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जानिए उस शख्स के बारे में जिसकी वजह से पांच महीने का बच्चा पूरी दुनिया में आ गया चर्चा में
Burhanpur News in Hindi

News18
Updated: August 1, 2015, 1:57 PM IST
जानिए उस शख्स के बारे में जिसकी वजह से पांच महीने का बच्चा पूरी दुनिया में आ गया चर्चा में
राजस्थान के जयपुर शहर में 5 महीने का अबोध बालक जिसे इस दुनिया में आए हुए अभी ज्यादा वक्त भी नहीं हुआ है और जो अभी सन्यास और गद्दी का मतलब भी नहीं जानता उसे उसके माता पिता ने मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में एक गुरू छोटे सरकार को गोद दे दिया. इसे लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में शनिवार को छुट्टी के दिन अहम सुनवाई हो रही है. पहले जानते हैं दादाजी धूनीवाले के बारे में.

राजस्थान के जयपुर शहर में 5 महीने का अबोध बालक जिसे इस दुनिया में आए हुए अभी ज्यादा वक्त भी नहीं हुआ है और जो अभी सन्यास और गद्दी का मतलब भी नहीं जानता उसे उसके माता पिता ने मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में एक गुरू छोटे सरकार को गोद दे दिया. इसे लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में शनिवार को छुट्टी के दिन अहम सुनवाई हो रही है. पहले जानते हैं दादाजी धूनीवाले के बारे में.

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राजस्थान के जयपुर शहर में 5 महीने का अबोध बालक जिसे इस दुनिया में आए हुए अभी ज्यादा वक्त भी नहीं हुआ है और जो अभी सन्यास और गद्दी का मतलब भी नहीं जानता उसे उसके माता पिता ने मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में एक गुरू छोटे सरकार को गोद दे दिया. इसे लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में शनिवार को छुट्टी के दिन अहम सुनवाई हो रही है. पहले जानते हैं दादाजी धूनीवाले के बारे में.

दादाजी धूनीवाले की गिनती भारत के महान संतों में की जाती है. दादाजी धूनीवाले (स्वामी केशवानंदजी महाराज) एक बहुत बड़े संत थे और लगातार घूमते रहते थे. प्रतिदिन दादाजी पवित्र अग्नि (धूनी) के समक्ष ध्यानमग्न होकर बैठे रहते थे, इसलिए लोग उन्हें दादाजी धूनीवाले के नाम से स्मरण करने लगे. सन 1930 में दादाजी ने मध्य प्रदेश के खण्डवा शहर में समाधि ली. इसके बाद उनके शिष्य के उत्तराधिकारी बनने का सिलसिला शुरू हो गया. और अभी 5 महीने के बच्चे को गोद लेने वाले छोटे सरकार इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे है.

कौन है छोटे सरकार



1.दादाजी धूनीवाले के बाद बाद हरिहरानंद को उनका उत्तराधिकारी माना जाता था. हरिहरानंद ने 1942 में इलाहबाद में कुंभ मेले के दौरान समाधि ली.



2.रामेश्वर दयाल महाराज (छोटे सरकार) ने बड़े सरकार के महासमाधि लेने के बाद उनकी गद्दी संभाली.
3.भक्त दावा करते है कि सन 1952-53 में इंदौर में बड़े सरकार जी महाराज की सेवा में एक शख्स थे जिनका नाम था 'रामदास'.
4.पैरों से कमज़ोर होने के कारण वे अपने आप को ज़मीन पर घसीट घसीट के दिन भर बड़े सरकार जी महाराज की सेवा में लगे रहते थे.
5.एक दिन उनकी सेवा से प्रसन्न हो कर बड़े सरकार ने उन्हें लात मारकर कहा 'क्यूं घसीटता है ? जाओ दिल्ली.'
6.दादा दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक राम दास दिल्ली गये और वहां उन्होंने दादाजी के नाम को लोगों तक पहुंचाया. जुलाई 1962 में राम दास महाराज ने महासमाधि ले ली.
7. 1965 में दावा किया गया कि इंदौर दरबार में बड़े सरकार महाराज ने एक 3 साल के बालक को अपनी गोद में लिया और उन्हे शिक्षा एवं ज्ञान दिया. बड़े सरकार ने उस बालक (रामेश्वर दयाल) को 'छोटे सरकार' नाम दिया.
8. सन 1966 मे बड़े सरकार ने भक्तों को कहा की 'छोटे सरकार' उनके वही गुरु हैं जिन्हें सब भक्तों ने 4 साल रामदास महाराज के रुप में खो दिया था.
9. रामेश्वर दयाल महाराज (छोटे सरकार) ने बड़े सरकार के महासमाधि लेने के बाद उनकी गद्दी संभाली.
10. सन 1965 मे इंदौर दरबार मे बड़े सरकार ने एक 3 साल के बालक को अपनी गोद मे लिया और उन्हे शिक्षा एवं ज्ञान दिया.
11. बड़े सरकार ने उस बालक (रामेश्वर दयाल जी) को 'छोटे सरकार' नाम दिया था. अब उन्हीं छोटे सरकार के एक मासूम को गोद लेने पर बवाल मचा है.

