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अब बुरहानपुर में भी फलेगी-फूलेगी 'कड़कनाथ' की प्रजाति

News18
Updated: January 23, 2016, 7:04 PM IST
अब बुरहानपुर में भी फलेगी-फूलेगी 'कड़कनाथ' की प्रजाति
झाबुआ जिले की पहचान कड़कनाथ मुर्गे की प्रजाति को अब बुरहानपुर जिले में भी बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी कड़ी में कड़कनाथ प्रजाति के लगभग 200 चुजें और 100 बड़े कड़कनाथ पक्षी ग्रामीणों को वितरित किए गए.

झाबुआ जिले की पहचान कड़कनाथ मुर्गे की प्रजाति को अब बुरहानपुर जिले में भी बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी कड़ी में कड़कनाथ प्रजाति के लगभग 200 चुजें और 100 बड़े कड़कनाथ पक्षी ग्रामीणों को वितरित किए गए.

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  • Last Updated: January 23, 2016, 7:04 PM IST
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झाबुआ जिले की पहचान कड़कनाथ मुर्गे की प्रजाति को अब बुरहानपुर जिले में भी बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी कड़ी में कड़कनाथ प्रजाति के लगभग 200 चुजें और 100 बड़े कड़कनाथ पक्षी ग्रामीणों को वितरित किए गए.

दरअसल, सांडस कला में कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन किया गया. इस दौरान नेपानगर व ग्राम उमरदा, पूरा, सांडस, सारोला, देड़तलाई से लगभग 150 किसानों व कृषक महिलाओं ने हिस्सा लिया.

इस अवसर पर कलेक्टर जे.पी.आईरीन सिंथिया ने कहा कि कड़कनाथ पालन को जिले में बढावा देने की जरूरत है. इस अवसर पर उन्होनें चार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को 40 चूजे, 7 मुर्गिया और 1 मुर्गा प्रति समुह को प्रदान किया.

कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉं. अजीत सिंह ने जिले में कड़कनाथ प्रजाति को बढावा देने के लिये पिछले दो वर्षो से अलग-अलग गांवों में किये गये कार्यों एवं वर्तमान में इसकी उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी.

वैज्ञानिक अमोल देशमुख ने कड़कनाथ के पालन-पोषण विषय पर पूर्ण जानकारी से अवगत कराया. कलेक्टर ने सांडसकला में स्थित कड़कनाथ युनिट, क्राप केफेटेरिया एवं फार्म का अवलोकन कर इस प्रजाति को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव मदद देने का ऐलान किया.

कड़कनाथ की विशेषता
कड़कनाथ भारत का एकमात्र काले रंग वाला चिकन है. औषधीय गुणों वाले इस मुर्गे की टांगे, पंख समेत पूरा रंग काला होता है. माना जाता है कि कड़कनाथ के मीट में सामान्य मु्र्गों के मुकाबले वसा का स्तर कम और अमीनो एसिड का स्तर ज्यादा पाया जाता है. इस मुर्गे का सेवन करने वाले लोगों का मानना है कि कड़कनाथ के भीतर लौह तत्व काफी मात्रा में पाया जाता है.जो दिल की बीमारी, दमा, क्षय रोग, स्त्री रोग जैसी बीमारियों में बेहद लाभदायक होता है. वहीं, महिलाओं को प्रसव के बाद होने वाले भयंकर सिरदर्द से भी यह निजात दिलाता है. कई बीमारियों से लड़ने में सहायक मुर्गे की इस प्रजाति को बोलचाल की भाषा में कालामसी भी कहा जाता है.

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First published: January 23, 2016, 6:58 PM IST
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