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SPECIAL: वृक्ष मंदिर जो दे रहा है पर्यावरण संतुलन की प्रेरणा

बुरहानपुर के बडगांव माफी गांव में दो दशक पूर्व अध्यात्मिक संस्था स्वाध्याय परिवार द्वारा बनाया गया प्रदेश का एकलौता वृक्ष मंदिर पर्यावरण को संतुलित करने की मिसाल बना हुआ है. 10 एकड में करीब 800 फलदार पेड़ वाला वृक्ष मंदिर में आने वाले लोग इन पेड़ों को भगवान की तरह पूजते हैं. साथ यहां आकर लोग अपने घरों व खेतों में पेड़ लगाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं. वन विभाग के अनुसार यह वृक्ष मंदिर 24 किलोमीटर की परिधि में आने वाले गांवों के पर्यावरण को संतुलित कर रहा है.
बुरहानपुर के बडगांव माफी गांव में दो दशक पूर्व अध्यात्मिक संस्था स्वाध्याय परिवार द्वारा बनाया गया प्रदेश का एकलौता वृक्ष मंदिर पर्यावरण को संतुलित करने की मिसाल बना हुआ है. 10 एकड में करीब 800 फलदार पेड़ वाला वृक्ष मंदिर में आने वाले लोग इन पेड़ों को भगवान की तरह पूजते हैं. साथ यहां आकर लोग अपने घरों व खेतों में पेड़ लगाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं. वन विभाग के अनुसार यह वृक्ष मंदिर 24 किलोमीटर की परिधि में आने वाले गांवों के पर्यावरण को संतुलित कर रहा है.

बुरहानपुर के बडगांव माफी गांव में दो दशक पूर्व अध्यात्मिक संस्था स्वाध्याय परिवार द्वारा बनाया गया प्रदेश का एकलौता वृक्ष मंदिर पर्यावरण को संतुलित करने की मिसाल बना हुआ है. 10 एकड में करीब 800 फलदार पेड़ वाला वृक्ष मंदिर में आने वाले लोग इन पेड़ों को भगवान की तरह पूजते हैं. साथ यहां आकर लोग अपने घरों व खेतों में पेड़ लगाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं. वन विभाग के अनुसार यह वृक्ष मंदिर 24 किलोमीटर की परिधि में आने वाले गांवों के पर्यावरण को संतुलित कर रहा है.

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बुरहानपुर के बडगांव माफी गांव में दो दशक पूर्व अध्यात्मिक संस्था स्वाध्याय परिवार द्वारा बनाया गया प्रदेश का एकलौता वृक्ष मंदिर पर्यावरण को संतुलित करने की मिसाल बना हुआ है. 10 एकड में करीब 800 फलदार पेड़ वाला वृक्ष मंदिर में आने वाले लोग इन पेड़ों को भगवान की तरह पूजते हैं. साथ यहां आकर लोग अपने घरों व खेतों में पेड़ लगाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं. वन विभाग के अनुसार यह वृक्ष मंदिर 24 किलोमीटर की परिधि में आने वाले गांवों के पर्यावरण को संतुलित कर रहा है.

बुरहानपुर के पास अमरावती रोड़ पर बडगांव माफी गांव में स्थित है यह वृक्ष मंदिर. आज से करीब 20 साल पहले आध्यात्मिक संस्था स्वाध्याय परिवार द्वारा 10 एकड़ भूमि पर फलदार पौधों को लगाकर वृक्ष मंदिर स्थापित किया गया. अब यहां 800 फलदार पेड लगे हैं. स्वाध्याय परिवार से जुडे करीब 20 गांव के सैकडों सदस्य यहां आकर इन पेड़ों को भगवान की तरह पूजा करते हैं और श्रमदान करते हैं. साथ ही यहां उत्पादित होने वाले फलों को प्रसाद के रूप में लेते हैं.

वृक्ष मंदिर में चीकू, आम, जाम आदि फलों के पेड़ हैं. वृक्ष मंदिर में नियमित आने वाले यहां आकर काफी सुकून महसूस करते हैं और तो और यहां आकर यह लोग अपने घरों और खेतों में भी फलदार व छायादार पेड़ लगाने के प्रति प्रेरित होते हैं. यहां आने वालों का मानना है पर्यावरण सुधार के लिए वृक्ष मंदिर से अच्छा कोई उदाहरण नहीं है.



बडगांव माफी गांव के बुजुर्ग किसानों के अनुसार जिस जमीन पर आज वृक्ष मंदिर बना है यह कभी बंजर और पडत भूमि थी. स्वाध्याय परिवार ने इस जमीन को खरीद कर 800 फलदार पौधे रोपित किए जो आज वृक्ष मंदिर बनकर पर्यावरण को संतुलित करने में अपना योगदान दे रहा है.
बुजुर्गों के अनुसार वृक्ष मंदिर से आसपास के गांव का पर्यावरण काफी संतुलित हुआ है. बारिश के मौसम में अच्छी बारिश और गर्मी के दिनों में कम तापमान रहता है. इन 20 सालों में कई गांव में वृक्ष मंदिर की प्रेरणा से घर व खेतों में पेड़ लगाने के प्रति जागरूकता आई है.

वन विभाग के आला अधिकारी भी वृक्ष मंदिर के तारीफ करते नहीं थकते. विभाग के अनुसार देश और प्रदेश की वन नीति में भी साफ उल्लेख है कि भौगोलिक क्षेत्रफल का एक तिहाई वन होना चाहिए. स्वस्थ्य जलवायु के लिए अगर वृक्ष मंदिर की बात करें तो 10 एकड में लगे 800 फलदार पेड़ों से लगभग 24 एकड परिधि मेंं इससे पर्यावरण संतुलित होगा. वन विभाग वृक्ष मंदिर को डाक्यूमेंटेशन कर देश प्रदेश में इसे पुरस्कृत कराने की बात कह रहा है.

लगातार प्रदूषण फैलने से पर्यावरण असंतुलित हो रहा है और ग्लोबल वार्मिंग का भी खतरा दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है. ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को कम करने व पर्यावरण को संतुलित करने का सबसे कारगर उपाय है. पेडों की संख्या में वृध्दि ऐसे में बुरहानपुर का यह वृक्ष मंदिर पर्यावरण को संतुलित करने के प्रति एक नजीर साबित होगा.

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