दमोह लोकसभा सीट: इस बार प्रहलाद पटेल बनाम प्रताप सिंह लोधी

2018 विधानसभा चुनाव के परिणाम ने तस्वीर को बदलकर रख दिया है. यहां बीजेपी के मौजूदा सांसद प्रहलाद पटेल और प्रताप सिंह लोधी के बीच कांटे की टक्कर है

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 16, 2019, 6:58 PM IST
दमोह लोकसभा सीट: इस बार प्रहलाद पटेल बनाम प्रताप सिंह लोधी
प्रहलाद पटेल और प्रताप सिंह लोधी
Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 16, 2019, 6:58 PM IST
इस बार दमोह लोकसभा सीट पर मुकाबला रोचक होने वाला है. भले ही ये बीजेपी के कब्जे वाली सीट है, लेकिन 2018 विधानसभा चुनाव के परिणाम ने तस्वीर को बदलकर रख दिया है. यहां बीजेपी के मौजूदा सांसद प्रहलाद पटेल और प्रताप सिंह लोधी के बीच कांटे की टक्कर है.

दमोह लोकसभा सीट पर पहला चुनाव 1962 में हुआ था. तब यह सीट अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित थी. इस चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी. 1967 में परिसीमन के बाद यह सीट सामान्य हो गई. 1967 और 1971 में भी कांग्रेस को यहां पर जीत मिली थी. 1977 में यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई. भारतीय लोकदल ने इस सीट पर जीत हासिल की.

1980 में कांग्रेस ने यहां पर वापसी की. कांग्रेस ने 1984 का चुनाव भी जीता. बीजेपी को पहली बार इस सीट पर जीत 1989 में मिली. लोकेंद्र सिंह पहली बार यहां से जीतने वाले बीजेपी नेता बने. 1989 में पहली जीत हासिल करने के बाद से बीजेपी को इस सीट पर हार नहीं मिली. उसके बाद जीत का सफर लगातार जारी है.

खंडवा लोकसभा सीट: इस बार किसका पलड़ा होगा भारी ?

हालांकि, तीस साल पुराने गढ़ में बीजेपी को अब भितरघात का खतरा है. कांग्रेस कास्ट कॉम्बिनेशन संभाल ले तो बदलाव संभव हो सकता है. मुकाबले कांटे का है और विधानसभा चुनाव के परिणाम ने तमाम सियासी समीकरण को बदलकर रख दिया है. यहां मोदी लहर का इतना असर नहीं है.

-2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रहलाद सिंह पटेल को 513079 वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस के चौधरी महेंद्र प्रताप सिंह को 299780 वोट मिले थे. दोनों के बीच हार जीत का अंतर 213299 वोटों का था. इस चुनाव में बसपा 3.46 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थी.

-इससे पहले 2009 के चुनाव में बीजेपी के शिवराज सिंह लोधी को जीत मिली थी. उन्होंने कांग्रेस के चंद्रभान भैया का हराया था. शिवराज सिंह लोधी को 302673 वोट मिले थे तो वहीं चंद्रभान को 231796 वोट मिले थे. दोनों के बीच हार जीत का अंतर 70877 वोटों का था. इस चुनाव में सपा 1.31 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थी.संसदीय क्षेत्र में 8 विधानसभा सीटें आती हैं. जिसमें दमोह जिले की 4 पथरिया, दमोह, जबेरा, हटा और सागर जिले की 3 देवरी, रहली, बंडा और छतरपुर जिले की 1 बड़ामलहरा विधानसभा सीट आती है.
विधानसभा 2013 में बीजेपी के पास 6 और कांग्रेस के पास 2 सीटें थी. जबकि 2018 में बीजेपी के पास 3 और कांग्रेस के पास 4, बीएसपी के पास 1 सीट है.

शहडोल लोकसभा सीट: यहां बराबरी का रहा है मुकाबला, अब किसका नंबर?

