Black Fungus Infection: दमोह में जान बचाने के लिए दो मरीजों की निकालनी पड़ी आंखें

दमोह में ब्लैक फंगस के चार मामले मिले हैं, जिसमें जान बचाने के लिए दो मरीजों की आंखें निकालनी पड़ी है.

दमोह में ब्लैक फंगस के चार मामले मिले हैं, जिसमें जान बचाने के लिए दो मरीजों की आंखें निकालनी पड़ी है.

दमोह में ब्लैक फंगस की दस्तक के साथ डरावनी तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसमें ब्लैक फंगस के जिले में 4 मरीज सामने आए हैं. इसमें 2 मरीजों की जान बचाने के लिए उनकी एक-एक आंख निकालनी पड़ी है.

  • Last Updated: May 14, 2021, 11:19 PM IST
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दमोह. मध्य प्रदेश के दमाेह जिले में म्यूकॉरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस  (Black Fungus) की दस्तक के साथ ही डरावनी तस्वीरें भी सामने आ रही हैं, जिसमें ब्लैक फंगस के संक्रमण के जिले में 4 मरीज सामने आए हैं, जिसमें डॉक्टरों ने 2 मरीजों की जान बचाने के लिए इलाज के दौरान उनकी एक-एक आंख भी निकालनी पड़ी है.

कोरोना कॉल में लोगों को आने वाले समय लापरवाही और भी भारी पड़ने वाली है, जो डायबिटीज के पेशेंट हैं उनके रिकवरी रेट बहुत ही धीमा होता हैं, जिसके चलते मरीज को लंबे समय तक इलाज के लिए भर्ती रहना पड़ता. जिसके चलते मरीज काफी वीकनेस हो जाती है और यही वजह है कि हवा में मौजूद म्युकोमाइकोसिस कोविड 19 मरीज को अपने चपेट में ले लेता हैं.

कोरोना से प्रभावित कमजोर मरीजो को black fungus अपनी चपेट में लेकर सबसे पहले नाक को संक्रमित करता है. इसके साथ साथ यह मुंह, फेफड़े, ब्रेन और गले को भी तेजी से अपना शिकार बनाता है. समय रहते मरीज को इलाज नही मिला तो मरीज की जान भी बचा पाना बहुत मुश्किल होता है, यह अगर आंखों पर असर करता है तो मरीज को तत्काल सही इलाज कि जरूरत होती है. सही समय पर इलाज नही मिलता तो मरीज की आंखों की रोशनी को बहुत ही तेजी खत्म कर देता है, और जिसकी वजह से मरीज की आंख भी निकालनी पड़ती.

इस संबंध में दमोह CMHO डॉ. संगीता त्रिवेदी से बात की गई तो उनका कहना है कि लोगों को ध्यान देना चाहिए कि वह घर में रहें. सुरक्षित रहें और जिससे उनको कोविड हो ही नहीं पाये, क्योंकि सुगर वाले मरीज को कोविड होने के बाद उसको रिकवर करना आसान नही होता. उसको एक लंबे इलाज के बाद बेहतर कंडीशन में काफी समय लग जाता है. जिसमें बहुत मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में आ सकते हैं.

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