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ये है बाजीराव और मस्तानी की 300 साल पुरानी रियल लव स्टोरी


Updated: February 14, 2017, 12:59 PM IST
ये है बाजीराव और मस्तानी की 300 साल पुरानी रियल लव स्टोरी
कई इतिहासकारों का मानना है कि राजा छत्रसाल ने अपनी लाड़ली बेटी मस्तानी की शादी बकायदा शाही रीति-रिवाज से बाजीराव के साथ की थी.

कई इतिहासकारों का मानना है कि राजा छत्रसाल ने अपनी लाड़ली बेटी मस्तानी की शादी बकायदा शाही रीति-रिवाज से बाजीराव के साथ की थी.

  • Last Updated: February 14, 2017, 12:59 PM IST
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मराठा पेशवा बाजीराव और उनकी दूसरी पत्नी मस्तानी की प्रेम कहानी ने सिल्वर स्क्रीन पर आते ही लोगों का दिल जीत लिया था. इसकी कहानी को लेकर काफी बवाल भी हुआ था. लेकिन असल जिंदगी के बाजीराव और मस्तानी की मुलाकात कैसे हुई और उनकी प्रेम कहानी किस तरह आगे बढ़ी, ये हमारे वैलेंटाइन डे स्पेशल की इस खास पेशकश में पढ़िए.

- मस्तानी का असली नाम कंचनी था और वो बुंदेलखंड के महाराजा छत्रसाल की बेटी थीं.

-सन् 1727-28 में मुसलमान शासक मोहम्‍मद खान बंगश ने महाराजा छत्रसाल के राज्‍य पर हमला बोल दिया.

-मदद मांगने के लिए छत्रसाल ने बाजीराव को एक गुप्त संदेश भेजा था.

-संदेश पाते ही बाजीराव पेशवा अपनी सेना को लेकर मध्य प्रदेश के छतरपुर आ पहुंचे और मोहम्मद खान बंगश को हरा दिया.

- पेशवा की इस मदद से छत्रसाल इतनी खुश हुए कि उन्होंने अपनी बेटी मस्तानी का हाथ बाजीराव को सौंप दिया.

- पहली ही मुलाकात में मस्तानी और बाजीराव को एक-दूसरे से प्यार हो गया.- उन्होंने मस्तानी से शादी कर उन्हें अपनी दूसरी पत्नी बनाया.

दहेज में दी थी हीरे की खदानें

कई इतिहासकारों का मानना है कि राजा छत्रसाल ने अपनी लाड़ली बेटी मस्तानी की शादी बकायदा शाही रीति-रिवाज के साथ की थी.

बताया जाता है कि मस्तानी का असली नाम कंचनी था और वो बुंदेलखंड के महाराजा छत्रसाल की बेटी थी. अपनी इस लाड़ली बेटी की शादी में महाराजा छत्रसाल ने बाजीराव को दहेज में दो हीरों की खदानें, 32 लाख की सोने की मोहरें और सोने-चांदी के कई गहने दिए थे.

जानकारों का मानना है कि अगर इस युग के हिसाब से दहेज की कीमत का अंदाजा लगाया जाए तो उसकी कीमत करीब 50 हजार करोड़ होगी.

वीरांगना थी मस्तानी

मस्तानी को कई विधाओं में महारत हासिल थी. जिनमें से वो नृत्य में तो बेमिसाल थी ही, साथ ही तलवारबाजी, तीरंदाजी और घुड़सवारी में भी पूरी तरह निपुण थीं.

हिन्दू-मुस्लिम संस्कारों की जानकार

इतिहास बताता है कि मस्तानी को भले ही उस समय के पंडितों ने स्वीकार नहीं किया, लेकिन वो हिन्दू मुस्लिम संस्कृति के नायाब मेल का प्रतीक थीं. वो कृष्ण की भक्त थीं और नमाज भी पढ़ती थीं. पूजा भी करती थीं और रोजा भी रखती थीं

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First published: February 14, 2017, 12:59 PM IST
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