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OPINION : बीजेपी महाकुंभ में पीएम मोदी के चुनावी मंत्र के मायने

पीएम नरेन्द्र मोदी

पीएम नरेन्द्र मोदी

बीजेपी के इस महाकुंभ में पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को नया नारा और जीत की बूटी दी. मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि जीत की ब ...अधिक पढ़ें

    हमारे मन-मस्तिष्क में महाकुंभ शब्द धर्म की ध्वनि देता है, लेकिन ये राजनीति का महाकुंभ था और इसमें बीजेपी की चुनावी बिसात बिछनी थी. रणभेरी बजानी थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को. शंखनाद हुआ, और पूरे ज़ोर शोर से हुआ.

    बीजेपी के इस महाकुंभ में पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को नया नारा और जीत की बूटी दी. मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि जीत की बूटी तो सिर्फ विकास के मंत्र में ही है. अगर जीतना है तो विकास का मुद्दा और दामन तो पकड़े रहना होगा. देश के दिल मध्य प्रदेश से दिया पीएम मोदी का ये संदेश राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के लिए भी था और उसके बाद लोकसभा चुनाव के लिए तैयार हो रहे देश के लिए भी था.

    देश की राजनीति और ख़ासतौर से मध्य प्रदेश जातिगत आंदोलनों की आग में तप रहा है. SC/ST एक्ट को लेकर पहले अप्रैल में चंबल संभाग हिंसा की आग में जला और अब सपाक्स का आंदोलन राजनीतिक दलों की धड़कन बढ़ा रहा है. महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे जिनसे आम आदमी रोज़ जूझ रहा है, सब नेपथ्य में चले गए हैं.

    बीजेपी के इस महाकुंभ में पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी वक्त की नब्ज़ पकड़ी और कड़ा संदेश दिया कि वोट बैंक की राजनीति कर धर्म और जाति की लड़ाई खड़ा करना पाप है. जो ये पाप करेगा उसे मतदाता सज़ा देगा. पीएम मोदी ने बार-बार दीनदयाल उपाध्याय और एकात्म मानववाद का ज़िक्र कर कार्यकर्ताओं का स्वाभिमान बढ़ाने का भी प्रयास किया. उन्हें याद दिलाया कि वो विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के कार्यकर्ता हैं. इसलिए विकास के लक्ष्य को लेकर ही आगे बढ़ना है. मोदी जानते हैं,यही वो मुद्दा है जो मतदाता को लुभा सकता है.

    किसी भी राज्य में लगातार 15 साल सत्ता में रहने के बाद फिर अगले 5 साल के लिए बाज़ी जीतना आसान नहीं. इतने लंबे समय में एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर किसी भी जगह हावी हो जाता है. लेकिन इसे बीजेपी की किस्मत ही कह सकते हैं कि गुटबाज़ी में उलझी कांग्रेस उसे वॉकओवर देती आ रही है.

    कहते हैं कि दुश्मन और विपक्ष को कभी कमज़ोर नहीं समझना चाहिए. इसलिए पीएम मोदी ने हर उस मुद्दे और व्यक्ति को महत्व दिया जो जीत के लिए ज़रूरी है. तीन तलाक़ और सभी वर्गों को समान अधिकार का ज़िक्र कर उन्होंने ये संदेश भी दे दिया कि सबको साथ लेकर चलना होगा. मध्य प्रदेश की ज़मीन पर खड़े होकर उन्होंने दिवंगत कुशाभाऊ ठाकरे को भी याद किया और अटलजी की जन्म भूमि का ज़िक्र करना भी नहीं भूले.

    राजमाता दिवंगत विजयाराजे सिंधिया को पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह तक ने पूरे महत्व के साथ याद किया. प्रदेश की राजनीति में सिंधिया घराने का अपना कद और महत्व है. अचानक राजमाता के ज़िक्र के मायने सीधे हैं. कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बढ़ते कद और प्रदेश में उन्हें मिल रहे जनता के रिस्पांस से बीजेपी सतर्क है और राजमाता को उसकी काट के  तौर पर खड़ा कर रही है.

    मंच से शिवराज सिंह की तारीफ कर संकेत दे गए कि सितारा अभी बुलंद ही है. पार्टी के वेटरन लीडर बाबूलाल गौर से जिस तपाक से पीएम मिले, उससे तो यही लगा कि क्या पार्टी गौर को फिर 11वीं बार प्रत्याशी बनाने जा रही है.

    पीएम नरेन्द्र मोदी के भाषण में महंगाई, बेरोज़गारी पर कोई बात नहीं हुई. राजमाता सिंधिया का ज़िक्र महिलाओं को उनकी तरह सशक्त बनने के लिए किया लेकिन महिला अपराध में नंबर मध्य प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा कैसे होगी, इस पर वो कुछ नहीं बोले.

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    Tags: Assembly Elections 2018, BJP, Madhya Pradesh Assembly, Pm narendra modi

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