MP: शहीदों के परिजनों से प्रशासन की बेरुखी, न पेंशन मिली, ना 1 करोड़ की सम्मान राशि

शहीदों के परिजनों को अब भी पेंशन और सम्मान राशि का इंतज़ार है
शहीदों के परिजनों को अब भी पेंशन और सम्मान राशि का इंतज़ार है

स्मृति दिवस (Smriti diwas) के आयोजन में शहीदों (martyr) के परिजनों ने पुलिस-प्रशासन की कलई खोल कर रख दी. विभाग शहीदों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate appointment) देकर भूल गया. परिजनों को अब भी पेंशन (pension) और एक करोड़ की सम्मान राशि (honourary amount) का इंतज़ार है

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भोपाल. जिन शहीदों के लिए पुलिस स्मृति दिवस (Police Smriti diwas) का आयोजन किया गया, उन्हीं शहीद के परिजनों (martyrs families) का हाल बेहाल है. कार्यक्रम में राज्यपाल (Governor) से लेकर प्रभारी डीजीपी (DGP) तक दावा कर रहे थे कि शहीदों के परिवार के साथ सरकार, पुलिस प्रशासन और पूरा समाज खड़ा है लेकिन शहीद की पत्नी, मां और पिता के दर्द ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी. अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate appointment) के अलावा आज तक परिवारों को ना ही पेंशन मिली और न ही एक करोड़ की राशि. परिवार को मिला है तो सिर्फ अफसरों और जनप्रतिनिधियों की तरफ से आश्वासन.

कार्यक्रम में शहीद परिवारों ने खोली पोल
लाल परेड ग्राउंड के शहीद स्मारक परिसर में पुलिस स्मृति दिवस का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल लालजी टंडन थे. इस कार्यक्रम में शहीद पुलिस जवानों को श्रद्धांजलि दी गई. राज्यपाल लालजी टंडन और प्रभारी डीजीपी विजय यादव ने अपने-अपने संबोधन में दावा किया इस घड़ी में सरकार और विभाग शहीद परिजनों के साथ खड़े हैं लेकिन इन दावों में कितनी दम है और कितने सही है, इस बात की सच्चाई को खुद शहीद परिजनों ने बयान कर दी. शहीदों के परिजनों ने मीडिया को बताया कि परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने के अलावा अभी तक कोई भी मदद नहीं मिली है. विभाग ने न ही पेंशन शुरू की है और न ही एक करोड़ की राशि दी है. उनका कहना है कि जन प्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों ने सिर्फ आश्वासन दिया है, अभी तक कुछ हुआ नहीं.

News - अनुकंपा नियुक्ति देकर ही शहीदों के परिजनों को भूल गया प्रशासन
अनुकंपा नियुक्ति देकर ही शहीदों के परिजनों को भूल गया प्रशासन

ये हैं एमपी के शहीद?


1. शहीद उमेश बाबू
>> उमेश बाबू 9 सितंबर 2018 को आरोपी विष्णु सिंह राजावत के खिलाफ थाना ऊमरी में धारा 151 की कार्यवाही कर रहे थे, इसी दौरान आरोपी ने उमेश बाबू के सिर में गैती मार दी. घायल उमेश बाबू की दिल्ली में इलाज के दौरान मौत हो गई.

2. बृजेश रावत
>> थाना मानपुर के अंतर्गत तेज रफ्तार पिकअप पदयात्रियों को घायल कर भाग रही थी. इसी दौरान बृजेश रावत ने पीछा कर उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ड्राइवर ने बृजेश रावत को कुचल दिया.

प्रदेश के 2 पुलिसकर्मी हुए हैं शहीद
पिछले एक साल में देशभर में 292 पुलिस जवान शहीद हुए हैं, इनमे से मध्य प्रदेश के दो जवान भिंड जिले के शहीद प्रधान आरक्षक उमेश बाबू और श्योपुर जिले के शहीद बृजेश रावत शामिल हैं. इन दोनों शहीदों के परिजन इस कार्यक्रम में पहुंचे थे.

21 अक्टूबर को मनाया जाता है स्मृति दिवस
आपको बता दें कि आज से 60 साल पहले 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के बफीर्ले क्षेत्र हॉट स्प्रिंग में चीन की सशस्त्र सेना के साथ एक मुठभेड़ में भारतीय पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी के 10 जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था. तब से हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है. राजपाल और प्रभारी डीजीपी ने अपने संबोधन में शहीद परिवारों को लेकर कई बड़ी-बड़ी बातें कीं, हालांकि जिसके लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया, यदि उनके परिजनों को ही सरकारी मदद नहीं मिले, तो ऐसे कार्यक्रम के करने का क्या मतलब...?

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