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एमपी में हिंसा पीड़ित महिला को सभी हेल्प एक ही छत के नीचे मिलेंगीं

Pradesh18
Updated: June 12, 2016, 10:47 PM IST
एमपी में हिंसा पीड़ित महिला को सभी हेल्प एक ही छत के नीचे मिलेंगीं
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मध्यप्रदेश में शोषित पीड़ित और हिंसा की शिकार महिलाओं को एक ही स्थल पर सभी सुविधाएं देने के लिए सभी 51 जिले में ऊषा किरण केन्द्र खुलेंगे. केन्द्र में पीड़ित महिलाओं-बालिकाओं को एक ही स्थान पर आश्रय, चिकित्सा, पुलिस, विधिक सहायता और परामर्श पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी. इससे हिंसा पीड़ित महिला को जगह-जगह भटकना नहीं पड़ेगा.

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  • Last Updated: June 12, 2016, 10:47 PM IST
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मध्यप्रदेश में शोषित पीड़ित और हिंसा की शिकार महिलाओं को एक ही स्थल पर सभी सुविधाएं देने के लिए सभी 51 जिले में ऊषा किरण केन्द्र खुलेंगे.

महिला-बाल विकास मंत्री माया सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणा की थी, जिसके क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों को केन्द्र खोलने के आदेश दिए गए हैं. इसके लिए 153 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं.

महिला-बाल विकास मंत्री माया सिंह ने बताया कि, ऊषा-किरण केन्द्र में पीड़ित महिलाओं-बालिकाओं को एक ही स्थान पर आश्रय, चिकित्सा, पुलिस, विधिक सहायता और परामर्श पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी. इससे हिंसा पीड़ित महिला को जगह-जगह भटकना नहीं पड़ेगा. ऊषा-किरण केन्द्रों की स्थापना भारत सरकार के वन स्टॉप सेंटर (सखी) योजना के मापदंडों के अनुसार होगी.

केन्द्र सूचना या अन्य स्रोत द्वारा आई पीड़ित महिला को सबसे पहले नजदीक के अस्पताल में चिकित्सा सहायता के लिए पहुंचाएगा. केन्द्र में महिला की एफआईआर, एनसीआरआर, डीपीआर दर्ज होगी. पीड़ितों को हिंसा की प्रकृति के अनुसार मनो-सामाजिक परामर्श और उन्हें न्याय दिलावने के लिए विधिक सहायता और परामर्श दिया जाएगा. केन्द्र में पीड़िता को अस्थायी आश्रय, भोजन, वस्त्र आदि भी उपलब्ध होगा. पुलिस और न्यायालयीन प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा भी दी जाएगी.

चार विभागों की जवाबदेही तय

ऊषा किरण केन्द्र में आने वाली महिलाओं को सहायता देने के संबंध में महिला-बाल विकास, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, गृह और विधि-विधायी कार्य विभाग की जवाबदेही भी तय की गई है. महिला-बाल विकास विभाग मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 की सेवाओं से ऊषा किरण केन्द्र को लिंक करेगा. मनोवैज्ञानिक सामाजिक परामर्श और मनोचिकित्सक का पेनल बनाकर काउंसलिंग की व्यवस्था करेगा. पीड़िता का पारिवारिक पुनर्वास न होने पर मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना में रुचि और योग्यतानुसार कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण दिलवाएगा. जागरूकता लाने के साथ योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार भी करेगा.

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा जारी प्रोटोकॉल के अनुसार स्थानीय भाषा में स्वास्थ्य कर्मी उपलब्ध करवाएगा. प्रोटोकॉल का केलेण्डर बनाकर ऊषा-किरण केन्द्र को देने के साथ ही शासकीय-अशासकीय अस्पताल, डाक्टर, निजी और शासकीय एंबुलेंस की डायरेक्ट्री तैयार करेगा. आपातकालीन सेवा 108 की सेवाएं केन्द्र को देगा. दुष्कर्म पीड़ित महिला के पक्ष में सबूतों को सही तरीके से एकत्रित करने के साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों और पैरा-मेडिकल स्टॉफ को प्रशिक्षित और जागरूक बनाने का कार्य करेगा.गृह विभाग थानों में स्थित महिला डेस्क को उषा-किरण केंद्र में स्थानांतरित करेगा. उन अधिकारियों के नाम तय करेगा जो उषा किरण केंद्र में एफआईआर आदि दर्ज करेंगे.

सबूतों को सही तरीके से एकत्रित करना और पीसीआर वेन को केंद्र से संबद्ध करने के साथ ही महिला हेल्प लाइन 1090 को उषा किरण केन्द्र से जोड़ने का कार्य करेगा. पुलिसकर्मियों को महिलाओं के प्रति हिंसा के विरूद्ध संवेदनशीलता का प्रशिक्षण दिया जायेएगा.

विधि एवं विधायी कार्य विभाग संवेदनशील और समर्पित अधिवक्ताओं की सूची तैयार करेंगे जो पीड़ित महिलाओं को उषा किरण केंद्र में विधिक सहायता देंगे. जिला स्तर पर विभाग पैरा-लीगल वालिंटियर की सूची भी संधारित करेगा. न्यायालयीन प्रकरणों के त्वरित निराकरण और हिंसा से बचाई गई महिलाओं को प्रतिकर दिलवाने में सहायता करेगा.

हर जिले को मिलेंगे 3 लाख

उषा किरण केंद्र को प्रचार-प्रसार, प्रशिक्षण, कार्यशाला, विधिक सेवा, परामर्श आदि के लिए 3 लाख दिये जाएंगे. जिलों को केंद्र के संबंध में दिए गए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि हरसंभव प्रयास हों कि केंद्र अस्पताल परिसर में ही खुलें. स्थान उपलब्ध न होने पर अस्पताल के समीप केंद्र खुले, यह सुनिश्चित किया जाए. तीन चरण में ऊषा किरण केन्द्र सभी जिले में स्थापित किए जाएंगे.

समीक्षा और मूल्यांकन के लिए समिति

उषा किरण केंद्र की समीक्षा और मूल्यांकन के लिए राज्य और जिला स्तर पर समिति गठित होगी. राज्य समिति प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास की अध्यक्षता में होगी. इसमें प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण, गृह, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, आयुक्त महिला सशक्तिकरण, मुख्य वास्तुविद् लोक निर्माण, दूरसंचार और एक अशासकीय प्रतिनिधि सदस्य होगा. जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में इसी तरह समिति का गठन किया जाएगा. केंद्र की रिपोर्टिंग के लिए एमआईएस विकसित किया जायेएगा. इसके साथ ही सामाजिक अंकेक्षण भी करवाया जाएगा.

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First published: June 12, 2016, 10:47 PM IST
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