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MP: भोपाल में पुलिस की लाठियों के आगे बेबस दिखे कोरोना वॉरियर्स, देखें Video

कॉरोना वारियर्स को मध्य प्रदेश सरकार ने तगड़ा झटका दिया है। कॉन्ट्रैक्ट बेस पर काम कर रहे है इन लोगों को सरकार ने बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है।
कॉरोना वारियर्स को मध्य प्रदेश सरकार ने तगड़ा झटका दिया है। कॉन्ट्रैक्ट बेस पर काम कर रहे है इन लोगों को सरकार ने बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है।

कोरोना वायरस संक्रमण काल में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों को काम से निकालने के खिलाफ धरना दे रहे थे प्रदर्शनकारी. पुलिस लाठीचार्ज के बाद शिवराज सरकार पर लगाए कई आरोप.

  • Last Updated: December 4, 2020, 11:40 AM IST
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भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार को दैनिक वेतनभोगियों पर लाठीचार्ज (Bhopal lathicharge) के मामले से राज्य सरकार के ये कर्मचारी गुस्से में हैं. कर्मचारियों का कहना है कि कल तक जो शिवराज सरकार (Shivraj Government) उन्हें कोरोना वॉरियर बता रही थी, अब उन्हें कर्मचारी मानने से भी इनकार कर रही है. बता दें कि नीलम पार्क में तीन दिनों से धरना दे रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के ऊपर कल पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी. आरोप है कि प्रदर्शन में शामिल महिलाओं को भी पुलिस ने बेरहमी से पीटा. पुलिस लाठीचार्ज को लेकर कर्मचारियों की मांग है कि सरकार ने इनसे कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद भी काम कराया, इसलिए उन्हें नियमित किया जाए. कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार इनके साथ 'यूज एंड थ्रो' वाली नीति अपना रही है.

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के समय सरकार ने पूरे राज्य में करीब 6123 लोगों के साथ 3 महीने का कॉन्ट्रैक्ट कर उन्हें कोरोना वॉरियर्स बनाया था. इन्हें सरकार ने दैनिक वेतनभोगी की तरह वेतन भी दिया. लेकिन, अब सरकार ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है. इसी बात को लेकर ये दैनिक वेतनभोगी धरना दे रहे हैं और नियमित करने की मांग कर रहे हैं. इन लोगों के मुताबिक सरकार 60 फीसदी लोगों को बाहर का रास्ता दिखा चुकी है.

आरोप- सरकार ने इस्तेमाल किया और फेंक दिया
राज्य में ये कोरोना वॉरियर्स 3 महीने के कॉन्ट्रैक्ट बेस पर नियुक्त किए गए थे, परंतु ये महामारी 3 महीने में खत्म नहीं हुई और समय बढ़ गया. इसके बाद सरकार ने इनसे कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं किया और 9 महीने लगातार काम कराया. अब इनका कहना है कि अगर सरकार ने हमें 3 महीने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था तो हमें 3 महीने बाद निकाल देना था. सरकार ने हमारा इस्तेमाल किया और अब निकाल रही है.




नियमितिकरण की मांग
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार उन्हें रेगुलर बेसिस पर नियुक्ति दे और संविदा के तहत कार्य कराए. वेतन भी वही मिले जो अभी तक मिल रहा था. गौरतलब है कि इस प्रदर्शन में महिलाएं भी शामिल थीं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि महिलाओं के साथ यहां बच्चे भी मौजूद थे, जिन पर लाठीचार्ज किया गया और जेल भेज दिया गया. वहीं, पैरामेडिकल स्टाफ के साथ झूमा झटकी के दौरान जहांगीराबाद थाना प्रभारी को भी मामूली चोट आई है उनका भी मेडिकल चेकअप कराया गया. इसके बाद जहांगीराबाद थाने में प्रदर्शनकारियों पर धारा 188 और 151 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
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