Chhatarpur : 7 महीने की बच्ची के गले में फंसा मंगलसूत्र का लॉकेट...डॉक्टरों ने ऐसे बचायी उसकी जान

छतरपुर-७ महीने की बच्ची का ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने गले से पेंडेंट निकाला
छतरपुर-७ महीने की बच्ची का ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने गले से पेंडेंट निकाला

दुधमुंही बच्ची दर्द से तड़प रही थी. परिवार ने डॉक्टरों (doctors) को पूरा वाकया बताया. फौरन बच्ची का एक्स-रे (x-ray) किया गया. इतनी छोटी बच्ची और गले जैसी नाज़ुक जगह का ऑपरेशन करना आसान नहीं था.

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छतरपुर. छतरपुर (chhatarour) ज़िला अस्पताल के डॉक्टर 7 महीने की बच्ची के लिए भगवान साबित हुए. डॉक्टरों ने बच्ची के गले का ऑपरेशन (Throat operation) कर उसकी जिंदगी बचा ली. गले में मंगलसूत्र का लॉकेट (locket) फंस गया था. इतनी छोटी बच्ची और वो भी गले का ऑपरेशन करना किसी चैलेंज से कम नहीं था. लेकिन बच्ची की जान तो बचाना ही थी. इसलिए डॉक्टरों (doctors) ने चैलेंज स्वीकार किया और गले से पेंडेंट निकाल लिया. ये सब कैसे हुआ यहां विस्तार से पढ़िए.

बच्ची का परिवार यूपी के महोबा का रहने वाला है. 7 माह की मासूम बच्ची प्रिया अपनी मां की गोद में खेल रही थी. वो मां के मंगलसूत्र को पकड़कर मुंह में डाल रही थी. उसी दौरान पेंडेंट टूटा और बच्ची के मुंह में चला गया और सटक कर गले में जा फंसा.बच्ची के घरवालों की सांस गले में अटक गयी. वो फौरन उसे लेकर महोबा के अस्पताल भागे.

एक्स-रे में दिखा पेंडेंट
दुधमुंही बच्ची दर्द से तड़प रही थी. परिवार ने डॉक्टरों को पूरा वाकया बताया. फौरन बच्ची का एक्स-रे किया गया. एक्स-रे में साफ दिखा कि बच्ची के गले में पेंडेंट फंसा है. इतनी छोटी बच्ची और गले जैसी नाज़ुक जगह का ऑपरेशन करना आसान नहीं था. उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी और वो रोए जा रही थी. मामला सीरियस होने के कारण डॉक्टरों ने उसे छतरपुर जिला अस्पताल रैफर कर दिया.
बच्ची की सांस अटकी


बच्ची की हालत बिगड़ती जा रही थी. छतरपुर ज़िला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने फौरन उसका चैकअप किया और पेंडेंट निकालने का फैसला किया. बिना ऑपरेशन किए गले से पेंडेंट निकलना असंभव था. उधर ऑपरेशन करने में भी बच्ची की जान का जोखिम था.

ऐसे हुआ ऑपरेशन
ये कठिन ऑपरेशन ज़िला अस्पताल के डॉ. शरद चौरसिया औऱ उनकी टीम ने किया. उन्हें जैसे ही बच्ची के केस की जानकारी मिली वो फौरन अपनी पत्नी डॉक्टर श्वेता चौरसिया के साथ जिला अस्पताल पहुंच गए. एक कॉल पर ही एनिसथेटिस्ट डॉ. विनीत पटैरिया भी अस्पताल पहुंच गए. उसके बाद पेंडेंट निकालने की कोशिश शुरू की गयी. डॉ. पटैरिया ने बच्ची को माइल्ड एनिस्थिसिया दिया और माइनर सर्जरी की गयी. ऑपरेशन सफल रहा. ऑपरेशन के करीब आधा घंटे बाद बच्ची को वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया. बच्ची की जान बच गयी. वो धीरे-धीरे सेहतमंद हो रही है. डॉ. शरद चौरसिया का कहना है इतना बड़ा पेंडेंट गले में फंसने के बाद सांस पूरी तरह अटकी हुई थी. उन्होंने कहा ईश्वर की कृपा से बच्ची की हिम्मत भी बनी रही. वो लगातार ज़िंदगी के लिए संघर्ष करती रही.इसके बाद ही उनकी टीम उसकी जान बचा पा पाई.

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