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MP: धार्मिक मेले में मची भगदड़, एक व्यक्ति की मौत और तीन गंभीर घायल

Sharik Akhtar | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: June 14, 2016, 11:56 PM IST
MP: धार्मिक मेले में मची भगदड़, एक व्यक्ति की मौत और तीन गंभीर घायल
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मध्यप्रदेश में बुरहानपुर जिले के महाजनापेठ वार्ड में आयोजित परंपरागत बारागाड़ी मेले में अचानक भगदड़ मच गई. इस भगदड़ में एक युवक के ऊपर से बैलगाड़ी का पहिया निकल जाने से उसकी मौत हो गई, जबकि तीन अऩ्य लोग घायल हो गए.

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मध्यप्रदेश में बुरहानपुर जिले के महाजनापेठ वार्ड में आयोजित परंपरागत बारागाड़ी मेले में अचानक भगदड़ मच गई. इस भगदड़ में एक युवक के ऊपर से बैलगाड़ी का पहिया निकल जाने से उसकी मौत हो गई, जबकि तीन अऩ्य लोग घायल हो गए.

घटना के बाद मेला स्थल पर अफरा-तफरी मच गई. हादसे में गंभीर घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है. जहां पर भी लोगों की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी है. शिकापुरा पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है.

जानिए, बारागाड़ी मेले से जुड़ी पूरी कहानी
दरअसल, महाराष्ट्र से सटे मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में क़रीब दो सौ साल से एक अनोखे मेले का आयोजन होता आ रहा है. शहर में एक दर्जन से अधिक जगहों पर बारागाड़ी मेलाा लगता है. मेले में बैलों को जोतने वाली 12 गाड़ियों को एकसाथ बांध कर सैकड़ों लोग सवार होते हैं और एक व्यक्ति पूजा अर्चना कर इन बारह गाड़ियों को 500 मीटर तक खींचता है. इस नज़ारे को देखने के लिए हज़ारों लोगों की भीड़ जमा होती है.

200 साल से ज़्यादा पुरानी परंपरा

कुछ लोगों के अनुसार यह परंपरा 150 से 300 साल पुरानी है. बारह गाड़ी को खींचने वाला जिसे भगत कहा जाता है, वह नौ दिन तक विशेष पूजा करता है. गृहस्थ रहते हुए ब्रह्मचार्य का पालन करता है. नौवें दिन जिस दिन बारहगाड़ी खींचता है और उस दिन भगत का विशेष श्रृंगार होता है. भगत को अलग तरह की गणवेश पहनाई जाती है.

इसलिए पड़ा बारहगाड़ी नाममहाराष्ट्र से सटे हुए बुरहानपुर जिले में बैलों को जोतने वाली बारह गाड़ियों को एक साथ बांधा जाता है. चूंकि बारह बैलगाड़ी होने से इस आयोजन का बारागाड़ी मेला नाम पड़ गया है. ख़ास बात यह है कि इन बारह गाड़ियों को एक साथ बांधा जाता है और हर गाड़ी पर दर्जनों लोग सवार होते हैं. लोगों से खचाखच भरी इस बारह गाड़ी को अकेला भगत खींचता है.

महापौर भी इसे दैवीय शक्ति मानते हैं

इस आस्था से खूद शहर के महापौर भी जुड़े हैं. महापौर अनिल भोंसले ने दावा किया था कि, 'सामान्य रूप से एक अकेला व्यक्ति बैलों के बिना गाड़ी नहीं खींच सकता वहीं, लोगों से भरी बारह गाड़ी को भगत 500 मीटर तक खींचता है. यह किसी दैवीय शक्ति से कम नहीं है.'

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First published: June 14, 2016, 11:25 PM IST
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