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OPINION: अयोध्या के राम मंदिर मुद्दे को ओरछा के राम राजा की भक्ति से जीतना चाहते हैं कमलनाथ

News18 Madhya Pradesh
Updated: December 4, 2019, 7:01 PM IST
OPINION: अयोध्या के राम मंदिर मुद्दे को ओरछा के राम राजा की भक्ति से जीतना चाहते हैं कमलनाथ
अयोध्या के राम मंदिर के मुकाबले ओरछा के राम राजा की भक्ति में कमलनाथ

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government) इन दिनों राम भक्ति करती दिखाई दे रही है. राम वन गमन पथ (Ram Van gaman Path) के विकास के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपयों के प्रावधान के बाद सरकार नगर पालिका, नगर परिषदों में रामलीला के लिए स्थाई मंच का निर्माण कराने जा रही है. दरअसल नगरीय चुनाव में अब राम ही कमलनाथ की नैया पार लगाएंगे.

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(दिनेश गुप्ता)

भोपाल. सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कमलनाथ सरकार भी 'राममय' होती दिखाई दे रही है. पहले राम वन गमन पथ का निर्माण और अब सीएम कमलनाथ, नगर पालिका क्षेत्र में रामलीला के लिए स्थाई मंच बनाने की तैयारी कर रहे हैं. दो दिन पहले ओरछा में भगवान श्रीराम के विवाह का भव्य आयोजन भी इसी कड़ी का हिस्सा था. राम भक्ति के जरिए मुख्यमंत्री कमलनाथ भारतीय जनता पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं. कमलनाथ यह संदेश देने की कोशिश भी कर रहे हैं पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कम राम भक्त वे (कमलनाथ) भी नहीं हैं. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने निर्वाचन क्षेत्र छिंदवाड़ा में राम भक्त हनुमान के भव्य मंदिर का निर्माण भी कराया है.

राम वन गमन पथ के विकास के लिए दो हजार करोड़ का बजट
पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में राम वन गमन पथ के विकास का भी वादा किया था. राज्य में 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में लौटी तो इसे रामजी की कृपा ही माना गया. चुनाव में कांग्रेस 114 सीटें जीतने में सफल रही थी. बहुमत के लिए उसे 116 सीटों की जरूरत थी. कमलनाथ ने बसपा और समाजवादी पार्टी का समर्थन लेकर सरकार बनाई. अपनी सरकार के पहले पूर्ण बजट में कमलनाथ ने राम वन गमन पथ के विकास के लिए लगभग दो हजार करोड़ रुपए का प्रावधान विभिन्न विभागों के बजट में किया है.

प्रदेश के अध्यात्म एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री पीसी शर्मा कहते हैं कि राम वन गमन पथ के प्रस्तावित मार्ग में सतना, पन्ना, कटनी, उमरिया, शहडोल और अनुपपुर जिले आते हैं. सरकार की योजना इस राशि से राम वन गमन पथ के तीर्थस्थलों के जीणोद्धार, संरक्षण, विकास एवं जन सुविधाएं, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, मेले, उत्सव और अध्यात्मिक कार्यक्रम प्रस्तावित हैं. प्रतिपक्ष के नेता गोपाल भार्गव कहते हैं कि कमलनाथ लोगों को सिर्फ गुमराह कर रहे हैं. वे यदि वचन का महत्व समझते तो साल भर में राम वन गमन पथ का विकास मौके पर दिखाई देता.

राम वन गमन पथ पर रामायण के विभिन्न कांडों का उल्लेख झांकियों के माध्यम से किए जाने की योजना है, जिसमें रामायण के सातों कांड से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख होगा. राम के जीवन के बारे में विभिन्न प्रसंगों, झांकियों के माध्यम से लोग जान सकें, इसके प्रयास किए जाएंगे. ऑडियो-विजुअल, लोक कलाकारों आदि का भी उपयोग किया जाएगा. चित्रकूट से शुरू किए जाने वाले रामपथ गमन में अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदरकांड सहित अन्य कांडों का चित्रण किया जाएगा.

News - कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में राम वन गमन पथ के विकास का वादा किया था
कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में राम वन गमन पथ के विकास का वादा किया था
अयोध्या के मुकाबले में ओरछा को खड़ा करने की कोशिश
राम वन गमन पथ का विकास कर मुख्यमंत्री कमलनाथ विंध्य क्षेत्र में और ओरछा को अयोध्या के मुकाबले में खड़ा कर बुंदेलखंड क्षेत्र में भाजपा के राम मंदिर के मुद्दे को कमजोर करना चाहते हैं. विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र की सीमाएं उत्तर प्रदेश राज्य से लगी हुईं हैं. उत्तर प्रदेश की राजनीति का असर भी इन इलाकों में पड़ता है. ओरछा में रविवार को राम विवाह का भव्य आयोजन हुआ. इस आयोजन में वाणिज्यिक कर मंत्री बृजेन्द्र सिंह राठौर ने अपनी सक्रिय भागीदारी की.

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी कहते हैं कि कांग्रेस राम के नाम पर राजनीति नहीं करती. राम भक्ति कांग्रेसियों के खून में है.  राम विवाह पंचमी के दिन मन्दिर के अन्दर से पालकी में दूल्हा जू के रूप में बिराजे भगवान की बारात बाहर निकली तो उसी समय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा सलामी दी गई. मन्दिर के अंदर से वाणिज्य कर मंत्री ब्रजेन्द्र सिंह राठौर, क्षेत्रीय विधायक अनिल कुमार जैन और स्थानीय अधिकारी भगवान की पालकी अपने कंधों पर लेकर कुछ दूरी तक चले इसके पश्चात पालकी कहारों (केवट) ने ले ली.

भगवान की बारात, राजसी ठाट के साथ मन्दिर के पीछे से होकर पूरे नगर में घुमाई गई. बारात में राजा शाही के समय पर साथ में चलने वाले प्रतीक चिन्ह, जिसमें मुख्य रूप से जलती हुई मशाल पालकी के आगे चांदी की छड़ी के साथ दरबान तथा राजसी चिह्न तिकोना आदि जो प्रमुख आकर्षण थे, साथ में चल रहे थे. बारात में बड़ी संख्या में धर्मध्वज जय श्री राम के नारे के साथ साथ लोग श्री राम धुन गा रहे थे.

ओरछा में राजा के रूप में होती है भगवान राम की पूजा
ओरछा का रामराजा मंदिर अकेला ऐसा मंदिर है, जहां भगवान श्रीराम की पूजा राजा के रूप में की जाती है. यहां सुबह-शाम मध्य प्रदेश पुलिस के जवान रामराजा को गार्ड ऑफ ऑनर देते हैं. भगवान श्रीराम को अयोध्या से ओरछा लाने वाली यहां की रानी गणेश कुंवारी थीं, वे राम भक्त थीं. उनके पति ओरछा नरेश मधुकर शाह कृष्ण भक्त थे. पति के दबाव के बाद भी वे जब वृन्दावन जाने को तैयार नहीं हुईं तो गुस्से में मधुकर शाह ने कह दिया कि इतनी बड़ी राम भक्त हो तो अपने भगवान को ओरछा ले आओ. कठोकर तप के बाद भी भगवान श्रीराम के दर्शन नहीं हुए तो वे प्राण त्यागने के लिए सरयू नदी में कूद गईं. कहा जाता है कि इस नदी में उन्हें भगवान श्रीराम के दर्शन हुए थे.
ओरछा चलने के लिए भगवान श्रीराम ने रानी के सामने 3 शर्तें रखीं. पहली, यह यात्रा पैदल होगी, दूसरी यात्रा केवल पुष्य नक्षत्र में होगी, तीसरी रामराजा की मूर्ति जिस जगह रखी जाएगी वहां से पुन: नहीं उठेगी. रानी मान गईं, उन्होंने ओरछा नरेश को संदेश भेजा कि वो रामराजा को लेकर आ रही हैं. राजा मधुकरशाह ने रामराजा के विग्रह को स्थापित करने के लिए करोडों की लागत से चतुर्भुज मंदिर का निर्माण कराया. जब रानी ओरछा पहुंची तो उन्होंने यह इस मंशा के साथ मूर्ति अपने महल में रख दी कि शुभ मर्हुत में मूर्ति को चतुर्भुज मंदिर में रखकर इसकी प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी.

लेकिन राम के इस विग्रह ने चतुर्भुज जाने से मना कर दिया. कहते हैं कि राम यहां बाल रूप में आए और अपनी मां का महल छोडकर वो मंदिर में कैसे जा सकते थे. राम आज भी इसी महल में विराजमान हैं और उनके लिए बना करोडों का चतुर्भुज मंदिर आज भी वीरान पड़ा है. यह मंदिर आज भी मूर्ति विहीन है. कमलनाथ सरकार अब इस ओरछा नगरी में मार्च में 3 दिवसीय ओरछा महोत्सव का आयोजन भी करने जा रही है.

News - ओरछा को अयोध्या के मुकाबले में खड़ा कर भाजपा के राम मंदिर के मुद्दे को कमजोर करना चाहते हैं कमलनाथ
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रामलीला मंच से निकलेगा नगरीय निकाय चुनाव की जीत का रास्ता
पिछले साल मध्य प्रदेश के साथ ही राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी. दोनों राज्यों में नगरीय निकाय के चुनाव करा लिए गए हैं. मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय के चुनाव 6 माह टलने की स्थिति बनी हुई है. मुख्यमंत्री कमलनाथ 6 माह के इस समय का उपयोग मैदानी स्तर पर कांग्रेस को मजबूत करने के लिए करना चाहते हैं. राज्य में 16 नगर निगमों के अलावा 318 नगर पालिका एवं नगर पंचायतें हैं. इनका कार्यकाल अगले माह जनवरी में समाप्त हो रहा है. नए चुनाव की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है.

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि कांग्रेस हार के डर से चुनाव कराने से बच रही है. इन आरोपों की परवाह किए बगैर कांग्रेस अपनी रणनीति पर चल रही है. राज्य के नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री जयवर्द्धन सिंह की इस घोषणा को चुनावी राजनीति राजनीति से जोड़कर ही देखा जा रहा है कि नगर पालिका, नगर परिषद में रामलीला के लिए स्थाई मंच का निर्माण कराया जाएगा.

कांग्रेस अपनी इस कोशिश के जरिए भारतीय जनता पार्टी के उस वोटर को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है, जिन्हें भाजपा सरकार पिछले 15 साल से रामलीला और भजन गायन के लिए अनुदान देती रही है. जयवर्द्धन सिंह कहते हैं कि रामलीला का मंचन हमारी पुरानी परंपरा का हिस्सा है. हम इसकी पुरानी पहचान को जीवित रखने की जिम्मेदारी पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं. जयवर्द्धन सिंह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र हैं.

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First published: December 4, 2019, 6:28 PM IST
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