व्यापम महाघोटाला : CBI फिर करेगी मेडिकल छात्रा नम्रता डामोर मर्डर केस की जांच

नम्रता के पिता मेहताब सिंह ने कोर्ट में कहा था कि बेटी ने सुसाइड नहीं किया बल्कि उसकी हत्या की गयी है. .उनका आरोप था कि हत्या के बाद लाश को रेलवे ट्रैक के किनारे फेंका गया था और सीबीआई ने जांच के दौरान महत्वपूर्ण गवाह गेटमैन के बयान तक नहीं लिए.

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 23, 2019, 12:23 PM IST
व्यापम महाघोटाला : CBI फिर करेगी मेडिकल छात्रा नम्रता डामोर मर्डर केस की जांच
मेडिकल छात्रा थी नम्रता डामोर
Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 23, 2019, 12:23 PM IST
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह सरकार के दौरान हुए व्यापम महाघोटाले से जुड़े नम्रता डामौर मर्डर केस की सीबीआई दोबारा जांच करेगी. स्पेशल कोर्ट ने मेडिकल छात्रा नम्रता डामौर मर्डर केस में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट नामंजूर करते हुए उसकी दोबारा जांच का आदेश दिया है. नम्रता के पिता ने कोर्ट में सीबीआई जांच पर सवाल खड़े किए थे.

फिर खुली फाइल
मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले के ख़िलासे के बाद मेडिकल स्टूडेंट नम्रता डामोर की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी. उसकी लाश उज्जैन के पास रेलवे ट्रैक पर मिली थी. नम्रता डामोर की मौत के बाद इस केस से जुड़े 23 लोगों की संदिग्ध हालात में मौत की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिए थे.सीबीआई ने नम्रता की मौत को सुसाइड बताते हुए दो साल पहले कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी.
पिता ने कहा आत्महत्या नहीं हत्या

नम्रता के पिता मेहताब सिंह ने कोर्ट में कहा था कि बेटी ने सुसाइड नहीं किया बल्कि उसकी हत्या की गयी है. .उनका आरोप था कि हत्या के बाद लाश को रेलवे ट्रैक के किनारे फेंका गया था और सीबीआई ने जांच के दौरान महत्वपूर्ण गवाह गेटमैन के बयान तक नहीं लिए.
कब-क्या हुआ?
-30 दिसंबर 2017 को सीबीआई ने नम्रता डामोर की मौत को सुसाइड बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी.
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-नम्रता के पिता मेहताब सिंह ने सीबीआई जांच पर सवाल उठाए थे.उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्हें रेलवे के गेटमैन ने बताया था कि नम्रता की हत्या के बाद उसकी लाश रेलवे ट्रैक किनारे फेंकने की आशंका है.लेकिन सीबीआई ने गेटमैन के बयान तक दर्ज नहीं किए.इसी आधार पर कोर्ट ने सीबीआई को दोबारा जांच करने का आदेश दिया है.
CBI की क्लोजर रिपोर्ट
CBI की क्लोजर रिपोर्ट में तर्क दिया गया था कि नम्रता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स, टावर लोकेशन और उस समय ट्रेन की मौजूदगी से यह तय है कि नम्रता उस वक्त ट्रेन में मौजूद थी.बोगी के सहयात्रियों के बयान लिए गए थे. उनसे नम्रता के ट्रेन में होने की पुष्टि हुई थी. नम्रता ने जिस दोस्त से कहकर जबलपुर का टिकट बुक कराया था, उसके भी बयान लिए गए थे.
कोर्ट ने CBI के तर्क नामंज़ूर किए
सीबीआई के तर्क को भोपाल कोर्ट ने नामंजूर किया और कोर्ट के आदेश पर अब सीबीआई इस केस की दोबारा जांच कर रही है.

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First published: July 23, 2019, 12:23 PM IST
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