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अंग्रेजों के समय न्याय देने वाली इमारत में बच्चों के साथ अन्याय, पढ़िए
Burhanpur News in Hindi

Sharik Akhtar Durrani | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: August 25, 2015, 12:16 PM IST
अंग्रेजों के समय न्याय देने वाली इमारत में बच्चों के साथ अन्याय, पढ़िए
मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले की जिस इमारत में अंग्रेजों के ज़माने में न्यायालय हुआ करता था, आज उसी इमारत में मराठी भाषी स्कूल चलता है. पर ख़ास बात यह है कि न्याय-अन्याय का फैसला करने वाले भवन में अब स्कूली बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है, क्योंकि इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कभी भी धराशाई हो सकती है.

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले की जिस इमारत में अंग्रेजों के ज़माने में न्यायालय हुआ करता था, आज उसी इमारत में मराठी भाषी स्कूल चलता है. पर ख़ास बात यह है कि न्याय-अन्याय का फैसला करने वाले भवन में अब स्कूली बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है, क्योंकि इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कभी भी धराशाई हो सकती है.

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मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले की जिस इमारत में अंग्रेजों के ज़माने में न्यायालय हुआ करता था, आज उसी इमारत में मराठी भाषी स्कूल चलता है. पर ख़ास बात यह है कि न्याय-अन्याय का फैसला करने वाले भवन में अब स्कूली बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है, क्योंकि इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कभी भी धराशाई हो सकती है.

दरसअल, जिले में अधिकतर मराठी शालाएं जर्जर भवन में संचालित हो रहे हैं, जहां पढने के लिए आने वाले नौनिहाल अपनी जान जोखिम डाल कर पढ़ाई कर रहे हैं. इस मसले को लेकर ना जिला प्रशासन और ना ही शिक्षा शिक्षा विभाग गंभीर है.

महाराष्ट्र की सीमा से लगे मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के इच्छापुर गांव की शासकीय मराठी प्राथमिक स्कूल क़रीब 120 साल पहले बने भवन में संचालित हो रहा है, जो भवन अब पूरी तरह से जर्जर हो गया है. हालांकि, इस भवन में स्कूल से पहले अंग्रेजी शासन काल में न्यायालय हुआ करता था.



उस समय तो इस भवन में लोगों को इंसाफ दिया जाता था, लेकिन अब यहां अपनी जान जोखिम में डाल कर पढ़ाई करने के लिए आने वाले मासूम नौनिहालों के साथ शासन प्रशासन इंसाफ नहीं कर रहा है. जर्जर भवन के कारण बच्चों की संख्या साल दर साल कम होती जा रही है और जो बचे हैं वह बच्चे हर पल डर के साए में पढ़ाई करते हैं.



यहीं नहीं, गांव के लोग भी इस दो सौ साल पूराने भवन को धराशायी करके नवीन भवन निर्माण करने की वकालत कर रहे हैं. ग्रामीणों की मांग पर भी यहां कोई सुनवाई नहीं हो रही है. कमोबेश यह ही हाल जिला मुख्यालय से सटे बहादपुर गांव की मराठी शाला का भी है.

उधर, शिक्षा विभाग को इतना गंभीर तथ्य बताने के बाद शिक्षा विभाग ने साफ कह दिया है कि जिस तरह हिंदी उर्दू भाषा के सरकारी स्कूलों के नवीन भवन बनाए गए, ठीक उसी अनुपात में मराठी शालाओं के भी नवीन भवन बनाए गए. अब कुछ नहीं कर सकते हैं.

 

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First published: August 25, 2015, 12:14 PM IST
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