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 6, 2019, 2:28 PM IST
विदेश भाग सकते हैं ई-टेंडर के घोटालेबाज़! एक का वीजा रद्द
ई-टेंडर घोटाला : आरोपियों के विदेश भागने की आशंका

ई-टेंडर (e-tender) 2014 से शुरू हुए थे. इस हिसाब से तकरीबन तीन लाख करोड़ रुपए के टेंडर अब तक दिए जा चुके हैं. लेकिन EOW के अनुसार घोटाला 3 हजार करोड़ का है.

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भोपाल.मध्य प्रदेश (Madhya pradesh) के बहुचर्चित ई-टेंडर घोटाले (e-tender scam) में फंसी कंपनियों के डायरेक्टर विदेश भाग सकते हैं.इसी आशंका के कारण EOW ने गृह मंत्रालय से उन सभी डायरेक्टर्स का वीजा निरस्त करने की सिफारिश की थी. गृह मंत्रालय (home ministry) ने एक कंपनी के डायरेक्टर का वीजा निरस्त कर दिया है, बाकी के खिलाफ प्रक्रिया चल रही है.

सरोठिया का वीजा निरस्त
EOW से मिली जानकारी के अनुसार ई टेंडर घोटाले में 9 कंपनियों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई थी. इनमें गुजरात की सरोठिया वेल्जी एंड रत्ना कंपनी भी शामिल थी. कंपनी के डायरेक्टर हरेश सरोठिया की गिरफ्तारी के तमाम प्रयास किए गए. भोपाल कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी का वांरट जारी किया था. EOW की टीम कंपनी के गुजरात स्थित दफ्तर पर चार बार दबिश दे चुकी है, पर आरोपी का सुराग नहीं लगा. EOW को सरोठिया के विदेश भागने की आशंका थी. इसलिए उसने वीसा निरस्त करने की सिफारिश गृह मंत्रालय से की थी. EOW पहले ही दिल्ली, मुंबई, गुजरात और सभी प्रमुख एयरपोर्ट को सूचित कर अलर्ट कर चुकी है. फरार आरोपी पर जल संसाधन विभाग के 116 करोड़ के टेंडर में गड़बड़ी का आरोप है।

शिवराज सरकार में हुआ था घोटाला

शिवराज सरकार ने सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए 2014 में ई-टेंडर शुरू किया था. उसके लिए एक निजी कंपनी से पोर्टल बनवाया गया. हर सरकारी विभाग इसी के ज़रिए टेंडर कर रहा है. लेकिन शिवराज सरकार के दौरान ही इसमें घोटाला होने लगा. टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन थी. लेकिन इसमें बोली लगाने वाली कंपनियों को पहले ही सबसे कम बोली का पता चल जाता था और यहीं से इसमें घोटाले की शुरुआत हुई.ई-टेंडर 2014 से शुरू हुए थे. इस हिसाब से तकरीबन तीन लाख करोड़ रुपए के टेंडर अब तक दिए जा चुके हैं. लेकिन EOW के अनुसार घोटाला 3 हजार करोड़ का है. जनवरी से मार्च 2018 के दौरान टेंडर प्रोसेस हुए थे. पिछले साल मई में घोटाले की जांच शुरू हुई थी औऱ फिर विधानसभा चुनाव के दौरान ये ठंडे बस्ते में डाल दी गयी.

इन पर दर्ज हुई थी FIR
कुल मिलाकर 2014 से अब तक करीब तीन लाख करोड़ रुपए के ई-टेंडर संदेह के दायरे में आ गए हैं. आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले की जांच भी शुरू की थी, लेकिन विधानसभा चुनाव के दौरान जांच धीमी हो गयी.कमलनाथ सरकार ने ऐलान किया कि इस मामले की फिर जांच होगी. ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ की गई. 9 टेंडरों के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर 9 कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया. इनमें जल निगम के 3, लोक निर्माण विभाग के 2, जल संसाधन विभाग के 2, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम का 1 और लोक निर्माण विभाग की पीआईयू का 1 टेंडर शामिल है. इन्हीं मामलों में FIR दर्ज की गई थी.ये भी पढ़ें-वांटेड जीतू सोनी की गिरफ़्तारी पर 30 हज़ार का इनाम, महाराष्ट्र में होने की ख़ब

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First published: December 6, 2019, 2:25 PM IST
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