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पानी की कहानी: यहां 3000 की आबादी पर पानी के नाम पर सिर्फ एक हैंडपंप

News18Hindi
Updated: May 7, 2018, 11:23 AM IST
पानी की कहानी: यहां 3000 की आबादी पर पानी के नाम पर सिर्फ एक हैंडपंप
ब्यास बदौरा में महज एक ही हैंडपंप है जहां हमेशा लाइन लगी रहती है

ग्रामीण कहते हैं कि कई बार विभाग में खराब पड़े हैंडपंप को दुरुस्त कराने के लिए सूचना और शिकायत की गई, लेकिन पीएचई विभाग का गैर जिम्मेदाराना रवैया अब तक जारी है

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न्यूज18 हिंदी की खास मुहिम 'पानी की कहानीमें आज पढ़िए ये रिपोर्ट. देश के बड़े हिस्से को पीने का पानी काफी मुश्किलों से मयस्सर होता है. लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि जो पानी मिलता भी है क्या वह पीने लायक होता हैतो हम आपको बता दें कि देश के करीब 29500 गांव और मोहल्लों में लगभग 4.80 करोड़ की आबादी जहरीला पानी पीने को मजबूर है17 राज्यों के ये 4.80 करोड़ लोग जहरीला पानी पी कर फ्लोरोसिस और दूसरी तमाम बीमारियों की चपेट में हैं. पढ़िए यह रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्टः

मध्य प्रदेश के कई इलाकों में गर्मी की शुरुआत से ही भीषण जल संकट गहराने लगता है. इस गर्मी में भी वही हालात हैं. जल स्रोत सूखने लगे हैं. छतरपुर जैसे जिलों में लोगों के लिए पानी जरूरत से ज्यादा समस्या बन गया है. आलम यह है कि इस जिले में 3000 की आबादी वाले एक गांव ब्यास बदौरा में महज एक हैंडपंप और एक कुएं में पानी शेष रह गया है.

ब्यास बदौरा में पानी के लिए लंबी कतार लगती है. पानी के लिए यहां लोगों को अपनी बारी के लिए चार से पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ता है. आए दिन पानी को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है. इस समस्या से निपटने के लिए यहां के बुजुर्गों ने एक अनूठा तरीका इस्तेमाल तो किया है, लेकिन वह तरीका सिर्फ पानी भरने के लिए ही है. दरअसल, जब हैंडपंप पर पानी भरने वालों की ज्यादा भीड़ हो जाती है तो पानी को लेकर विवाद ना हो इसलिए क्रम से आने वालों के हिसाब से कतार लगवा देते हैं.

लंबी कतारों में लगे लोग पानी भरने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते हैं. जिस हैंडपंप के पानी से सारा गांव प्यास बुझा रहा है उसके चारों ओर गंदे पानी से भरे गड्ढे और गंदगी का अंबार लगा हुआ है. इतना ही नहीं ब्यास बदौरा में एक कुआं भी स्थित है. इस इकलौते कुएं में भी हर समय पानी के लिए भीड़ बनी रहती है.

यहां के ग्रामीण कहते हैं कि कई बार विभाग में खराब पड़े हैंडपंप को दुरुस्त कराने के लिए सूचना और शिकायत की गई, लेकिन पीएचई विभाग का गैर जिम्मेदाराना रवैया अब तक जारी है. बच्चे महिलाएं पुरुष और बुजुर्ग सभी पानी को लेकर परेशान रहते हैं. उनका कहना है कि महिलाओं को घंटों पानी के लिए इंतजार करने पर उनके घरेलू कार्य प्रभावित होते हैं वही बच्चों की पढ़ाई का भी खासा नुकसान होता है.

रियलिटी चेक के बाद जब यहां के जिम्मेदार अधिकारी को सूचना दी गई तो उनका कहना है कि समस्या निवारण के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी. लेकिन सवाल ये है कि हर बार जब गर्मियों में ऐसी हालत बनती है तो इस समस्या पर ध्यान क्यों नहीं दिया जाता है.

(छतरपुर से सुनील का इनपुट)

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First published: May 6, 2018, 2:08 PM IST
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