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विश्व महिला दिवस: 'किस्मत तो उनकी भी होती है, जिनके हाथ नहीं होते'

विश्व महिला दिवस: 'किस्मत तो उनकी भी होती है, जिनके हाथ नहीं होते'

सोनम के दोनों हाथ अविकसित हैं. इसके बावजूद उसके हौसलों ने जिंदगी को उड़ान दे रखी है.

सोनम के दोनों हाथ अविकसित हैं. इसके बावजूद उसके हौसलों ने जिंदगी को उड़ान दे रखी है.

सोनम के दोनों हाथ अविकसित हैं. इसके बावजूद उसके हौसलों ने जिंदगी को उड़ान दे रखी है.

    'अपने हाथों की लकीरों को क्या देखते हो. किस्मत तो उनकी भी होती है, जिनके हाथ नहीं होते.' यह शेर छात्रा सोनम पर सटीक बैठता है. नरसिंहपुर के सडूमर गांव में जन्मी सोनम के दोनों हाथ अविकसित हैं. इसके बावजूद उसके हौसलों ने जिंदगी को उड़ान दे रखी है.

    विश्व महिला दिवस के मौके पर दसवीं की छात्रा सोनम कौरव ने बताया कि, अपनी हाथों की कमी को कभी उसने कमजोरी नहीं बनने दिया. उसने आज तक अपने हर लम्हे को बखूबी जीने की कोशिश की है.

    दरसअल, सोनम के बचपन से ही दोनों हाथों का विकास नहीं हुआ. एक हाथ के नाम पर सिर्फ एक उंगली है और दूसरे हाथ के नाम पर सिर्फ पंजा है. इसके बावजूद सोनम पैरों के सहारे आज गांव के स्कूल में कक्षा दस की पढ़ाई कर रही है.

    विकलांग सोनम भविष्य में इलाज के लिए डॉक्टर बनने की ख्वाहिश रखती है. हालांकि, परिवार की तंग हालात उसके भविष्य में रोड़ा बन रही है.

    विकलांग सोनम की मां मायाबाई ने बताया कि, सोनम के डॉक्टर बनने के सपने में वे हर संभव मदद कर रहे हैं, पर कहीं न कहीं आने वाले समय में सोनम की शिक्षा में आर्थिक तंगी सबसे बड़ा रोड़ा है.

    हैरानी की बात यह है कि इस इलाके के विधायक सत्तारूढ़ पार्टी से होने के बावजूद अपने ही समुदाय की इस बिटिया की आज तक मदद न कर पाए. इस होनहार की मदद के लिए कई समाजसेवी संस्थाओं ने भी फोटोसेशन तक ही अपनी रूचि रखी और फिर उसे अपने हाल पर छोड़ दिया.

    हालांकि, सोनम को अब इन सबकी आदत हो चुकी हैं. लोगों की यह बेरूखी उसका दिल तोड़ने के बजाए उसे कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित करती है.

    'दिल के जीते जीत है और दिल के हारे हार' यह बात नरसिंहपुर जिले की छात्रा निधि गुप्ता ने सच कर दिखाई है. दोनों हाथ न होते हुए निधि ने पैरों की सहायता से पढ़-लिखकर डीसीए और आईटीआई की तालीम हासिल कर ली है.

    दरसअल, जिले के गोबरगांव की रहने वाली निधि गुप्ता को कुदरत ने हाथों से वंचित रखा है. इसके बाद भी निधि घर के सारे काम अपने पैरों से बखूबी करती है. सुई में धागा डालने के बारीक काम से लेकर मोबाईल, लैपटॉप का संचालन भी पैरों से कर लेती है.

    खास बात ये है जिंदगी से निधि ने जमकर मुकाबला किया और कभी हार नहीं मानी. निधि के परिजनों ने तंग हालात के चलते भी भरपूर साथ दिया. मन में कंप्यूटर इंजीनियर बनने का ज़ज्बा लिये निधि ने हायर सेकेंडरी सहित डीसीए और आईटीआई की परीक्षा अपने पैरों की बदौलत पास की.

    इसी जज्बे के चलते प्रदेश के किसान कल्याण और कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने इस बेटी को गोद लिया और उसे पढ़ाने में मदद भी दी. अब परिवार की नए साल में बस यही उम्मीद है कि निधि के सपनों को सरकारी नौकरी की मदद मिल जाए. जिससे जीवन में धन का अभाव उसके किसी भी काम में रोड़ा न बन सके.

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