लाइव टीवी

दुष्कर्मी और हत्यारों के डर से आदिवासी गांव की 25 होनहार छात्राओं ने छोड़ी पढ़ाई

Sharik Akhtar | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: March 12, 2016, 8:57 PM IST
दुष्कर्मी और हत्यारों के डर से आदिवासी गांव की 25 होनहार छात्राओं ने छोड़ी पढ़ाई
बुरहानपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य बोमल्यापाट गांव की दो दर्जन से ज्यादा छात्राओं ने दरिंदों के डर से स्कूल जाना छोड़ दिया है.

बुरहानपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य बोमल्यापाट गांव की दो दर्जन से ज्यादा छात्राओं ने दरिंदों के डर से स्कूल जाना छोड़ दिया है.

  • Share this:
बुरहानपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य बोमल्यापाट गांव की दो दर्जन से ज्यादा छात्राओं ने दरिंदों के डर से स्कूल जाना छोड़ दिया है. छात्राओं को भय है कि शिक्षिका और एक बच्ची के साथ रेप कर उनकी हत्या करने वाले आरोपी उन्हें भी अपना शिकार न बना लें.

दरअसल, दो साल पहले 12 वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था. सबूतों के अभाव में पुलिस आरोपियों का पता नहीं लगा पाई. इस के बाद यहां रहने वाले आदिवासी परिवार इतने सहम गए कि 25 होनहार बालिकाओं की बीच में ही पढ़ाई छुड़वा दी.

इसके बाद हाल ही में एक शिक्षिका का रेप कर हत्या किए जाने का मामला सामने आया. जिसमें गांव के ही दो युवक पकड़े गए. पुलिस पूछताछ में पता चला कि उन्हीं युवकों ने दो साल पहले की भी वारदात कबूल ली. अब गांव वाले इन आरोपियों को फांसी जैसी सख्त सजा देने की बात कह रहे हैं.

'दुश्मन' फिल्म की तर्ज पर वारदात

1998 में बड़े पर्दे की फिल्म 'दुश्मन' के गोकुल पंडित (आशुतोष राणा) के घिनौने किरदार की तर्ज पर युवकों ने ऐसी वारदातों को अंजाम दिया था. मांडवा गांव के दो युवकों राजेश और अर्जुन पहले दुष्कर्म करते फिर उन्हें बेरहमी से मौत के घाट उतार देते. दो साल पहले इन्होंने एक छात्रा को अपने वहशियानापन का शिकार बनाया, फिर हाल ही में एक शिक्षिका के साथ रेप कर उसे रास्ते से हटाया.

गांव में डर का माहौल
ग्रामीणों ने आप बीती सुनाते हुए बताया कि, दो घटनाओं ने यहां के रहवासियों को इतना झकझोर कर रख दिया है. करीब दो दर्जन से अधिक होनहार बेटियों ने असुरक्षा के चलते गांव से करीब 5 किलोमीटर दूर सुनसान रास्ते से होकर स्कूल जाना छोड़ दिया है.गांव में ही खुलवाया जाए स्कूल
आदिवासी एकता परिषद के अध्यक्ष नाहर सिंह ने बताया कि गांववासी भी अपनी बेटियों को आगे पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन गांव में सक्रिय विकृत मानसिकता के चलते वे अपनी बेटियों को आगे नहीं पढ़ाने में भलाई मान रहे हैं. उनकी सरकार से मांग है कि अगर गांव में ही माध्यमिक सकूल शुरू कर दिया जाए, तो उनकी बेटियां बेरोकटोक आगे की पढ़ाई कर सकेंगीं.

सुरक्षा का माहौल बनाए सरकार
समाजसेवी एम फारुख ने आदिवासी बाहुल्य गांव में इस तरह के भय असुरक्षा और अविश्वास के भाव को लेकर चिंता जाहिर की. उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा है कि इन गांव में कुछ ऐसा वातावरण बनाया जाए, ताकि दोबारा बेटियां अपनी आगे की पढ़ाई निर्बाध रूप से कर सकें.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए बुरहानपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 12, 2016, 8:56 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर