लाइव टीवी

MP में मरीज़ों को एक ही छत के नीचे मिलेगा कैंसर का पूरा इलाज, एक्शन में कमलनाथ सरकार
Bhopal News in Hindi

Pooja Mathur | News18 Madhya Pradesh
Updated: February 4, 2020, 2:43 PM IST
MP में मरीज़ों को एक ही छत के नीचे मिलेगा कैंसर का पूरा इलाज, एक्शन में कमलनाथ सरकार
सरकार के निशाने पर प्रदेश में सक्रिय दवा माफिया

प्रदेश सरकार कैंसर (Cancer) के मरीज़ों के आंकड़े इकट्ठा कर रही है ताकि उन्हें प्रदेश में ही बेहतर और त्वरित इलाज के साथ साथ तमाम सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकें. दरअसल प्रदेश में हर साल करीब 30 हज़ार रोगियों मौत कैंसर से हो रही है

  • Share this:
भोपाल. सरकार को अपना हर वचन निभाना है इस बात का ख्याल रखते हुए सरकारी अस्पतालों (Government hospitals) में स्वास्थ्य सेवाओं का पैमाना विकसित करने की कवायद तेज़ हो गई है. कैंसर रोगियों (Cancer Patients) के आंकड़ों को देखें तो प्रदेश में हर साल करीब 30 हजार लोगों की मौत कैंसर से हो रही है. सरकार चाहती है कि 15 सालों के बाद राज्य में हुए सत्ता के बदलाव का असर जनता को दिखना चाहिए. सरकारी अस्पतालों में गरीबों को निशुल्क और बेहतर इलाज मिले ये सुनिश्चित होना चाहिए. साथ ही सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्थाएं ना हों और मरीज़ों को इलाज के लिए भटकना ना पड़े, इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए. इन तमाम मुद्दों को लेकर स्वास्थ्य विभाग का अमला अब कैंसर के मरीज़ों के आंकड़े जुटा रहा है ताकि सरकारी अस्पतालों में कैंसर का पूरा इलाज मिल सके.

मरीज़ों को इलाज के लिए नहीं भटकना पड़ेगा
अभी तक की व्यवस्था के अनुसार सरकारी अस्पतालों में कैंसर के डॉक्टर तो बैठते हैं लेकिन कई तरह के इलाज ऐसे हैं जिनकी दवाओं और ट्राटमेंट के लिए मरीज़ों तो निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है. से लेना पड़ता है.लेकिन अब ऐसी तमाम व्यवस्थाओं को बदलने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक्शन में आ गया है. मरीज़ों को योजनाओं के साथ ही त्वरित चिकित्सा सेवाएं मिल सके इसकी कवायद शुरू हो गई है.

प्रदेश में नहीं कैंसर का पूरा इलाज

कैसर से जूझ रहे अधिकतर मरीज़ों की मानें तो मध्य प्रदेश में एक भी ऐसा शासकीय अस्पताल नहीं है जहां कैंसर के मरीजों को इलाज की पूरी और अच्छी सुविधा एक ही परिसर में मिल सके. अनिल शुक्ला जेपी अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक अनिल शुक्ला की मानें तो यही वजह है कि मध्य प्रदेश के 90 फीसदी से भी ज्यादा कैंसर मरीज मुंबई, नागपुर, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में इलाज के लिए जाने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे जेब पर अत्याधिक भार पड़ जाता है. मध्य प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों या भोपाल के एम्स में भी इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं.

एमपी में कैंसर रोगियों की संख्या और मौत 
>> साल 2015 में 63314 मरीज़ों में 28078 की मौत>> साल 2016 में 65739 मरीज़ों में 28391 की मौत
>> साल 2017 में 87831 मरीज़ों में 29846 की मौत
>> साल 2018 में 89318 मरीज़ों में 30764 की मौत
(ICMR रिपोर्ट में प्रस्तुत आंकड़े)

सरकार के निशाने पर दवा माफिया
मरीज़ों का एक दर्द ये भी है कि कैंसर की दवाएं बेहद महंगी हैं. कई दवाएं तो ऐसी हैं जो आमतौर पर मार्केट में आसानी से मिलती भी नहीं हैं. कैंसर मरीजों को दी जाने वाली एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाएं भी बेहद महंगी हैं. ये शिकायत मिलने पर स्वास्थ्य विभाग का अमला जागरूक हो गया है. स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट का कहना है कि अब दवाओं की ब्लैक मार्केटिंग करने वाले माफियाओं पर सरकार शिकंजा कसने को तैयार है. इसके लिए अगर अन्य राज्यों की तरह राज्य सरकार को एक्ट में संशोधन भी करने पड़े तो सरकार पीछे नहीं हटेगी.

ये भी पढ़ें
घड़ियालों को लेकर मध्य प्रदेश से आई ये बड़ी खबर, चंबल नदी ने दिलाया नया 'तमगा'
शिवराज सिंह चौहान ने किया तंज- हनुमानजी से आज के ‘लंकेश्‍वर’ भी भयभीत

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए भोपाल से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 4, 2020, 2:43 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर