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MP में बीजेपी और कांग्रेस दोनों को नये अध्यक्ष का इंतज़ार, जानिए क्यों नहीं हो पा रहा ऐलान

एमपी में कांग्रेस और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव क्यों हो रही है देर

एमपी में कांग्रेस और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव क्यों हो रही है देर

कांग्रेस (congress) में भी पीसीसी अध्यक्ष को लेकर नेताओं के बयान तो सामने आ रहे हैं लेकिन नए अध्यक्ष का नाम अब तक सामने नहीं आया है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya pradesh) में बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों एक राह पर चल रही हैं. ना बीजेपी अपना प्रदेश अध्यक्ष तय कर पा रही है और ना ही कांग्रेस. बीजेपी के दिग्गज नेताओं के बीच किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है. और कांग्रेस कोई विकल्प नहीं तलाश पा रही है.

संगठनात्मक तौर पर मजबूत माना जाने वाला बीजेपी का संगठन क्या एमपी में कमजोर पड़ गया है? ये सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है क्योंकि मध्य प्रदेश में बीजेपी अब तक संगठन चुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पायी है. न ही पार्टी अब तक प्रदेश अध्यक्ष को चुन पायी है. न ही सभी जिलों में नए जिलाध्यक्ष नियुक्त कर पायी है. बीजेपी जिलाध्यक्षों की पहली सूची करीब दो महीने पहले जारी कर चुकी है और दूसरे राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी निर्वाचन हो चुका है. लेकिन एमपी में फैसला अटका हुआ है.

दरअसल बीजेपी में 57 में से 52 संगठनात्मक जिलों में जिलाध्यक्षों की रायशुमारी की गई थी. उसके बाद 5 दिसंबर 2019 को जिलाध्यक्षों की पहली सूची जारी की गई. पहली सूची में पार्टी ने केवल 33 जिलाध्यक्षों के नामों का ही ऐलान किया. 19 संगठनात्मक जिलों में नामों का ऐलान बाद में करने की बात कही गई. इसके पीछे वजह ये बतायी गयी कि भोपाल, इंदौर सहित 19 जिलों में बड़े नेता किसी एक नाम पर एकमत नहीं हो पाए. पार्टी विधान के मुताबिक, कुल संगठनात्मक जिलों में से 50 फीसदी में जिलाध्यक्षों का चुनाव होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है. मध्य प्रदेश में 50 फीसदी ज़िलाध्यक्ष चुने जा चुके हैं. इसके बावजूद नया प्रदेश अध्यक्ष नहीं चुना जा रहा.



नहीं बन पा रही एक राय
बीजेपी में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के साथ 19 जिलों में ज़िलाध्यक्ष चुने जाने हैं. ऐलान ना होने के पीछे एक ही वजह है कि नेताओं में सहमति नहीं बन पा रही. पार्टी के सामने सरकार जाने के बाद संगठन को एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती है. यही वजह है कि किसी भी एक नेता की राय पर मुहर नहीं लग पा रही है. प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगाने में भी यही परेशानी सामने आ रही है.

कांग्रेस भी नहीं चुन पायी नया अध्यक्ष
हालांकि ऐसा नहीं है कि प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में बीजेपी के सामने ही चुनौती है. कांग्रेस में भी पीसीसी अध्यक्ष को लेकर नेताओं के बयान तो सामने आ रहे हैं लेकिन नए अध्यक्ष का नाम अब तक सामने नहीं आया है. कुछ दिन पहले ही पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा था कि नए पीसीसी अध्यक्ष का ऐलान 15 दिन के अंदर हो जाएगा. अब खेल मंत्री जीतू पटवारी कह रहे हैं कि सूबे में निकाय चुनाव सीएम कमलनाथ के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा. इस पद के लिए समर्थक लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया का दावा जता रहे हैं लेकिन पार्टी खामोश है.



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