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हनी ट्रैप : किसने लीक किए थे नेताओं और अफसरों के अश्लील वीडियो?रडार पर पुरानी SIT
Bhopal News in Hindi

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 13, 2019, 3:12 PM IST
हनी ट्रैप : किसने लीक किए थे नेताओं और अफसरों के अश्लील वीडियो?रडार पर पुरानी SIT
हनी ट्रैप के किसने किए वीडियो लीक?

शक़ है कि कुछ सदस्यों के पास अभी भी वीडियो (video) हैं, जो उन्होंने किसी को दे दिए हैं या फिर वो आगे किसी को दे सकते हैं. कुछ अफसर और राजनेताओं के सोशल मीडिया (social media) में हनीट्रैप से जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद नई SIT पुरानी SIT में शामिल अफसरों की गोपनीय तरीके से जांच कर रही है

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भोपाल. मध्यप्रदेश (Madhya pradesh) के बहुचर्चित हनी ट्रैप (honey trap) केस में अब पुरानी SIT के अफसर रडार पर आ गए हैं. शक है कि नेताओं और अफसरों के अश्लील वीडियो (Video leak) उन्हीं अफसरों ने लीक किए हैं.  पुरानी दोनों SIT के सदस्यों के नाम जांच में घेरे में हैं. नई SIT अब उन सदस्यों की जानकारी जुटा रही है साथ ही इंटेलिजेंस उन पर नजर रखे हुए है. शक है कि कुछ सदस्यों के पास अभी भी वीडियो हैं, जो उन्होंने किसी को दे दिए हैं या फिर वो आगे किसी को दे सकते हैं. कुछ अफसर और राजनेताओं के सोशल मीडिया में हनीट्रैप से जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद नई SIT, पुरानी SIT में शामिल अफसरों की गोपनीय तरीके से जांच कर रही है.

नई SIT के चीफ हैं डीजी राजेंद्र कुमार
इस बहुचर्चित मामले की जांच के लिए गठित SIT में सबसे पहले श्रीनिवास वर्मा और फिर संजीव शमी को SIT का प्रमुख बनाया गया था. अब स्पेशल डीजी राजेंद्र कुमार नई SIT के मुखिया हैं. राजेन्द्र कुमार की नई टीम में मिलिंद कानस्कर, रुचि वर्धन सदस्य हैं. सबसे पहले श्रीनिवासन वर्मा को एसआईटी चीफ बनाया गया था. लेकिन 24 घंटे में ही वर्मा को हटाकर संजीव शमी को बनाया गया था. इस पर सरकार की काफी किरकिरी हुई थी. जब नई एसआईटी बनाई गई, तब सायबर सेल के स्पेशल डीजीपी पुरुषोत्तम शर्मा को लोक अभियोजन संचालनालय भेजा गया है. शर्मा वहां संचालक बनाए गए हैं.

इंदौर पुलिस ने किया था खुलासा



17 सितंबर को इंदौर पुलिस ने इस केस का खुलासा किया था. पुलिस ने एटीएस और इंटेलिजेंस के साथ मिलकर इंदौर से दो महिला, एक पुरुष और भोपाल से तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया था. गैंग की महिला आरोपी कई बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों को हनी ट्रैप कर ब्लैकमेल कर रही थीं. इंदौर नगर निगम का एक अफसर भी इसका शिकार था. उसकी शिकायत पर ही पुलिस ने आरोपी महिलाओं को पकड़ा था. 23 सितंबर को पहली बार एसआईटी बनाई गई. आईजी सीआईडी डी. श्रीनिवास वर्मा को एसआईटी की कमान सौंपी गई. 24 सितंबर को एसआईटी चीफ वर्मा ने जांच करने से इंकार कर दिया. उसके बाद शाम तक नई एसआईटी का गठन कर संजीव शमी को कमान सौंपी गई. लेकिन फिर 2 अक्टूबर को एसआईटी चीफ संजीव शमी को भी हटा दिया गया. उसके बाद पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल हुआ और फिर नए सिरे से एसआईटी बना दी गई.

12 सदस्यीय थी पहली SIT
आईजी सीआईडी डी. श्रीनिवास वर्मा की अध्यक्षता वाली टीम में आईपीएस अफसर विकास सहवाल, कमांडेंट 25 वीं बटालियन मनोज कुमार सिंह, एसपी सायबर इंदौर जितेंद्र सिंह, थाना प्रभारी पलासिया शशिकांत चौरसिया सहित कुल 12 लोगों की टीम थी. डी. श्रीनिवास वर्मा 1996 बैच और विकास साहवाल 2014 बैच के आईपीएस अफसर हैं, जबकि कमाडेंट मनोज सिंह और एसपी सायबर सेल इंदौर जितेंद्र सिंह राज्य पुलिस सेवा के अफसर हैं.

8 सदस्यों वाली थी दूसरी एसआईटी
दूसरी एसआईटी जो एडीजी संजीव शमी के नेतृत्व बनाई गई उसका आकार घट गया और उसमें सिर्फ 8 अफसर रह गए. आठ सदस्यीय एसआईटी में संजीव शमी (एडीजी), रुचि वर्धन मिश्रा (एसएसपी, इंदौर), विकास शहवाल (एसपी), जितेंद्र सिंह (एसपी), अमरेंद्र सिंह (अतिरिक्त एसपी), नीता चौबे (सीएसपी), मनोज शर्मा (सीएसपी), शशिकांत चौरसिया (एसएचओ, पलासिया थाना, इंदौर) शामिल थे.

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First published: December 13, 2019, 2:43 PM IST
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