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बुंदेलखंड में अपनी अलग पहचान रखता है आदिवासी महिलाओं का हैंडपंप सुधार समूह

Sunil Upadhyay | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 5, 2018, 7:25 PM IST
बुंदेलखंड में अपनी अलग पहचान रखता है आदिवासी महिलाओं का हैंडपंप सुधार समूह
एक खराब पड़े नल को सुधारता आदिवासी महिलाओं का समूह

छतरपुर के घुवारा क्षेत्र की झिरियाझोर गांव की 15 आदिवासी माहिलाओं के हैंडपंप सुधार समूह की वजह से अलग पहचान बना रहा है.

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बुंदेलखंड में पिछड़ेपन की शिकार घरेलु महिलाएं आमतौर से घरों से निकलने में भी कतराती हैं तो वहीं छतरपुर के घुवारा क्षेत्र की झिरियाझोर गांव की 15 आदिवासी माहिलाओं का उद्देश्य और जज्बा पिछड़ेपन के बावजूद इस गांव की अलग पहचान बना रहा है. यह आदिवासी महिलाओं का समूह हैंडपंप सुधारने में माहिर है और पिछले 3 सालों से क्षेत्र के खराब पड़े हैंडपम्पों को सुधारने में आसपास के सैकड़ों गावों का सफर कर चुका है.ऐसे में भीषण सूखे के चलते पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे लोगों के लिए यह महिलाए वरदान साबित हो रही हैं.

सबसे बड़ी बात यह कि अपने घरेलू कामकाज के साथ यह समूह हैंडपंप सुधार की निःशुल्क सेवा करता है.इनके काम को देखते हुए इन्हें अन्य प्रांतों में भी बुलाया जा चुका है. साथ ही कई आयोजनों में महिलाओं के बीच इनकी मिसाल पेश की जाती है.
जब इस इलाके में कोई भी हैंडपम्प खराब हो जाता है तो लोगों को पीएचई विभाग की नहीं याद आती क्योंकि सरकारी प्रक्रिया में लगभग एक सप्ताह का समय लग जाता है. लेकिन आदिवासी महिलाओं के इस ग्रुप को बस संदेशा भेजो और तुरंत निकल पड़ती हैं. इन जांबाज महिलाओं की टोली को ना चिलचिलाती धूप की परवाह है ना किसी और बात की.

ग्रुप की अध्यक्ष सीमा बाई बताती हैं कि उन्होंने एनजीओ के द्वारा हैंडपम्प रिपेयरिंग का काम सीखा था. उसके बाद पिछले 3 वर्षों से अपने गांव और आप पास के दर्जनों गांवों में जब हैंडपम्प खराब होते है तो लोग इन्हें बुलाते हैं और वह लोग सारा काम छोड़कर हैंडपम्पों की मरम्मत करने पहुंच जाती हैं. इनका कहना है अगर हमें आधुनिक औजार और सुविधाएं मिलें तो ये समाज के लिए और भी बेहतर काम कर सकती हैं.वैसे मौजूदा कलेक्टर ने इनके इस कार्य की तारीफ कर इन्हें संभावित मदद दिलाने की बात कही है.

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First published: June 5, 2018, 7:25 PM IST
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