मस्तानी महल: बच्चे सवाल पूछते हैं- दीपिका पादुकोण यहीं रहती थी क्या?

इस महल का निर्माण राजा छत्रसाल ने मस्तानी के लिए साल 1696 में छतरपुर के धुबेला में करवाया था.

Ankit Francis | News18Hindi
Updated: October 6, 2018, 5:59 AM IST
Ankit Francis | News18Hindi
Updated: October 6, 2018, 5:59 AM IST
मध्य प्रदेश के छतरपुर से झांसी की तरफ अगर 15 किलोमीटर का सफर तय करते हैं तो मऊ सहानियां नाम की एक जगह पड़ती है. छतरपुर से बस पकड़ कर आधे घंटे में यहां पहुंचा जा सकता है. मउसानिया उतर कर बायीं तरफ देखेंगे तो एक पतली सी सड़क धुबेला की तरफ जा रही है, अक्सर यहां से मस्तानी महल और छत्रसाल म्यूजियम जाने के लिए कोई साधन नहीं मिलता. कभी-कभी ऑटो मिल जाता है लेकिन वो भी दो किमी की इस दूरी के लिए आपसे 200 रुपए तक मांग लेता है. ये सड़क जहां जाकर ख़त्म हो जाती है, वह वही जगह है जहां से बाजीराव-मस्तानी की प्रेम कहानी शुरू हुई थी.

राजा छत्रसाल ने बेटी मस्तानी के लिए बनवाया था
छत्रसाल म्यूजियम में अन्दर जाने के लिए आपको 40 रुपए का टिकट लेना होता है, फोटो लेनी है तो 50 और वीडियो बनाना है तो 200 रुपए अतिरिक्त चुकाने होंगे. इस म्यूजियम के बगल में मौजूद है मस्तानी महल. स्कूली बच्चों का एक ग्रुप इस महल के दरवाजे पर खड़े होकर सेल्फी ले रहा है. पास ही में गार्ड रामसेवक पटेल बैठे हैं जो बीते 2 साल से यहां ड्यूटी दे रहे हैं.

इतिहास में जाएं तो पता चलता है कि इस महल का निर्माण राजा छत्रसाल ने 1696 में छतरपुर के धुबेला में करवाया था.


इतिहास में जाएं तो पता चलता है कि इस महल का निर्माण राजा छत्रसाल ने 1696 में छतरपुर के धुबेला में करवाया था. बुंदेले इतिहासकारों के मुताबिक राजा छत्रसाल मस्तानी बाई को बेटी मानते थे. माना जाता है कि मस्तानी, छत्रसाल और उनकी मुसलमान पत्नी रुहानी बेगम, जो कभी हैदराबाद के नवाब के महल में नर्तकी थी, की बेटी थीं. कुछ का मानना है कि राजा छत्रसाल ने मस्तानी को गोद लिया था. जो महल यहां मौजूद है मस्तानी का बचपन वहीं बीता था.

छत्रसाल म्यूजियम में काम कर रहे देवेन्द्र बताते हैं कि ऐसा माना जाता है कि मस्तानी बेहद सुंदर तो थी. उसने घुड़सवारी और तलवारबाजी की भी शिक्षा हासिल की थी. साथ ही वो बेहतरीन गायिका और डांसर भी थीं. इसलिए काफी इतिहासकार ये भी मानते हैं कि वो पेशवा की पत्नी नहीं बल्कि उनके महल में डांसर ही थीं, जिससे बाजीराव को प्रेम हो गया था. हालांकि कई इतिहासकारों का ये भी मानना है कि मस्तानी बाजीराव की ही बेटी थी जिसका असली नाम कंचनी था.

यहीं से शुरू हुई थी प्रेम कहानी
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बुंदेलखंडी इतिहासकारों के मुताबिक यही वह महल है जहां बाजीराव और मस्तानी की प्रेम कहानी शुरू हुई थी. कहानी ये है कि साल 1727-1728 के आस-पास इलाहाबाद के मुगलिया शासक पठान मोहम्मद बंगश ने बुंदेलखंड पर आक्रमण कर दिया था. छत्रसाल ने पेशवा बाजीराव से मदद मांगने के लिए अपनी बेटी मस्तानी को उनके पास भेजा. बाजीराव ने मदद की और बंगश की सेना को खदेड़ दिया गया. बताया जाता है कि इसी दौरान बाजीराव घायल हो गए थे और मस्तानी ने उनकी जान बचाई, जिसके बाद दोनों में प्रेम हो गया था.

