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मिसाल: अपनों ने ठुकराया तो गैरों से मिला मां का प्यार और बच गई जान

Sharik Akhtar Durrani | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: September 14, 2016, 12:07 PM IST

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में इंसानियत की मिसाल कायम करने वाला मामला सामने आया है. यहां पर जब मां की मृत्यु के बाद उसके बच्चे को परिवार ने भी अपनाने से मना कर दिया तो दो महिलाओं ने आगे आते हुए मासूम को बचाने के लिए उसे अस्पताल तक पहुंचाया.

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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में इंसानियत की मिसाल कायम करने वाला मामला सामने आया है. यहां पर जब मां की मृत्यु के बाद उसके बच्चे को परिवार ने भी अपनाने से मना कर दिया तो दो महिलाओं ने आगे आते हुए मां का फर्ज निभाया और मासूम की जान बचा ली.

दरअसल, महाराष्ट्र में ब्याही ज्योतिबाई अपने मायके बुरहानपुर जिले के आदिवासी ब्लॉक खकनार के बोरखेडा गांव में आई हुई थी. ज्योतिबाई के प्रसूती होने पर घर में ही दाई से प्रसव कराया गया.

प्रसव में ज्योतिबाई ने बालक को जन्म दिया लेकिन उसकी मौत हो गई. बच्चे की हालत भी काफी नाजुक थी.

इसके बाद परिजनों ने गांव की आशा कार्यकर्ता जोशिलाबाई सुभाष को पेट में दर्द होने के बहाना बनाकर बुलाया. कार्यकर्ता ने महिला को देखते ही उसे मृत घोषित कर दिया. एंबुलेंस को फोन कर बुलाया गया तो वो भी एक घंटा देरी से पहुंची और उन्होंने भी महिला को मृत पाते हुए उसे ले जाने से इनकार कर दिया.

ये सब देख ज्यातिबाई के परिजनों ने उसके नवजात बच्चे को भी अपनाने से इनकार करते हुए उसे आशा कार्यकर्ता जोशिलाबाई और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भगवती नारायण को थमा दिया. इन दोनों कार्यकर्ताओं ने बच्चे का साथ नहीं छोड़ा और उसकी देखभाल करती रहीं.

उन्होंने दोबारा 108 एंबुलेंस को बुलाया और खुद बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंची. अस्पताल में नवजात को एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया है. अब बच्चे की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है. वहीं दोनों महिलाएं अभी भी अस्पताल में रहते हुए बच्चे की देखभाल कर रही हैं, ताकि उसे किसी चीज की कमी न हो.

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First published: September 14, 2016, 7:24 AM IST
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