दो पुलिसकर्मियों की पुलिस वाहन से कुचलकर मौत, देर शाम पुलिस अधिकारियों ने मनाया जश्न

बीते बुधवार को शहर के मोक्षधाम मार्ग पर दो पुलिसकर्मियों की सुबह विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) की बस के नीचे आ जाने से मौत हो गई थी.

Rajesh Karmale | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 27, 2019, 12:43 PM IST
Rajesh Karmale | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 27, 2019, 12:43 PM IST
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में पुलिस का असंवेदनशील चेहरा सामने आया है. बीते बुधवार की सुबह दो पुलिसकर्मियों की पुलिस वाहन से कुचलकर मौत हो गई थी. इन पुलिसकर्मियों की अभी अंत्येष्टी भी नहीं हुई थी कि पुलिस अधिकारियों ने देर शाम जमकर जश्न मनाया.

ब्रेक फेल होने की वजह से हुआ था हादसा

दरअसल, बीते बुधवार को शहर के मोक्षधाम मार्ग पर दो पुलिसकर्मियों की सुबह विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) की बस के नीचे आ जाने से मौत हो गई थी. ब्रेक फेल होने के कारण हुए इस हादसे में जिन दो पुलिसकर्मियों की मौत हुई, वे एक-दूसरे के रिश्तेदार थे.

देर शाम शुरू हुई अधिकारियों की पार्टी

वहीं इन पुलिसकर्मियों का अभी अंतिम संस्कार भी नहीं हुआ था कि जिला पुलिस अधीक्षक मनोज राय ने एक पार्टी का आयोजन कर डाला. देर शाम शुरू हुई यह पार्टी रात तक चली. इसमें न केवल फिल्मी गानों पर पुलिस अधिकारी थिरकते नजर आए बल्कि उन्होंने गाना भी गाया.

पार्टी में जिला प्रशासन के आला अफसर भी मौजूद

इसमें हैरानी वाली बात यह रही कि इस आयोजन में जिला प्रशासन के आला अफसर भी मौजूद थे. जहां इन अफसरों को मृत पुलिसकर्मियों के परिजनों को ढांढस बंघाने जाना था, वहां ये जश्न मना रहे थे.
कार्यक्रम से पहले दी गई थी पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि: एसपी

वहीं इस शर्मनाक आयोजन को लेकर एसपी मनोज राय ने कहा कि यह कार्यक्रम पहले से निर्धारित था. इसलिए काफी समय पहले ही सभी लोगों को भोज के लिए निमंत्रण भेजा गया था. उन्होंने कहा कि उस घटना से इस कार्यक्रम का कोई लेनादेना नहीं है. उस घटना से पूरा पुलिस विभाग बहुत आहत है. एससपी ने कहा कि वे दोनों पुलिसकर्मियों के साथ ही हुई दुर्घटना से काफी दुखी हैं. इसलिए पहले ही दोनों मृत पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दे दी गई है.

पीड़ित परिवार से कोई सरोकार नहीं

बहरहाल, पुलिस कर्मचारियों की सड़क हादसे में हुई मौत के बावजूद ऐसे आयोजनों का तत्काल होना पुलिस के अमानवीय चेहरे को साफ प्रदर्शित करता है. वे अपने कार्यक्रम को कुछ दिनों के लिए टाल भी सकते थे, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया. वहीं उन परिवारवालों पर क्या गुजर रही होगी, जिनके घर का चिराग और मुखिया चला गया. पुलिस के इन अधिकारियों को उन परिवारवालों से कोई सरोकार नहीं है.

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