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रेस्क्यू कर भोपाल वन विहार लाए गए 2 बाघ शावक, रखवाली कर रहे हैं 5 गश्ती दल
Bhopal News in Hindi

Jitender Sharma | News18 Madhya Pradesh
Updated: February 28, 2020, 12:45 PM IST
रेस्क्यू कर भोपाल वन विहार लाए गए 2 बाघ शावक, रखवाली कर रहे हैं 5 गश्ती दल
भोपाल के वन विहार में शावकों की वीवीआईपी देखभाल

उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) से भोपाल के वन विहार (Van Vihar) लाए गए दोनों शावकों के यहां डॉक्टरों की देखरेख में रखा गया है. 21 दिन बाद निर्णय लिया जाएगा कि इन्हें सैलानियों के देखने के लिए खुले में रखा जाए या नहीं

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भोपाल. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) से भोपाल (Bhopal) के वन विहार लाए गए शावकों (Tiger Cubs) की नयी जिंदगी शुरू हो गयी है. पूरा स्टाफ यहां इनकी देखभाल कर रहा है. पहले इन्हें नये माहौल में ढाला जाएगा, फिर धीरे-धीरे शिकार करना सिखाया जाएगा. इन नन्हें मेहमानों को यहां VVIP ट्रीटमेंट दिया जा रहा है. इनकी सुरक्षा में पांच गश्ती दल और कई कैमरे लगाए गए हैं. जब ये शावक यहां के माहौल और स्टाफ के साथ घुल-मिल जाएंगे, उसके बाद तय किया जाएगा कि इनको जंगल में छोड़ा जाए या सैलानियों के लिए बाड़े में रखा जाए.

लंबा है सफर
उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भोपाल का वन विहार. दो नन्हे शावकों की ये लंबी सैर है. लेकिन अब यही वन विहार इनका ठिकाना होगा. इन शावकों में से एक नर तो दूसरी मादा है. इनकी उम्र दो से तीन महीने की है. मां की मौत के बाद ये शावक उमरिया के जंगल में लावारिस हालत में मिले थे. फिलहाल इन दोनों शावकों को भोपाल में वन विहार के डॉक्टरों की देखरेख में रखा गया है. 21 दिन बाद निर्णय लिया जाएगा कि इन्हें सैलानियों के देखने के लिए खुले में रखा जाए या नहीं.

बाघों का परिवार बढ़ा



दो लिटिल कब आने से वन विहार का स्टाफ बेहद खुश है. वन विभाग ने इनकी सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ा दी है. इनकी सुरक्षा में पांच गश्ती दल लगाए गए हैं जो रात दिन इनकी रखवाली करेंगे. इसके अलावा कैमरों से भी उन पर नजर रखी जा रही है. डॉक्टरों की देखरेख में इनके व्यवहार में आने वाले परिवर्तन को भी देखा जाएगा. वन क्षेत्र बदलने से इनके स्वभाव में क्या परिवर्तन आता है यह देखा जाएगा. शावकों के खाने के लिए ताजे मांस की व्यवस्था की जाएगी. साथ ही डॉक्टरों की निगरानी में इनका पूरा ख्याल रखा जाएगा. दोनों शावकों की चहल कदमी से भोपाल के वन विहार में रौनक बढ़ गई है.

बाघिन मां की हो गयी थी मौत
दोनों बाघ शावक उमरिया के जंगल में मिले थे. इनकी मां की मौत हो गई है. उसके बाद दोनों शावकों को शिकार नहीं कर पाने के कारण भोजन नहीं मिल पा रहा था. इसलिए इन्हें रेस्क्यू कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ले जाया गया था. कम उम्र होने के कारण दोनों शावक शिकार कर पाने में सक्षम नहीं थे. ऐसे में वन विभाग ने दोनों शावकों को रेस्क्यू कर वन विहार भेजने का फैसला लिया था.

वन विहार में शिकार करना सीखेंगे शावक
वन विहार की एक टीम बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से दोनों शावक को लेकर भोपाल आयी. रेस्क्यू टीम में डॉक्टर अतुल गुप्ता के साथ वन विहार के कर्मचारी शामिल थे. यहां इन शावकों को छोटे-मोटे शिकार करना सिखाया जाएगा. शिकार करने और प्राकृतिक परिवेश में रहने के लायक होने तक दोनों शावक वन विहार में रहेंगे. इन दोनों मेहमानों के वन विहार आने से यहां बाघों की संख्या 12 हो गयी है.

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First published: February 28, 2020, 12:02 PM IST
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