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क्या मोदी-शाह की माधुरी दीक्षित के लिए राहुल गांधी का जवाब करीना कपूर हैं ?

फाइल फोटो

फाइल फोटो

कांग्रेस 1984 के सिख दंगो के बाद से ही भोपाल लोकसभी सीट से चुनाव नहीं जीत पाई है. ऐसे में कांग्रेस के नेता गुड्डू चौहान और अनस खान ने भोपाल लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी के लिए करीना का नाम सुझाया है.

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    मध्य प्रदेश के भोपाल लोकसभा सीट से फिल्म एक्ट्रेस करीना कपूर खान को चुनाव लड़ाने के लिए कांग्रेस के दो नेताओं ने राहुल गांधी को चिट्टी लिखी है. इस चिट्ठी में कहा गया है कि बीजेपी के अभेद्य किले में अगर सेंध लगाना है तो पटौदी खानदान की बहू करीना कपूर खान को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाया जाए. कांग्रेस 1984 के सिख दंगो के बाद से ही भोपाल लोकसभी सीट से चुनाव नहीं जीत पाई है. ऐसे में कांग्रेस के नेता गुड्डू चौहान और अनस खान ने करीना का नाम सुझाया है. करीना के ससुर और पूर्व क्रिकेटर मंसूर अली खां पटौदी भी भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. लेकिन उनेको हार का मुंह देखना पड़ा था.

    वैसे तो करीना के ससुर मंसूर अली खां पटौदी गुड़गांव के पास पटौदी शहर के रहने वाले थे. पटौदी खानदान का भोपाल शहर से रिस्ता तीन पीढ़ियों पहले उस समय जुड़ा था जब नवाब इफ्तेखार अली खान पटौदी ने बेगम साजिदा सुल्तान से शादी की थी. बेगम साजिदा सुल्तान (अभिनेता सैफ अली खान की दादी) हमीदुल्ला खान की दूसरी बेटी थीं. हमीदुल्ला खान भोपाल के नवाब और भोपाल राज्य के अंतिम शासक थे.

    साल 1991 में जब राजीव गांधी सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे थे. तब उन्होंने मंसूर अली खान पटौदी को राजनीति में लाने का निश्चय किया. उस समय पटौदी के लिए राजनीतिक मैदान के रूप में भोपाल को चुना गया. राजीव गांधी को पूरा भरोसा था कि पटौदी भोपाल से जीत जाएंगे क्योंकि नबाब भोपाल के एक लोकप्रिय शख्सियत थे.

    साजिदा सुल्तान की मृत्यु के बाद पटौदी कई मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों और अन्य तीर्थस्थलों ( नए अनुमान के अनुसार 1,000 करोड़ रुपये से अधिक) के प्रमुख मुत्तवल्ली (संरक्षक) बन गए थे. 2011 में उनकी मृत्यु के बाद, सैफ की बहन सबा अली खान उनकी उत्तराधिकारी बनीं जो आज भी कई वक्फ संपत्तियों के 'प्रमुख मुतवल्ली' हैं.

    साल 1991 के लोकसभा चुनाव पटौदी परिवार और कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित हुआ. चुनाव प्रचार के कुछ दिनों में ही पटौदी और उनकी पत्नी शर्मिला टैगोर को लग गया कि शहर की जनता सांप्रदायिक आधार पर तेजी से बंट रही है.

    राजीव गांधी पटौदी के पक्ष में प्रचार करने के लिए भोपाल भी आए थे. लेकिन कांग्रेस का एक हिस्सा पटौदी की उम्मीद्वारी के खिलाफ था उनका मानना था कि अगर पटौदी भोपाल से जीत जाते हैं तो स्थानीय नेताओं के लिए कम से कम दो दशकों तक राजनीति के दरवाजे बंद हो जाएंगे. जो भी हो पटौदी के रूप में राजीव गांधी के पास भोपाल में एक ऐसा भरोसेमंद शख्स था जो अर्जुन सिंह, श्यामा चरण शुक्ला, माधवराव सिंधिया जैसे महत्वाकांक्षी राजनीतिज्ञों पर अंकुश लगाने के लिए काफी था.

    पटौदी की 1991 में दूसरी चुनावी हार थी. पहली बार वह 1971 में गुड़गांव लोकसभा से चुनाव लड़े थे. 1970 में इंदिरा गांधी ने भोपाल की प्रिवी पर्स को खत्म कर दिया था जिसकी वजह से पटौदी के युवा नवाब को सालाना 48,000 रुपये का नुकसान हुआ था. माना जाता है कि इसी के चलते पटौदी ने गुड़गांव से लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला लिया था.

    ये भी पढ़ें- कांग्रेस के टिकट पर भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी करीना कपूर!

    प्रिवी पर्स तत्कालीन रियासतों के शाही परिवारों को 1947 में भारत के साथ पहले एकीकृत करने और बाद में 1949 में अपने राज्यों के विलय के लिए एक भुगतान था. जिसके तहत उन्होंने सभी शासकीय अधिकारों को खो दिया था. गन-सैल्यूट और टाइटल जैसे विशेषाधिकारों के अलावा 565 पूर्व राज परिवारों को लगभग 100 करोड़ रुपये का कर-मुक्त भुगतान किया गया था.

    विशाल हरियाणा पार्टी के उम्मीदवार के रूप में पटौदी को 5 प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे. पूर्व शासकों के भत्तों और विशेषाधिकारों को हटाने के मुद्दे को कांग्रेस के भीतर भी कई लोगों ने 'विवादास्पद' माना था. इंदिरा के वित्त मंत्री  मोरारजी देसाई ने पहले इस आधार पर इसका विरोध किया था कि कांग्रेस सरकार के लिए इस समझौते को तोड़ना अनैतिक होगा.

    जब संसद में प्रिवी पर्स को खत्म करने वाला बिल लाया गया था तब इंदिरा गांधी ने सदस्यों से "समय की भावना के अनुसार" मतदान करने का आग्रह किया था. उन्होंने माना कि प्रिवी पर्स का उन्मूलन गरीबी और बेरोजगारी की समस्याओं को हल नहीं कर सकता है. फिर भी यह एक विशेष दिशा में बढ़ाया गया कदम है, जिस ओर देश जाना चाहता है.

    1971 की चुनावी लड़ाई और हार ने पटौदी के नेहरू-गांधी परिवार के साथ संबंधों को प्रभावित नहीं किया. गुड़गांव की तरह 1991 में भी भोपाल में पटौदी परिवार के प्रति लोगों ने प्यार नहीं दिखाया. बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी करीबी पारिवारिक मित्रों सैफ अली खान और शर्मिला टैगोर को मनाने के लिए आगे आएंगे और करीना को भोपाल से 2019 लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस का टिकट देंगे.

    2019 लोकसभा के चुनावी मैदान में बड़ी संख्या में फिल्मी और खेल जगत से जुड़ी हस्तियों के उतरने की बात कही जा रही है. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी प्रमुख अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा ने उम्मीदवारों की एक औपचारिक सूची तैयार की है. जिसमें माधुरी दीक्षित, गौतम गंभीर, सनी देओल, अजय देवगन, कपिल देव, अक्षय कुमार, परेश रावल, हेमा मालिनी, मनोज तिवारी, बाबुल सुप्रियो और अनुपम खेर शामिल हैं.

    (रशीद किदवई)

    (लेखक ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन में विज़िटिंग फेलो और पत्रकार हैं. व्यक्त किए गए विचार उनके निजी हैं.)

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