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इस बच्चे को ऐसी बीमारी, हर कदम पर रहता है हड्डी टूटने का डर
Burhanpur News in Hindi

News18
Updated: August 7, 2015, 6:33 PM IST
इस बच्चे को ऐसी बीमारी, हर कदम पर रहता है हड्डी टूटने का डर
दुनिया में न जाने कितनी तरह की बीमारियां हैं लेकिन अगर किसी को ऐसी बीमारी हो कि चलते चलते ही हड्डियां टूट जाएं, तो उसके लिए पूरा जीवन संघर्ष में बदल जाता है. खंडवा में रहने वाले आठ साल का तुषार ऐसी ही बीमारी से पीड़ित है. नन्हा तुषार ठीक से चल भी नहीं पाता पर उसकी जिद है कि वो दूसरे बच्चों की तरह स्कूल जा कर ही पढ़ेगा और अपनी मां की मदद से वो ऐसा कर भी रहा है.

दुनिया में न जाने कितनी तरह की बीमारियां हैं लेकिन अगर किसी को ऐसी बीमारी हो कि चलते चलते ही हड्डियां टूट जाएं, तो उसके लिए पूरा जीवन संघर्ष में बदल जाता है. खंडवा में रहने वाले आठ साल का तुषार ऐसी ही बीमारी से पीड़ित है. नन्हा तुषार ठीक से चल भी नहीं पाता पर उसकी जिद है कि वो दूसरे बच्चों की तरह स्कूल जा कर ही पढ़ेगा और अपनी मां की मदद से वो ऐसा कर भी रहा है.

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  • Last Updated: August 7, 2015, 6:33 PM IST
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दुनिया में न जाने कितनी तरह की बीमारियां हैं लेकिन अगर किसी को ऐसी बीमारी हो कि चलते चलते ही हड्डियां टूट जाएं, तो उसके लिए पूरा जीवन संघर्ष में बदल जाता है. खंडवा में रहने वाले आठ साल का तुषार ऐसी ही बीमारी से पीड़ित है. नन्हा तुषार ठीक से चल भी नहीं पाता पर उसकी जिद है कि वो दूसरे बच्चों की तरह स्कूल जा कर ही पढ़ेगा और अपनी मां की मदद से वो ऐसा कर भी रहा है.

दरअसल तुषार को जन्म से ही आस्टियोजेनेसिस इमपरफेक्टा नाम की बीमारी है. जिसमें जरा से मूवमेंट और प्रेशर पर ही हड्डियां टूट जाती हैं और मूवमेंट के साथ ही अपने आप जुड़ भी जाती हैं. यह बीमारी इतनी घातक है कि पीड़ित को हर वक्त मलटिपल फ्रेक्चर होने का डर रहता है. अगर फ्रेक्चर हो भी जाए तो उस पर प्लास्टर नहीं किया जा सकता क्योंकि हड्डियां यह प्रेशर भी बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी.

इतनी खतरनाक बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद 8 साल का मासूम तुषार हमेशा हंसता खिलखिलाता रहता है, जिससे उसके माता-पिता को हिम्मत मिलती है. पर उसकी एक जिद ने उन्हें भी परेशानी में डाल दिया था. तुषार की ज़िद थी कि वो भी दूसरे बच्चों की तरह पढ़ना चाहता है वो भी स्कूल जा कर.



जो बच्चा ठीक से चल भी नहीं पाता और हल्के से दबाव से ही जिसकी हड्डियां टूट जाती हैं, ऐसे बच्चे को रोज स्कूल भेजना उसके मां-बाप के लिए मुश्किल था,क्योंकि स्कूल कितना ही अच्छा क्यों न हो लेकिन वो लाखों में चुनिंदा लोगों को होने वाली इस बीमारी से पीड़ित बच्चे का ख्याल हर समय नहीं रख सकते.



ऐसे में बेटे की इच्छा को पूरा करने का बीड़ा उठाया तुषार की मां सीमा ने. जिन्होंने फैसला किया कि उनका बेटा अपनी इच्छा के मुताबिक रोज स्कूल जाएगा वो भी उनके साथ और उसकी देखभाल के लिए वो खुद पूरे समय उसके साथ मौजूद रहेंगी. इसके लिए उन्होंने और पति राजेश गांगले ने विशेष तौर पर जिला शिक्षा अधिकारी से अनुमति ली.

जिसके बाद सीमा और राजेश ने अपने लाड़ले का एडमिशन घनश्याम प्रसाद शासकीय स्कूल में करवा दिया. जहां वो अब रोज अपने बेटे की सुरक्षा कवच बनकर स्कूल जाती है और पूरे पांच घंटे तक हर विषय की क्लास में अपने बेटे के साथ बैठी रहती हैं.

तुषार के माता-पिता का कहना है कि उनका बेटा तुषार छोटी उम्र ही बहुत संघर्ष कर रहा है. वो जब पैदा हुआ था तब डॉक्टरों ने कहा था कि वो ज्यादा दिन तक जिंदा नहीं रह पाएगा और जब वो बच गया तो चार साल की उम्र तक उसने बोलना शुरू नहीं किया. जब थोड़ा बहुत बोला तो उसने पहली बार कोई इच्छा जाहिर की वो भी पढ़ने और स्कूल जाने की तो ऐसे में भला वो अपने बेटे की इस इच्छा को कैसे पूरा न करते. अब चाहे इसके लिए उन्हें अपनी जिन्दगी में कई बदलाव लाने पड़े लेकिन उन्हें अपने बेटे के खातिर सब परेशानियां मंजूर हैं.

क्या है आस्टियोजेनेसिस इमपरफेक्टा ?

-डॉक्टरों का कहना है कि आस्टियोजेनेसिस इमपरफेक्टा बीमारे लाखों में से 6 या 7 लोगों को होती है.

-इस बीमारी की वजह शरीर में हार्मोंस की कमी होना है. जिससे हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि वो थोड़े से प्रेशर के साथ ही टूट जाती हैं.

-आनुवंशिक खराबी के कारण रोगी में कोलैजन, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है. कम बनाता है जिससे हडि्डयां और अधिक कमजोर हो जाती है.

मांसपेशियों भी कम विकसित होती है, फलस्वरूप कद भी छोटा रह जाता है.

-यह रोग इतना खतरनाक होता है कि सिर की हड्डियां टूटने से मस्तिष्क कुचल कर नवजात शिशु की जान तक जा सकती है.

-इस बीमारी का अब तक कोई इलाज भी इजात नहीं हुआ है. जिससे इस बीमारी से पीड़ित बच्चे को वयस्क होने तक इससे जूझना पड़ता है.

-वयस्क होने पर हड्डियां टूटना बंद होकर इस बीमारी का प्रकोप समाप्त हो जाता है.

-इस बीमारी को किसी टेस्ट में भी नहीं पकड़ा जा सकता. जब बार बार हड्डियां टूटती हैं तो इसके लक्षण देखकर डॉक्टर इस बीमारी को पकड़ते हैं. इसके बाद डीएनए टेस्ट के
जरिए इस बीमारी के बारे में कंफर्मेशन ली जाती है.

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First published: August 7, 2015, 1:29 PM IST
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