हाईकोर्ट सुनाएगी फैसला

बच्चे के माता-पिता इस मामले में अपने बच्चे को गोद दे चुके हैं जबकि दादा दादी व नाना नानी उनके इस फैसले के खिलाफ अब कोर्ट की शरण मेँ हैं. हाईकोर्ट शनिवार को छुट्‌टी के बावजूद इस मामले में फैसला सुनाएगा.

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट में इस मामले पर शुक्रवार को जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की अदालत में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट भी इस मामले को लेकर काफी नाराज व गम्भीर नजर आई और यही कारण है कि हाईकोर्ट इस मामले को जल्द से जल्द निपटाने के लिए शनिवार को छुट्टी के दिन भी मामले की सुनवाई करेगी.

कहीं बच्‍च्‍ों की बली तो नहीं देना चाहते

5 महीने का अबोध बालक जिसे इस दुनिया में आऐ अभी कुछ ही माह हुए हैं और जो अभी सन्यास और गद्दी का मतलब भी नहीं जानता उसे उसके माता पिता ने मध्यप्रदेश के एक गुरू छोटे सरकार को गोद दे दिया. हाईकोर्ट भी इस मामले में काफी गंभीर नजर आई. हाईकोर्ट में गुरूवार इस मामले की सुनवाई हुई और हाईकोर्ट ने अबोध बच्चे को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए. लेकिन शुक्रवार को सुनवाई के दौरान तय समय तक बच्चे के हाईकोर्ट में पेश न होने पर हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई श‍निवार तक के लिए टाल दी. इस दौरान जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की अदालत ने मामले में मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चे को गोद देने का क्या कारण है क्या बच्चे की बली देना चाहते हैं. हाईकोर्ट ने इस मामले को चौकाने वाला बताया.

अच्‍छी परवरिश के लिए उठाया यह कदम


(बच्चे की मां डाॅ. पूजा)

वहीं दूसरी तरफ बच्चे के माता-पिता को इस बात का कोई गम नहीं है. जहां 5 महिने को इस वक्त माता पिता की परवरिश की जरूरत है वहीं मां बाप ने बच्चे की बेहतरी के नाम पर बच्चे को छोटे सरकार को गोद दे दिया है. और माता पिता का तर्क है कि वह बच्चे की भलाई जानते है और गुरूजी ग्रेजुएट है और वह उसकी अच्छी परवरिश कर सकते हैं.

छुट्टी के दिन होगी सुनवाई

जहां एक ओर हाईकोर्ट मामले की गंभीरता को देखते हुए छुटटी के दिन भी इस मामले की सुनवाई करने को तैयार है. वहीं दुधमुहे बच्चे के मां बाप बच्चे की बेहतर परवरिश के नाम पर बच्चे को गोद दे चुके हैं. अब इस मामले पर शनिवार को छुटटी के दिन सुबह 11 बजे जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की अदालत में सुनवाई होगी. और उसमें बच्चे की कस्टडी किसके पास रहेगी यह तय किया जाऐगा. अब देखना होगा कि आज बच्चे के जयपुर पहुंच जाने के बाद श्‍ानिवार को हाईकोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाता है.

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First published: August 1, 2015, 1:56 PM IST
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