Home /News /madhya-pradesh /

Dussehra : छिंदवाड़ा के 20 गांव में दशहरे पर नहीं होता रावण दहन, दिलचस्प है इसकी वजह

Dussehra : छिंदवाड़ा के 20 गांव में दशहरे पर नहीं होता रावण दहन, दिलचस्प है इसकी वजह

छिंदवाड़ा. दशहरा (Dussehra) पर्व पर आज पूरे देश में जगह-जगह रावण दहन (Ravan Dahan) किया जा रहा है. इसे बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है. लेकिन छिंदवाड़ा के 20 गांव में रावण दहन नहीं होता. यहां रावण जलाने पर सामाजिक पाबंदी लगा दी गई है.

छिंदवाड़ा. दशहरा (Dussehra) पर्व पर आज पूरे देश में जगह-जगह रावण दहन (Ravan Dahan) किया जा रहा है. इसे बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है. लेकिन छिंदवाड़ा के 20 गांव में रावण दहन नहीं होता. यहां रावण जलाने पर सामाजिक पाबंदी लगा दी गई है.

Dussehra Special : छिंदवाड़ा के तकरीबन बीस गांव ऐसे हैं जहां दशहरे (Dussehra) पर रावण दहन पर सामाजिक तौर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. यहां के बड़े बुजुर्ग रावण को अपना पूर्वज बताते हैं, और उसे अपना आदर्श मानते हैं. यही बात वो पीढ़ी दर पीढ़ी बताते आ रहे हैं

अधिक पढ़ें ...

राजेश करमेले

छिंदवाड़ा. दशहरा (Dussehra) पर्व पर आज पूरे देश में जगह-जगह रावण दहन (Ravan Dahan) किया जा रहा है. इसे बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है. लेकिन छिंदवाड़ा के 20 गांव में रावण दहन नहीं होता. यहां रावण जलाने पर सामाजिक पाबंदी लगा दी गई है.

पूरे देश में दशहरे की धूम है. लेकिन छिंदवाड़ा के कई गांव में रावण दहन नहीं होता. इन्हीं में से एक है बिछुआ विकासखंड का जामुन टोला गांव. यहां पर गोंडवाना जाति का बोलबाला है. ये लोग रावण दहन नहीं करते. इसकी वजह ये है कि अपनी संस्कृति मैं जीवन बिताते इस समाज के लोग रावण को अपना पूर्वज मानते हैं. दशहरे के दिन यहां बड़ा मेला लगता है. रावण की राजा के रूप में पूजा अर्चना भी होती है. यहां के युवक भी रावण को राजा मानकर उसकी उपासना करते हैं.

20 गांव में बैन
ये सब अकेले इस गांव में नहीं होता बल्कि आस पास के तकरीबन बीस गांव ऐसे हैं जहां दशहरे पर रावण दहन पर सामाजिक तौर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. यहां के बड़े बुजुर्ग रावण को अपना पूर्वज बताते हैं, और उसे अपना आदर्श मानते हैं. यही बात वो पीढ़ी दर पीढ़ी बताते आ रहे हैं. रावण की पूजा करने वाले इन लोगों का मानना है रावण ब्राह्मण नहीं बल्कि आदिवासी कुल का था. यही वजह है कि वो उसे हर मामले में अपना आराध्य बताते हैं.

Tags: Dussehra Festival, Madhya Pradsh News, Ravana Dahan Story

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर