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ठेले पर सोकर रात बिताने वाला किसान बन गया करोड़पति
Burhanpur News in Hindi

News18
Updated: August 24, 2015, 11:51 AM IST
ठेले पर सोकर रात बिताने वाला किसान बन गया करोड़पति
एक पिछड़े इलाके में मजदूरी करके आजीविका चलाने वाले तोताराम कुशवाहा के भविष्य के बारे में यही कल्पना की जा सकती थी कि वह दूसरों के खेतों में दिहाड़ी मजदूरी करके गरीबी में ही जीवन बिताएगा. लेकिन खुद तोताराम के इरादे कुछ और ही थे.

एक पिछड़े इलाके में मजदूरी करके आजीविका चलाने वाले तोताराम कुशवाहा के भविष्य के बारे में यही कल्पना की जा सकती थी कि वह दूसरों के खेतों में दिहाड़ी मजदूरी करके गरीबी में ही जीवन बिताएगा. लेकिन खुद तोताराम के इरादे कुछ और ही थे.

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एक पिछड़े इलाके में मजदूरी करके आजीविका चलाने वाले तोताराम कुशवाहा के भविष्य के बारे में यही कल्पना की जा सकती थी कि वह दूसरों के खेतों में दिहाड़ी मजदूरी करके गरीबी में ही जीवन बिताएगा. लेकिन खुद तोताराम के इरादे कुछ और ही थे.

उन्होंने मेहनत के साथ चातुर्य ना दिखाया होता और सरकारी मदद ना ली होती, तो उनकी जिंदगी में यह मोड़ नहीं आता. आज तोताराम एक करोड़पति किसान हैं. सरकारी योजनाओं की मदद और अपनी मेहनत से संपन्न हुए किसानों पर लिखी सफलता की गाथाओं में से एक उनकी भी है.

खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी के अंतर पर स्थित एक छोटे-से गांव गोलवाड़ी के तोताराम दूसरों के खेतों में काम करके किसी तरह अपनी आजीविका चलाया करते थे. उनके यहां तीन पीढ़ियों से दिहाड़ी मजदूरी करके ही परिवार का भरण-पोषण होता आ रहा था. लेकिन तोताराम के इरादे कुछ और ही थे. वे दशकों से चली आ रही परिवार की परंपरा को तोड़ते हुए खुद के पैरों पर खड़ा होना चाहते थे.



इसके लिए उन्होंने अथक मेहनत करके और सूझबूझ से कर्ज लेकर अन्य कार्य भी किए. फिर भाड़े पर जमीन लेकर सोयाबीन, अरंडी, गेहूं की खेती की. बाद में तोताराम ने गोलवाड़ी में जमीन खरीद ली. लेकिन उसकी तरक्की में शासन के उद्यानिकी विभाग का भी कम योगदान नहीं है.



उद्यानिकी विभाग ने उद्यानिकी के जरिए तोताराम की खेतीबाड़ी का कायाकल्प करने हेतु तोताराम और उनकी पत्नी रूकमणि को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ हल्दी एवं अदरक की फसलें लेने के लिए बीस-बीस हजार रूपए का अनुदान दिया. इसके बाद इन दोनों पति-पत्नी को एक बार फिर हल्दी एवं अदरक के लिए दस-दस हजार रूपए का अनुदान दिया. चंद महीनों की उद्यानिकी खेती में यह सफर इतना कामयाब हुआ कि लागत के अलावा भारी मुनाफा भी निकाला.

तोताराम का उत्साह कुलांचे भरने लगा. वह आज साल में तीन फसलें लेते हैं. इसमें मक्का, सोयाबीन, मिर्च, हल्दी, अदरक, प्याज, कपास, पपीता, करेला, टमाटर, गेहूं, चना आदि की फसल शामिल है.

तोताराम सालभर में तकरीबन एक हजार लोगों को काम देते हैं. तोताराम की पत्नी रूक्मणि याद करती हैं, 'पहले सर छुपाने को जगह नहीं थी और ठेले पर सोकर रात बिताते थे. आज दो-दो मकान हैं. पहले पैसे को तरसना पड़ता था. अब खुद की कमाई से बचत भी हो रही हैं.

तोताराम का बैंक खाता अब उद्यानिकी फसलों की कमाई के बाद भर रहा है. भारी कमाई की बदौलत उनके सारे सपने एक ही झटके में पूरे हो गए. अब उनके पास कहीं कोई तंगी नहीं है. खेती की कमाई से उन्होंने खेत में ही मकान बनवा लिया. एक मकान नागलवाड़ी में बनवाया है। तीन ट्रेक्टर खरीदे तथा एक वेन और जीप भी खरीद ली.

तोताराम की जीवन शैली पूरी तरह बदल चुकी है. आज वह कई एकड़ जमीन के मालिक हैं. साथ ही खेती के तमाम अत्याधुनिक संसाधन भी अब वह जुटा चुके हैं.

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First published: August 24, 2015, 10:49 AM IST
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