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MP में इन जगहों पर थमे सैंकडो बसों के चक्के, पढ़िए क्यों
Burhanpur News in Hindi

Sharik Akhtar Durrani | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: July 28, 2015, 3:42 PM IST
MP में इन जगहों पर थमे सैंकडो बसों के चक्के, पढ़िए क्यों
मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग के जिलों में राज्य सरकार की नई परिवहन नीति के विरोध में एक दिवसीय हड़ताल का ख़ासा असर देखा गया. हड़ताल के चलते क़रीब 1 हज़ार से ज़्यादा बसों के चक्के थमे रहे. बस मालिक सरकार की उस नीति का विरोध कर रहे हैं जिसमें शासन ने प्रदेश में छोटी बसों को केवल 75 किलोमीटर तक की दूरी के लिए परमिट देने का ऐलान किया है.

मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग के जिलों में राज्य सरकार की नई परिवहन नीति के विरोध में एक दिवसीय हड़ताल का ख़ासा असर देखा गया. हड़ताल के चलते क़रीब 1 हज़ार से ज़्यादा बसों के चक्के थमे रहे. बस मालिक सरकार की उस नीति का विरोध कर रहे हैं जिसमें शासन ने प्रदेश में छोटी बसों को केवल 75 किलोमीटर तक की दूरी के लिए परमिट देने का ऐलान किया है.

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मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग के जिलों में राज्य सरकार की नई परिवहन नीति के विरोध में एक दिवसीय हड़ताल का ख़ासा असर देखा गया. हड़ताल के चलते क़रीब 1 हज़ार से ज़्यादा बसों के चक्के थमे रहे. बस मालिक सरकार की उस नीति का विरोध कर रहे हैं जिसमें शासन ने प्रदेश में छोटी बसों को केवल 75 किलोमीटर तक की दूरी के लिए परमिट देने का ऐलान किया है.

जानकारी के अनुसार, मंगलवार को प्रदेश के इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और बुरहानपुर जिलों में बसों के नहीं चलने से यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह जाने में खासी परेशानी हुई. बुरहानपुर में बस ऑनर्स एसोसिएशन ने शांतिपूर्वक अपनी अपनी बसें बंद रखकर प्रदेश की परिवहन नीति का विरोध किया और नीति में बदलाव करने की मांग का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा. बस यूनियनों की मांग है कि सीटों के हिसाब से दूरी तय करने का फैसला सरकार वापस ले. अन्यथा इससे यात्रियों और बस संचालकों को काफी हानि होगी.

प्रशासन बना रहा मूक



ख़ास बात यह रही कि निगम से अनुबंधित बसें भी आज बंद रहीं. प्रशासन भी मूक दर्शक बना रहा और यात्री परेशान होते रहे. गरीब मजदूर वर्ग नियमित बसों से यात्रा करने वाले यात्री आज ज्यादा परेशान रहे. इंदौर के आसपास के सात जिलों के आवागमन का मुख्य माध्यम बसों के थमने से यहां के कारोबार, बच्चों की पढ़ाई पर खासा असर पड़ा है.



पन्ना हादसे से सबक लेकर लिया था फैसला 

पन्ना बस हादसे से सबक लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने यह फैसले लिए थे. इनमें अब प्रदेश में अब 32 सीटर बसों को 75 किलोमीटर से ज्यादा के परमिट जारी नहीं किए जाएंगे. इसके साथ ही सभी बसों की फिटनेस चेक करने और इसकी गारंटी का जिम्मा आरटीओ का होगा. जिन्हें अपने अपने इलाके में चल रही बसों की फिटनेस की गारंटी परिवहन विभाग को लिखित में देना होगी, जैसे तमाम महत्वपूर्ण फैसले शामिल थे. यही नहीं उस हादसे के बाद से राज्य में 400 बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट निरस्त किए जा चुके हैं.

गौरतलब है कि पन्ना में एक प्राइवेट बस पुल से नीचे गिर गई. इसके बाद बस में आग लग जाने से  घटना में करीब 50 यात्री जल गए थे, जिसमें 23 से ज़्यादा की मौके पर ही मौत हो गई थीे.

 

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First published: July 28, 2015, 3:42 PM IST
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