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राजमाता ने शिवराज के सिर पर हाथ रखकर दिया था आशीर्वाद, एक दिन बनेगा बड़ा नेता

राजमाता ने शिवराज के सिर पर हाथ रखकर दिया था आशीर्वाद, एक दिन बनेगा बड़ा नेता

File Photo

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सीएम शिवराज के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की पहली सरकार है, जो इतने लंबे समय तक सत्ता में रही है

    शिवराज सिंह चौहान 29 नवंबर को बतौर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री 12 साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं. सीएम शिवराज के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की पहली सरकार है, जो इतने लंबे समय तक सत्ता में रही है.

    बारह साल तक सीएम बने रहने की शिवराज की राह काफी उतार चढ़ाव से भरी रही. प्रदेश के मुखिया बनने का सफर शिवराज ने छात्र राजनीति से शुरू किया था. उस दौरान देश में इन्दिरा और कांग्रेस के विरुद्ध एक बड़ी लहर देखी जा रही थी. 1975 में देश में लगे आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले शिवराज कदाचित सबसे कम उम्र के स्वयंसेवक रहे होंगे.

    1977 से लेकर 1983 तक शिवराज सिंह चौहान छात्र राजनीति के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में विभिन्न पदों पर रहे और बाद में भारतीय जनता युवा मोर्चा मे प्रदेश के संयुक्त सचिव बनकर अपनी राजनैतिक यात्रा को दिशा दी.

    राजमाता बोलीं- राजनीति में बहुत आगे जाएगा यह लड़का
    वर्ष 1988 में जब शिवराज पहली बार युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने तब तत्कालीन कांग्रेस सरकार के शासन के विरोध में एक मशाल जुलूस का आयोजन किया गया. उन्होंने राजमाता सिंधिया से आग्रह कर इस जुलूस के नेतृत्व करने की बात कही, लेकिन तब प्रदेश में भाजपा के तत्कालीन नेतृत्व के सामने दो बड़ी चुनौतियां सामने आ गईं कि क्या वह राजमाता सिंधिया, नाना जी देशमुख और कुशाभाऊ ठाकरे जैसे दिग्गज कद के नेताओं के हिसाब से समर्थन जुट पाएगा.

    ऐसे में शिवराज ने ग्रामीण क्षेत्रों से 40000 किसानों के आने की बात कहकर पूरे पार्टी नेतृत्व को सहमा दिया, परंतु जब 7 अक्टूबर 1988 को भोपाल में जुलूस निकला तब भोपाल आने वाली सारी सड़कें ट्रैक्टर, ट्रक, जीप और बैलगाड़ियों से अटी पड़ी थीं. लोगों की संख्या 40000 से कहीं ज्यादा थी और दो दिन तक मशाल जुलूस में आए ग्रामीणों का भोपाल से लौटना बदस्तूर जारी रहा. 7 अक्टूबर के दिन ही राजमाता सिंधिया ने शिवराज के सिर पर हाथ रख आशीर्वाद दिया और ऐलान किया कि यह लड़का राजनीति मे बहुत आगे जाएगा.

    मुख्यमंत्री बनने की कहानी
    साल 2003 के चुनावों में उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं. पार्टी से उनके इस्तीफे के बाद बाबूलाल गौर को मुख्यमंत्री बनाया गया. लेकिन 2005 में तत्कालीन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान को उसी साल 29 नवंबर मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई. उसके बाद एक बार फिर तेहरवीं विधानसभा के लिए चौहान को 10 दिसंबर 2008 को भाजपा के 143 सदस्यीय विधायक दल ने सर्वसम्मति से नेता चुना. शिवराज को 2008 समेत 2013 में तीसरी बार भोपाल के जंबूरी मैदान में एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई.

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