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स्वच्छता अभियान की खातिर इंजीनियर ने छोड़ी नौकरी

Sunil Upadhyay | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 7, 2018, 5:56 PM IST
स्वच्छता अभियान की खातिर इंजीनियर ने छोड़ी नौकरी
ग्रामीणों को शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित करते इंजीनियर कमलेश

प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता अभियान से छतरपुर का एक इंजीनियर इस कदर प्रेरित हुआ की वह अपनी नौकरी छोड़ स्वच्छ भारत अभियान का प्रेरक बन गया. अब वह गांव गांव जाकर स्वच्छता की अलख जगा रहा है.

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प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता अभियान से छतरपुर का एक इंजीनियर इस कदर प्रेरित हुआ की वह अपनी नौकरी छोड़ स्वच्छ भारत अभियान का प्रेरक बन गया. अब वह गांव गांव जाकर स्वच्छता की अलख जगा रहा है. छतरपुर जिले के गौरिहार इलाके के मुड़हरा गांव के रहने वाले 27 वर्षीय कमलेश कुशवाहा ने सन 2015 में अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद हरिद्वार में जॉब करने लगे. लेकिन कमलेश का रुझान बचपन से ही समाज और देश के लिए कुछ कर गुजरने का था. जब कमलेश को पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान की जानकारी मिली तो मोटी रकम की जॉब छोड़ स्वच्छता प्रेरक बनने आ गए.

कमलेश अब तक 26 गांवों को खुले में शौच से मुक्त करा चुके हैं. इंजीनियर कमलेश कुमार का अपने काम के और समाज के प्रति समर्पण देखते बनता है. उनका कहना है कि नौकरी करके वह सिर्फ अपने लिए ही कुछ कर सकते थे लेकिन स्वच्छ भारत अभियान के प्रेरक बनकर वह देश के लिए कुछ कर सकते हैं. स्वच्छता के प्रति उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए ब्लॉक और जिला स्तर पर उन्हें प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया गया है.कमलेश अपनी प्रेरक टीम के साथ गांव-गांव जाकर न सिर्फ लोगों को प्रेरित करते हैं बल्कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत बंन रहे शौचालय में अपने इंजीनियर होने के लाभ कारीगरों को देते नजर आते हैं.

इंजीनियर कमलेश के लिए पैसे मायने नहीं रखते. समाज सेवा उनका जुनून है और यही वजह है कि एक इंजीनियर के तौर पर नौकरी करके वह जहां मोटी रकम कमा सकते थे वही स्वच्छ भारत अभियान का प्रेरक बनकर महज 2 हजार  के मानदेय में अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं. कमलेश का कहना है वह कूड़े से कंचन अभियान में भी हिस्सा लेंगे और अपना योगदान देंगे.

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First published: June 7, 2018, 5:56 PM IST
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