Damoh By-Election: दमोह में वॉकओवर है या जनता लड़ रही है भाजपा के खिलाफ चुनाव

सांकेतिक फोटो

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मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के दमोह विधानसभा (Damoh Assembly) के उपचुनाव (By-Election) में कांग्रेस (Congress) के बड़े नेता प्रचार की औपचारिकता करते दिखाई दे रहे हैं.

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दमोह. मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के दमोह विधानसभा (Damoh Assembly) के उपचुनाव (By-Election) में कांग्रेस (Congress) के बड़े नेता प्रचार की औपचारिकता करते दिखाई दे रहे हैं. जबकि सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी प्रचार में बेहद आक्रामक नजर आ रही है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हर दूसरे दिन दमोह में चुनावी सभा कर रहे हैं. कांग्रेस के नेताओं का बयानी जोर इस बात पर है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए चुनाव आयोग को उप चुनाव को टाल देना चाहिए. छह माह के भीतर चुनाव कराना आयोग की संवैधानिक बाध्यता है. यहां सत्रह अप्रैल को वोट डाले जाएंगे.

क्या बीजेपी को मिल गया कांग्रेस से वॉकओवर

दमोह में राहुल लोधी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हैं. लोधी ने वर्ष 2018 के आम चुनाव में दमोह से ही कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीता था. पिछले साल अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में लोधी ने विधायकी से इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी. लोधी के मुकाबले में कांग्रेस ने अपने पुराने नेता अजय टंडन को मैदान में उतारा है. टंडन को लोधी की तरह पार्टी के बड़े नेताओं का प्रचार में समर्थन नहीं मिल रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांगे्रस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ सिर्फ दो बार ही दमोह गए हैं. पहली बार तब गए जब टंडन को नामांकन पत्र दाखिल करना था, लेकिन, वे निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय तक उनके साथ नहीं गए. सभा संबोधित कर आ गए. दूसरी बार सात अप्रैल को प्रचार करने गए. यहां उनका स्वास्थ्य खराब हो गया. पार्टी के दूसरे बड़े नेता दिग्विजय सिंह दो दिन दमोह में रहे. इनके अलावा कोई अन्य बड़ा नेता प्रचार में सक्रिय दिखाई नहीं दिया. बड़े नेताओं के प्रचार से अलग दिखाई देने के कारण यह संदेश स्वाभाविक तौर पर जा रहा है कि कांग्रेस ने भाजपा को वॉकओवर दे दिया है.

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कांग्रेस की दूसरी पंक्ति के नेता कर रहे हैं प्रचार

मध्यप्रदेश कांग्रेस में ऐसा नेताओं की कमी है जो वोटर और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय हो. कांग्रेस ने अपने आधा दर्जन से अधिक पूर्व मंत्रियों और विधायकों को चुनाव की जिम्मेदारी दी है. लेकिन, ये चेहरे भाजपा के दिग्गज नेताओं के मुकाबले में कमजोर दिखाई दे रहे हैं. सुरेश पचौरी, अजय सिंह तथा कांतिलाल भूरिया जैसे चेहरे भी उप चुनाव के मैदान में दिखाई नहीं दे रहे हैं. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव जरूर प्रचार के लिए जा रहे हैं। वे कमलनाथ के साथ रोड शो में दिखाई देंगे. 14 अप्रैल को कमलनाथ आखिरी बार प्रचार के लिए दमोह जाएंगे. वहीं जयवर्द्धन सिंह,कमलेश्वर पटेल जैसे युवा चेहरे प्रचार के लिए भेजे गए हैं. कमलनाथ की रणनीति वही है जो 28 विधानसभा सीटों के उप चुनाव में थी. बिकाऊ बनाम टिकाऊ. वोटर के बीच इस मुद्दे पर बात हो रही है. यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित भाजपा के हर नेता को प्रचार में यह सफाई देना पड़ रही है कि राहुल लोधी विकास के लिए कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैं.

चुनाव स्थगित कराने पर है कांग्रेस का जोर



प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव तीव्र होने के बाद से ही कांग्रेस पार्टी का जोर इस बात पर है कि चुनाव आयोग को उप चुनाव कुछ दिन के लिए टाल देना चाहिए. पूर्व मंत्री पीसी शर्मा कहते हैं कि नेताओं की भीड दमोह में संक्रमण बढ़ा रही है. दमोह में पचास से ज्यादा कोरोना के मामले हर दिन आ रहे हैं. कोरोना कर्फ्यू के बारे में निर्णय सरकार ने कलेक्टर पर छोड़ रखा है. जबकि मध्यप्रदेश के अधिकांश जिले कोरोना कर्फ्यू में हैं. कांग्रेस के स्थानीय नेता लोगों के बीच यह प्रचारित कर रहे हैं कि शहर में संक्रमण भाजपा नेताओं के कारण बढ़ रहा है. कांग्रेस नेता वीरेन्द्र दवे कहते हैं कि दमोह में भाजपा के खिलाफ यहां की जनता चुनाव लड़ रही है. वे कहते हैं कि 2018 में भी जनता शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ थी और आज भी है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा दमोह में कैंप किए हुए हैं। वे सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी मिल रहे हैं. भाजपा उम्मीदवार राहुल लोधी कहते हैं कि यहां का वोटर विकास के साथ है. दमोह में भाजपा की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी सभाएं ले चुकी हैं.

क्यों चल रहा है राहुल लोधी बहाना है का नारा

चुनाव प्रचार में एक नारा तेजी से चल रहा है. यह नारा है राहुल लोधी बहाना हैं,प्रहलाद को जिताना है. प्रहलाद पटेल केंद्र में मंत्री हैं और दमोह से सांसद हैं. राहुल लोधी को कांग्रेस से भाजपा में लाने का श्रेय प्रहलाद पटेल के खाते में ही जाता है. पटेल और राहुल लोधी सजातीय हैं. इस क्षेत्र के जातीय समीकरण काफी पेचीदा हैं. लोधी उम्मीदवार के मैदान में होने पर अन्य जातियों के बीच ध्रुवीकरण हो जाता है. प्रहलाद पटेल के भी राजनीतिक विरोधी इस क्षेत्र में काफी हैं. पटेल इस उप चुनाव के जरिए अपने विरोधियों को भी शांत करना चाहते हैं. उमा भारती का चुनावी सभा लेना भी स्थानीय समीकरणों को साधने की कवायद माना जा रहा है. उमा भारती ने चुनावी सभा में कहा कि पार्टी के लिए मैं और प्रहलाद पटेल चट्टान की तरह हैं. वे बोली जब संकट आता है हमें याद किया जाता है.

(डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं)
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