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सवर्ण आंदोलन और चुनाव के मौसम में बड़ी चुनौती है नेताओं की सुरक्षा

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा

सीएम की जन आर्शीवाद यात्रा के दौरान पथराव की घटना ने पुलिस डिपार्टमेंट को हिलाकर रख दिया है. उस घटना के बाद पुलिस और इंटेलिजेंस पर सवाल खड़े होने लगे थे

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मध्य प्रदेश में चुनाव और अब सवर्ण आंदोलन के कारण नेताओं की सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है. पुलिस के लिए ये नयी चुनौती है. खासतौर से ऐसे माहौल में जब सीएम की जन आर्शीवाद यात्रा में भी पथराव कर दिया गया. पुलिस के माथे पर और बल पड़ गए. सीधे पुलिस मुख्यालय स्तर पर नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है. पूरे प्रदेश में सभी जिलों के एसपी को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं.

सीएम की जन आर्शीवाद यात्रा के दौरान पथराव की घटना ने पुलिस डिपार्टमेंट को हिलाकर रख दिया है. उस घटना के बाद पुलिस और इंटेलिजेंस पर सवाल खड़े होने लगे थे. पुलिस ने उस मामले में सख्ती से कार्रवाई तो की, लेकिन अब फिर किसी नेता या मंत्री के साथ ऐसा ना हो जाए, ये बड़ी चुनौती है.

एमपी इंटेलिजेंस ने सभी एसपी को सीएम, मंत्री, विधायकों और सांसदों की सुरक्षा को लेकर निर्देश जारी किए हैं. नेताओं के दौरे के दौरान सभी को विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है. स्थानीय स्तर पर इंटेलिजेंस को सक्रिय करने के साथ धरना और प्रदर्शन की जानकारी जुटाने के लिए भी कहा गया है.

सुरक्षा के कुछ मापदंड तय किए गए हैं.

*Z+ कैटेगरी में 55 जवानों का एक सुरक्षा कवच है. इसमें 10 से अधिक कमांडो और पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं.

*Z कैटेगरी में 22 जवानों का एक सुरक्षा कवच है, इसमें 4 और 5 एनएसजी कमांडो और पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं.
* Y कैटेगरी में 11 जवानों का एक सुरक्षा कवच है, जिसमें 1 या 2 कमांडो और पुलिस अधिकारी होते हैं.
* X कैटेगरी में 5 या 2 जवानों का एक सुरक्षा कवच है, इसमें केवल सशस्त्र पुलिस अधिकारी शामिल होते हैं.

भारत में पुलिस और स्थानीय सरकार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करती है. किसी राजनीतिक या विशिष्ट व्यक्ति को वीआईपी सुरक्षा देने का फैसला खतरे के आकलन के बाद होता है. खुफिया विभाग खतरे का आकलन करता है और तय करता है कि किसे किस कैटेगरी की सुरक्षा देना है.

सीएम शिवराज सिंह चौहान को जेड कैटेगरी की सुरक्षा दी गयी है. चुनावी साल है और ऐसे में पुलिस मुख्यालय ने मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को विशेष सुरक्षा दायरे में रखने के निर्देश स्थानीय स्तर पर दिए हैं.

विधानसभा चुनाव होने में कुछ ही महीने बचे हैं. सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता सक्रिय हो गए हैं.आम सभा, रैली, यात्रा और धरना-प्रदर्शन से लेकर तमाम हंगामे सामने आ रहे हैं. ऐसे में नेताओं की सुरक्षा पर संकट के कारण प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कमर कस ली है.

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