मस्तानी महल के बाहर बैठे गार्ड रामसेवक बताते हैं कि सर्दी के महीनों में यहां काफी लोग आते हैं.


बाजीराव के प्रति अपना आभार व्यक्त करने के लिए छत्रसाल ने 33 लाख सोने की मोहरें, एक हीरे की खदान, कुछ गांव और अपने साम्राज्य का एक तिहाई भाग उन्हें सौंप दिया, जिसमें काल्पी, झांसी और सागर शामिल थे. ऐसा माना जाता है कि जीत के बाद इसी महल में बाजीराव और मस्तानी की शादी भी हुई थी, हालांकि इसका कोई प्रमाण मौजूद नहीं है.

इसके बाद मस्तानी बाजीराव के साथ महाराष्ट्र चली गयीं और उनकी एक संतान भी हुई जिसे पहले कृष्णराव नाम दिया गया लेकिन बाद में नाम बदलकर शमशेर बहादुर कर दिया गया था. बताया जाता है कि पेशवा ने भी मस्तानी के लिए आलीशान महल बनवाया था जो जलकर ख़ाक हो गया था.

क्या दीपिका पादुकोण यहीं रहती थी ?
मस्तानी महल के बाहर बैठे गार्ड रामसेवक बताते हैं कि सर्दी के महीनों में यहां काफी लोग आते हैं. बाजीराव-मस्तानी फिल्म रिलीज होने के बाद से बच्चे भी काफी आने लगे हैं. वो हंसते हुए कहते हैं कि अक्सर बच्चे ये सवाल पूछते हैं कि इस महल में दीपिका कहां रहती थी? हम दीपिका कौन है ये तो नहीं जानते लेकिन उन्हें बता देते हैं यहां राजा छत्रसाल की बेटी मस्तानी रहा करती थीं.

रामसेवक बताते हैं कि मऊ सहानियां से कोई साधन न होने के चलते लोग आने से कतराते हैं, कहते हैं- भला धूप में कौन टूरिस्ट दो किलोमीटर चल कर आएगा. देवेन्द्र भी इस बात की शिकायत करते हैं कि इस तरफ सरकार को और ध्यान देने की जरूरत है.

मध्य प्रदेश का पहला म्यूजियम धुबेला में 12 सितंबर 1955 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने बुंदेला शासक महाराजा छत्रसाल की राजधानी क्षेत्र में मऊ सहानियां में बनाया था.


देवेन्द्र बताते हैं कि कुछ साल पहले संचालनालय पुरातत्व संग्रहालय एवं अभिलेखागार ने ग्वालियर सर्किल में आने वाले करीब 8 जिलों के 16 मॉन्यूमेंट की मरम्मत कार्य के लिए करोड़ों रुपए मंजूर किये थे. पुरातत्व विभाग करीब 12 लाख रुपए से इस महल की मरम्मत कराने के लिए टेंडर भी मंगवाए थे.

इसके अलावा मुरैना के हुसैनपुर गढ़ी और महल, भिंड के इंदुरखी की बारदरी और श्योपुर के नरसिंह महल और किले की मरम्मत का भी प्रस्ताव था. कुछ जगह काम हुआ भी लेकिन वैसे नहीं हुआ जैसा सोचा गया था, ये नाकाफी है.

मस्तानी महल के आलावा भी है काफी कुछ
मध्य प्रदेश का पहला म्यूजियम धुबेला में 12 सितंबर 1955 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने बुंदेला शासक महाराजा छत्रसाल की राजधानी क्षेत्र में मऊ सहानियां में बनाया था. यहां न सिर्फ राजा छत्रसाल से जुड़ी वस्तुएं हैं बल्कि जैन और वैष्णव मूर्तिकला परंपरा की कई कलाकृतियां भी मौजूद हैं. यहां गुप्त और कल्चुरि काल की यादें भी देखने मिलती हैं.

यहां महाराजा छत्रसाल का मकबरा और शीतलागढ़ी किले के खंडहर मौजूद हैं. मेरे वापस लौटने से पहले रामसेवक मुझसे पूछते हैं कि ये बच्चे राजा छत्रसाल के बनाए मस्तानी महल में दीपिका को क्यों ढूंढ़ते रहते हैं बाबूजी ? मुझे चुप देखकर देवेन्द्र हंसते हुए कहते हैं- 'अच्छा होता दीपिका ही यहां रहती, शायद तब सबको इन जगहों का ज्यादा ख्याल रहता...'
First published: October 6, 2018, 5:59 AM IST
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