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Explained: युवाओं के लिए मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी पाना मुश्किल क्यों है?

मध्यप्रदेश में कई भर्ती परीक्षाओं के परिणाम रूके हुए हैं.

मध्यप्रदेश में कई भर्ती परीक्षाओं के परिणाम रूके हुए हैं.

आपके लिए इसका मतलब: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों में भर्ती की अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष की है. विभिन्न जाति वर्ग और समूह में आयु सीमा में छूट भी दी जाती है. ओबीसी को सताइस प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के कारण लोक सेवा आयोग और प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड ने नए विज्ञापन जारी करने पर रोक लगा रखी है.

  • News18Hindi
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मध्यप्रदेश में नौकरी की तलाश कर रहे युवा दोहरी मार झेल रहे हैं. यदि भर्ती परीक्षा दे दी है तो परिणाम रूके हुए हैं. दूसरा नए पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन भी सरकार नहीं निकाल रही है. यह स्थिति पिछले दो साल से बनी हुई है. कारण सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की सीमा 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया जाना है. आरक्षण की सीमा में वृद्धि कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने की थी. सरकार के फैसले के क्रियान्वयन पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है.

मध्यप्रदेश सरकार की नौकरियों में ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण वर्ष 1994 से दिया जा रहा है. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में एक संशोधन विधेयक पेश कर आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दी. ओबीसी आरक्षण बढ़ाए जाने से कुल आरक्षण की सीमा पचास प्रतिशत से अधिक हो गई.

राज्य में अनुसूचित जनजाति को बीस प्रतिशत एवं अनुसूचित जाति को जाति की जनसंख्या के हिसाब से सोलह प्रतिशत आरक्षण पहले ही दिया जा रहा है. इस कारण ही ओबीसी को सिर्फ 14 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया गया. कमलनाथ सरकार के फैसले के क्रियान्वयन पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रोक लगा दी. लोकसभा चुनाव में कमलनाथ इस फैसले का जो राजनीतिक लाभ उठाना चाहते थे, वह नहीं मिला. कांग्रेस 29 में से सिर्फ एक ही लोकसभा की सीट जीत सकी थी. मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए. कमलनाथ की सरकार भी गिर गई. आरक्षण का मसला भी कोर्ट में लटका रहा. लेकिन अब कांग्रेस और भाजपा के बीच आरक्षण की सीमा बढ़ाए जाने का श्रेय लेने की होड़ लगी हुई है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी निर्णय के समर्थन में हाईकोर्ट में नामी वकील अपने खर्चे पर लगा रखे हैं. शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने भी देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को खड़ा किया हुआ है. सरकार कह रही है निर्णय पर सीमित रोक लेकिन भर्ती नहीं कर रही
राजनीतिक श्रेय लेने का विवाद बढ़ा तो सरकार एक आदेश जारी कहा कि रोक उन पांच ही मामलों में लागू है जिनको हाईकोर्ट में चुनौती दी गई.

यह आदेश राज्य के महाधिवक्ता की राय के आधार पर जारी हुआ था. जिन मामलों में हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई उनमें पीजी नीट वर्ष 2019-20,लोक सेवा आयोग द्वारा की जा रही डॉक्टरों की भर्ती तथा शिक्षक भर्ती परीक्षा है. इन मामलों में याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भर्ती विज्ञापन में घोषित आरक्षण के अनुसार की जाना चाहिए. जबकि सरकार बढ़े हुए आरक्षण के आधार पर चयन सूची जारी करना चाहती है. राज्य के महाधिवक्ता ने सरकार को कहा कि जिन मामलों में हाईकोर्ट का आदेश रोक उन पर ही प्रभावी होती है.

महाधिवक्ता की इस राय के बाद भी सरकार के विभाग हाईकोर्ट का निर्णय आने तक कोई भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं करना चाहते. राज्य के एक वरिष्ठ नौकरशाह ने कहा कि इस तरह के संवैधानिक प्रावधानों वाले मामलों में रोक को वर्गीकृत नहीं किया जा सकता. रोक का असर व्यापक होता है. राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष,कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया कहते हैं कि कांग्रेस की सरकार यदि न गिराई गई होती तो हर वर्ग के लिए सरकारी नौकरी करने के अवसर उपलब्ध हो सकते थे.

घटता अमला, बढ़ता काम का बोझ

राज्य में सरकारी नौकरियों में भर्ती की अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष की है. विभिन्न जाति वर्ग और समूह में आयु सीमा में छूट भी दी जाती है. ओबीसी को सताइस प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के कारण लोक सेवा आयोग और प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड ने नए विज्ञापन जारी करने पर रोक लगा रखी है. राज्य के योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अनुमान के अनुसार विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों,कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है. वर्ष 2016 की तुलना में वर्ष 2020 में एक लाख से अधिक कर्मचारियों की संख्या घटी है. जाहिर है कि यह पद खाली हैं. राज्य में 87 हजार से अधिक कर्मचारी 51 से 55 वर्ष की आयु समूह हैं.

राज्य में सरकारी कर्मचारी 62 की उम्र रिटायर होता है. वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल की थी. इसका असर युवा बेरोजगारों पर पड़ा था. सरकारी क्षेत्र में दो साल तक भर्ती के उपलब्ध पद भी घट गए थे. अब ओबीसी आरक्षण ने युवाओं की उम्मीदों पर पानी फेर रखा है. मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा का परिणाम भी घोषित नहीं हो पा रहा है. लगभग साढ़े लाख युवाओं ने लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के लिए आवेदन किया है.

संविदा और आउटसोर्सिंग बना भर्ती का जरिया

मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता आशीष अग्रवाल कहते हैं कि शिवराज सिंह चौहान को युवाओं के भविष्य की चिंता है. वे नुकसान नहीं होने देंगे. राज्य में कई सरकारी विभाग ऐसे हैं जिनमें सालों से भरती ही नहीं की गई है. कृषि विभाग में विस्तार अधिकारी के छह हजार से अधिक पद खाली हैं. पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह कहते हैं कि 71 गांवों पर एक कृषि विस्तार अधिकारी है. वह हर गांव में पहुंच कर फसल का सही आकलन भी नहीं दे सकता.

पिछले दिनों व्यापमं ने कृषि विभाग के विभिन्न पदों की चयन सूची जारी की थी. लेकिन,परिणाम निरस्त कर दिए गए. कारण जांच में यह सामने आया कि परीक्षा का पेपर हैक हो गया था. सरकार विभागों में कर्मचारियों की कमी की पूर्ति रिटायर्ड लोगों को संविदा नियुक्ति देकर कर रही है. कई विभागों में सत्तर साल के लोग काम करते दिख जाएंगे. सरकार आउटसोर्स कंपनियों के अमले से भी सरकारी कामकाज करा रही है.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है.)

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