छतरपुर: अर्थी से अचानक उठ खड़ा हुआ 96 साल का बुजुर्ग, बोला- अभी जिंदा हूं मैं!

छियानवे वर्षीय बुजुर्ग मनसुख कुशवाहा के अर्थी पर से जिंदा उठ खड़े होने की घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है

Madhya Pradesh News: अंतिम संस्कार की तैयारियों के बाद शव को अर्थी पर लिटाया गया. मगर जैसे ही अर्थी को वहां से ले जाया जाने लगा तभी मनसुख कुशवाहा बोल पड़े- मैं अभी जिंदा हूं. यह देख और सुन सब हैरान रह गए और उन्होंने रोना-धोना बंद कर दिया

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छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर (Chhatarpur) में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां मृत मान लिया गया एक बुजुर्ग अर्थी से अचानक उठ खड़ा हुआ और बोला कि मैं जिंदा हूं. घटना लवकुशनगर थाना क्षेत्र के चंदला रोड की है. मिली जानकारी के मुताबिक 96 वर्षीय मनसुख कुशवाहा बीते लगभग दो वर्ष से बीमार चल रहे थे. इस वजह से उनका शरीर भी काफी कमजोर हो गया था. एक दिन उनके घरवालों देखा कि वो कुछ बोल नहीं रहे हैं तो उन्होंने लगा कि उनकी मौत हो गई है. उन्होंने अपने रिश्तेदारों को आस-पड़ोस के लोगों को इसकी खबर दी.

इसके बाद रिश्तेदारों और पड़ोसियों वहां पहुंचे और सबने मिलकर बजुर्ग के अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली. ग्रामीण क्षेत्र में रिवाज के तहत अंतिम संस्कार के दौरान गौदान भी किया जाता है, इसीलिए  गौदान भी कर दिया गया. अंतिम संस्कार की तैयारियों के बाद शव को अर्थी पर लिटाया गया. मगर जैसे ही अर्थी को वहां से ले जाया जाने लगा तभी मनसुख कुशवाहा बोल पड़े- मैं अभी जिंदा हूं. यह देख और सुन सब हैरान रह गए और उन्होंने रोना-धोना बंद कर दिया. गमजदा परिवार के खुशी से आंसू छलक उठे. मनसुख कुशवाहा के बेटों का कहना है कि उनके पिता भगवान के घर से लौट आए हैं.

जिसने भी यह सुना कि बुजुर्ग मनसुख कुशवाहा जिंदा होकर अर्थी से उठ खड़े हुए वो उन्हें देखने के लिए उनके घर पहुंचने लगा. इस तरह उनके घर लोगों का तांता लगा हुआ है. मनसुख के बेटे ने बताया कि उन लोगों ने पिता को मृत समझकर अंतिम संस्कार की सारी तैयारियां कर ली थी, अर्थी सजा ली गई थी. घरवालों का रो-रो कर बुरा हाल था, लेकिन जैसे ही वो अचानक बोल पड़े सभी लोगों के आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे. उन्होंने कहा कि भगवान ने मेरे पिता को अपने घर से वापस भेज दिया है. उन्होंने कहा कि 96 वर्ष की उम्र होने के चलते वो पिछले दो साल से बहुत बीमार थे, इससे उनके शरीर में बेहद कमजोरी आ गई थी. लेकिन अब वो बिल्कुल ठीक हैं. उन्हें खुशी है कि उन्हें अपने बुजुर्ग पिता की सेवा करने का फिर अवसर मिला है.

मनसुख की बहू ने बताया कि पिताजी (ससुर) ने घर के पास एक मंदिर बनवाया था जिसमें कलश चढ़ाया जाना था. होश में आते ही उन्होंने कहा कि मेरी इच्छा रह गई है, मुझे मंदिर पर कलश चढ़ाना है. इसके बाद तत्काल ही परिजनों ने कलश मंगवाकर मंदिर पर चढ़वाया.

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