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परिजनों कर रहे थे 'हल्दी की जल्दी', प्रशासन ने रुकवाया बाल विवाह

Sharik Akhtar | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: May 24, 2016, 10:26 PM IST
परिजनों कर रहे थे 'हल्दी की जल्दी', प्रशासन ने रुकवाया बाल विवाह
दोनों परिवारों को हिदायत देते हुए विवाह की रस्‍में रुकवाईं. वहीं, परिजनों से विवाह बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने पर ही विवाह करने का शपथ पत्र भी ले लिया गया.

दोनों परिवारों को हिदायत देते हुए विवाह की रस्‍में रुकवाईं. वहीं, परिजनों से विवाह बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने पर ही विवाह करने का शपथ पत्र भी ले लिया गया.

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मध्यप्रदेश के बुरहानपुर शहर में प्रशासन की सक्रियता से एक नाबालिग बालिका वधू बनने से बच गई. पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर बाल विवाह रोक लिया.

दरसअल, शहर के आजाद नगर क्षेत्र में गरीब मजदूर वर्ग के परिवार की नाबालिग के विवाह की सूचना महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम को मिली.

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सूचना मिलते ही महिला सशक्तिकरण, बाल संरक्षण आयोग की टीम पुलिस के साथ विवाह स्थल पर पहुंची. जहां परिजनों से वधु के उम्र सम्बन्ध प्रमाण पत्र मांगे गए. दस्तावेजों में लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम निकली.

जिसके बाद टीम ने दोनों परिवारों को हिदायत देते हुए विवाह की रस्‍में रुकवाईं. वहीं, परिजनों से विवाह बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने पर ही विवाह करने का शपथ पत्र भी ले लिया गया.

गौरतलब है कि बाल विवाह करने कराने और सम्मलित होने पर एक लाख का जुर्माना और तीन साल की सजा का प्रावधान है.

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के अनुसार बालक की उम्र 21 वर्ष या उससे अधिक व बालिका की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होना चाहिए. इससे कम उम्र में विवाह किया जाना बाल विवाह की श्रेणी में आता है.
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First published: May 24, 2016, 7:25 PM IST
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