क्या आपके बच्चे भी इस तरह स्कूल जाते हैं ? देखिए रियलिटी टेस्ट

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

मध्य प्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट ने ऑटो रिक्शा वाहनों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने को कहा है. कोर्ट ने छोटे बच्चों को 20-25 की संख्या में ऑटो रिक्शा में भेड़-बकरी की तरह ढोने पर चिंता जाहिर की है.

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मध्य प्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट ने ऑटो रिक्शा वाहनों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने को कहा है. कोर्ट ने छोटे बच्चों को 20-25 की संख्या में ऑटो रिक्शा में भेड़-बकरी की तरह ढोने पर चिंता जाहिर की है.

स्कूलों में लगे तमाम ऑटो रिक्शा चालकों के लिए हाईकोर्ट ने पहले भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन आज तक किसी भी ऑटों में नियमों को पालन नहीं किया जा रहा है.

हालात ये बने हुए हैं कि स्कूलों में लगे ऑटो रिक्शा वाहनों में 20 से 25 की संख्या में बच्चों को बैठाया जा रहा है, जिससे हादसों की आशंका बनी ही रहती है. वहीं, सिर्फ जबलपुर शहर में ही 99 प्रतिशत ऑटो रिक्शा गैरकानूनी तरीके से चलाए जा रहे हैं.



किराया तालिका लगाने के निर्देश
परमिट लेने के बाद सवारी की संख्या बढ़ाने के लिए ऑटो की संरचना में परिवर्तन किया जा रहा है, जो की गैर क़ानूनी है. हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी ऑटो रिक्शा वाहनों में भाड़ा तालिका लगाने और हर उसी हिसाब से किराए वसूलने के आदेश भी जारी किए हैं. साथ ही कोर्ट ने सीधे तौर पर जिम्मेदार आरटीओ जबलपुर और एएसपी ट्रैफिक को हाजिर होने के आदेश दिए हैं

बुरहानपुर में कोई सुनवाई नहीं  

प्रदेश के बुरहानपुर में भी स्कूल वाहनों के यही हालत हैं. बच्चों के पालकों की मानें तो उन्होंने भी ऑटो रिक्शा में क्षमता से अधिक बच्चे बैठाने का विरोध किया, लेकिन यह विरोध बेअसर रहा. इसके बाद वे रिक्शा में भेजने की जोखिम लेने की बजाए खुद ही बच्चों को स्कूल ले जाने लगे.

उधर, कानून जानकारों के मुताबिक अब जबकि उच्च न्यायालय ने इस मसले पर चिंता जाहिर की है तो ऐसे में इसे रोकने के लिए जिम्मेदार आरटीओ और यातायात पुलिस को सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. साथ ही स्कूल संचालक भी इसे रोकने में अहम रोल अदा कर सकते हैं.

इंदौर के ऑटो चालकों पर भरोसा नहीं 

प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में गुरुवार सुबह कुछ स्कूलों के बाहर जाकर ईटीव्ही की टीम ने मुआयना किया. जहां आने वाले ऑटो रिक्शा चालकों की भारी चूक नजर आयी.

कुछ ऑटो रिक्शा चालकों ने ऑटो में बच्चे खचा-खच भरे थे और कहीं कुछ चालकों ने बच्चों को आगे की सीट पर भी बैठा रखा था. साथ ही सभी छात्र-छात्राओं के बस्ते भी आगे रखी हुए थे. दूर से देखने पर तो माजरा समझ ही नहीं आ रहा था.

वाहन चालक बोले- इससे ज्यादा भी बैठा सकते हैं

परिजनों में भी ऑटो चालकों के प्रति एक असुरक्षा का भाव नजर आया. कुछ परिजन लंबे समय से खुद ही बच्चों को स्कूल छोड़ने आने लगे हैं. दरअसल, दबी जुबान से कुछ ऑटो चालकों ने ये भी कह दिया कि, 'इतने क्या, इससे ज्यादा भी बच्चे बैठा सकते है. पुलिस को पैसे देकर सब मैनेज हो जाता है.'

कुछ अभिभावकों ने ऑटो रिक्शा चालकों पर असुरक्षा का भाव रखते हुए ये तक कहा कि, हम लोग अखबारों के माध्यम से जानते हैं कि ऑटो चालक बच्चों से गंदी हरकतें तक कर देते हैं. ऐसे लोगों के साथ बच्चों को कैसे भेज दें. बच्चों के पालकों ने मांग करते हुए कहा कि, ऑटो चालकों के पुलिस सत्यापन भी होना चाहिए और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को इस पेशे से दूर ही रहना चाहिए.
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