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बर्तन किराए पर देता है ये बैंक, इस बड़ी वजह से उठाना पड़ा कदम
Chhindwara News in Hindi

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Updated: December 17, 2019, 6:09 PM IST
बर्तन किराए पर देता है ये बैंक, इस बड़ी वजह से उठाना पड़ा कदम
छिंदवाड़ा नगर निगम ने बर्तन बैंक की शुरुआत की है.

वैसे तो दुनिया में जितने भी बैंक हैं, वो सभी पैसों के लिए ही हैं. लेकिन मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में एक बैंक ऐसा भी है, जहां से बर्तन किराए पर मिलते हैं.

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  • Last Updated: December 17, 2019, 6:09 PM IST
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नई दिल्ली. आपके घर में कोई पार्टी, बर्थडे, एनिवर्सरी या अन्य कोई सेलिब्रेशन का मौका है और आपको बर्तन चाहिए तो आप बैंक जाकर ले सकते हैं. इस बैंक का नाम है 'बर्तन बैंक' और छिंदवाड़ा नगर निगम ने इसे शुरू किया है.ये सभी बर्तन स्टील और दूसरे मेटल के होंगे. साथ ही डिस्पोजल से सस्ते किराए पर आपके लिए उपलब्ध होंगे. इस बैंक में आपको न सिर्फ बर्तन मिलेंगे, बल्कि अगर आप पॉलिथीन छोड़ने के प्रति वाकई गंभीर हैं तो 5-5 रुपए के थैले भी मिलेंगे. स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे घर पर इन थैलों स्वयं सहायता समूह की मदद से तैयार कर लोगों को उपलब्ध कराते हैं.

क्या है वजह?
इसके पीछे की वजह बताते हुए छिंदवाड़ा नगर निगम के कमिश्नर इच्छित गणपाले कहते हैं कि ''हम साल 2020 के सर्वेक्षण में छिंदवाड़ा को नंवर वन बनाना चाहते हैं. लोगों को इस मुहिम से जोड़ना बेहद जरूरी है. इसके लिए नए-नए प्रयोगों पर जोर दिया जाता है. साथ ही सोशल मीडिया के जरिए लोगों को इसकी जानकारी दी जाती है. इच्छित गणपाले कहते हैं कि इसके लिए हमने नारा बनाया है 'हमारा प्रण - छिन्दवाड़ा NO.1'.

छिंदवाड़ा नगर निगम के कमिश्नर इच्छित गणपाले.




शहर में लगाई बोटल रीसाइकिल मशीन


छिंदवाड़ा में नगर निगम के कमिश्नर इच्छित गणपाले ने बोटल रीसाइक्लिंग मशीन भी लगाई है, जिसका उद्घाटन 'कॉर्न फेस्टिवल' के दौरान किया गया. इस मशीन में एक प्लास्टिक की बोतल डालने पर 5 रुपए कैशबैक के रूप में वापस मिलते हैं. वो कहते हैं कि इसके लिए हमारी टीम लोगों से मिलकर उन्हें जागरूक कर रही है. साथ ही 5 रुपए का कैशबैक है, तो शायद लोग इसके लिए उत्साहित हों.

इसी मशीन के जरिए प्लास्टिक की बोटल रिसाइकिल होती है.


आवारा गायों के लिए मॉडल गौशाला
आमतौर पर आप सड़कों पर आवारा गायों को देखते हुए और इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता. लेकिन छिंदवाड़ा में ऐसा नहीं है. यहां मॉडल गौशालाएं बनाई जा रही हैं और आवारा गाय-बैल को यहां पकड़कर लाया जाता है. इनके गोबर और मूत्र से खाद तैयार होता है, जिसे सिर्फ 10-10 रुपए में किसानों को बेच दिया जाता है. इच्छित गणपाले कहते हैं कि, 'इस साल यानी 2019 में हमने करीब 150 गायों को पकड़ा. इसके बाद के नतीजे देखने लायक थे. इस काम ने वेटेनरी डिपार्टमेंट भी उनकी मदद करता है. उन्होंने फिर दोहराया है कि इस बार वह स्वच्छता सर्वेक्षण में छिंदवाड़ा को नंबर वन बनाकर ही रहेंगे'.
First published: December 17, 2019, 6:06 PM IST
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