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हनी ट्रैप मामला : निगम इंजीनियर तक सिमटी जांच, रसूखदारों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही SIT?

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 28, 2019, 4:47 PM IST
हनी ट्रैप मामला : निगम इंजीनियर तक सिमटी जांच, रसूखदारों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही SIT?
हनी ट्रैप मामले में किसे बचाने की कोशिश कर रही है एसआईटी

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रैप (Honey trap) मामले में एसआईटी (SIT) के हाथ अभी तक एक भी रसूखदार के गिरेबान तक नहीं पहुंच सके हैं. एसआईटी की जांच सिर्फ इंदौर (Indore) के नगर निगम इंजीनियर तक सिमट कर रह गई है.

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भोपाल. हनी ट्रैप मामले (Honeytrap Case) की सभी आरोपी महिलाएं इंदौर जेल (Jail) में बंद हैं. जमानत नहीं मिलने की वजह से उनकी दिवाली (Diwali) भी जेल में मनी. आरोपी महिलाओं के पास से जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (Electronic Device) में कई आईपीएस (IPS), आईएएस (IAS), राजनेताओं और रसूखदारों के नाम छुपे थे, लेकिन अभी तक एसआईटी की टीम उन तक नहीं पहुंच सकी है. अब सवाल उठ रहा है कि एसआईटी किसे बचाने की कोशिश कर रही है. जिन रसूखदारों से इन आरोपियों की मिलीभगत थी, उन तक एसआईटी क्यों नहीं पहुंच पा रही है. कुल मिलाकर इस पूरे मामले में एसआईटी जांच अब तक इंदौर के निगम इंजीनियर तक ही सिमटी हुई है. आरोप लग रहे हैं कि आखिर एसआईटी किसे बचाने की कोशिश कर रही है?

विवादों में रह चुकी है एसआईटी
विधि मंत्री पीसी शर्मा का दावा है कि अब एसआईटी की कमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डीजी राजेंद्र कुमार संभाले हुए हैं. उन्होंने कहा कि जांच में किसी को नहीं बख्शा जाएगा. उन्होंने जांच धीमी होने के सवाल पर बताया कि कोई जानकारी अब बाहर नहीं आ पा रही है, इसलिए सबको लग रहा है कि जांच धीमी चल रही है, जबकि ऐसा नहीं है. हालांकि विपक्ष इस बात पर मंत्रीजी से सहमत नहीं है. बीजेपी का कहना है कि भले ही पीसी शर्मा तमाम दावे करें, लेकिन एसआईटी और उसके चीफ को बार-बार बदलने से उस पर सवाल खड़े हो रहे थे. अब जांच का जिम्मा भले ही राजेंद्र कुमार के पास है लेकिन अब तक रसूखदारों तक नहीं पहुंच पाना अपने आप में सवाल खड़े करता है.

News - विपक्ष का आरोप है कि एसआईटी जांच अब तक इंदौर के निगम इंजीनियर तक ही सिमटी हुई है
विपक्ष का आरोप है कि एसआईटी जांच अब तक इंदौर के निगम इंजीनियर तक ही सिमटी हुई है


एसआईटी पर बीजेपी का हमला
विपक्ष की सीबीआई जांच की मांग को कांग्रेस खारिज करती आई है. विपक्ष मांग कर रहा है कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए. उन्हें एसआईटी पर भरोसा नहीं है. प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल का कहना है कि सरकार सीबीआई जांच करने से क्यों डर रही है. क्यों एसआईटी के चीफ को बार-बार बदला गया. जरूर कुछ न कुछ गड़बड़ है, इसलिए ऐसा किया जा रहा है.

मीडिया से बनाई दूरी
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जब इस मामले का खुलासा हुआ था, तब एसआईटी की तरफ से मीडिया को जानकारी दी जाती थी. शाम का वक्त इंदौर में मीडिया के लिए फिक्स था. लेकिन जब से डीजी राजेंद्र कुमार के नेतृत्व में नई एसआईटी का गठन हुआ है, तब से एसआईटी ने मीडिया से दूरी बना ली है. सूत्रों के अनुसार, एसआईटी को कोई भी जानकारी मीडिया को देने से इनकार किया गया है. यही कारण है कि वरिष्ठ अफसरों के निर्देश का पालन पूरी एसआईटी कर रही है.

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First published: October 28, 2019, 3:59 PM IST
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