-1962 के बाद इस सीट पर 12 बार हुए चुनाव में 6 बार कांग्रेस उम्मीदवार जीता, तो 1984 के बाद आज तक 6 बार से लगातार बीजेपी का कब्जा है. 2014 के चुनाव में इस सीट पर 55.24 फीसदी वोटिंग हुई थी.
-बीजेपी के रामकृष्ण कुसमरिया, बसपा के रामबाई के कांग्रेस में जाने से वोट बंटने का डर है. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और प्रहलाद पटेल के बीच खींचतान भी है. स्थानीय नेता पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया भी खुश नहीं हैं. कांग्रेस प्रत्याशी प्रताप सिंह लोधी दमोह के स्थानीय नेता हैं.
जातिगत समीकरण.

यहां की सीट जातिगत समीकरण के आधार पर तय होती है. ओबीसी नेता को अक्सर मौका मिला है...
संसदीय क्षेत्र में कुल मतदाता 17,37,702 मतदाता हैं, जिसमें लोधी, कुर्मी जाती के वोटर्स निर्णायक होते हैं. इस क्षेत्र में लोधी वोटर का सबसे ज्यादा बोलबाला हैं, दूसरे नंबर पर कुर्मी वोटर हैं. लेकिन सवर्ण वोट जिसके पाले में जाता हैं जीत उसी की होती है.

-2011 की जनगणना के मुताबिक दमोह की जनसंख्या 2509956 है. यहां की 82.01 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 17.99 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है.
-दमोह में 19.44 फीसदी लोग अनुसूचित जाति और 13.13 फीसदी लोग अनुसूचित जनजाति के हैं. चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2014 के चुनाव में यहां पर 16,51,106 मतदाता थे. इनमें से 7,68,600 महिला मतदाता और 8,82,506 पुरुष मतदाता थे.
-गौंड-9.6 प्रतिशत
वैश्य, जैन-7 प्रतिशत
लोधी, कुर्मी-22.4प्रतिशत
ब्राहमण-8.8 प्रतिशत
यादव-5.7 प्रतिशत

दमोह सागर संभाग का एक जिला और बुंदेलखंड अंचल का शहर है. हिंदू पौराणिक कथाओं के राजा नल की पत्नी दमयंती के नाम पर ही इसका नाम दमोह पड़ा. सांसद के आदर्श ग्राम बांदकपुर में 5 करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च की गई, लेकिन विकास कोसो दूर तक नजर नहीं आता है.

ये हैं मुद्दे
-कारोबार की गति धीमी
-महुआ के कारोबार में सही दाम नहीं मिलना
-स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पीने का पानी, रोजगार मुद्दे
-उद्योग का मुद्दा
-जलसंकट
-पलायन
-भितरघात का खतरा

मुकाबला रोचक होने वाला है. मोदी लहर नहीं होने की वजह से बीजेपी केंद्र और राज्य सरकार के कामों के आधार पर वोट मांग रही है. वहीं कांग्रेस भी बीजेपी के कार्यकाल को याद दिलाकर जनता के बीच जा रही है. 23 मई को तय होगा की यहां कौन सा फैक्टर सबसे ज्यादा हॉबी रहेगा.

यह पढ़ें- बालाघाट लोकसभा सीट: बागी प्रत्याशी ने इस बार दिलचस्प बनाया मुकाबला
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर

वोट करने के लिए संकल्प लें

बेहतर कल के लिए#AajSawaroApnaKal
  • मैं News18 से ई-मेल पाने के लिए सहमति देता हूं

  • मैं इस साल के चुनाव में मतदान करने का वचन देता हूं, चाहे जो भी हो

    Please check above checkbox.

  • SUBMIT

संकल्प लेने के लिए धन्यवाद

जिम्मेदारी दिखाएं क्योंकि
आपका एक वोट बदलाव ला सकता है

ज्यादा जानकारी के लिए अपना अपना ईमेल चेक करें

डिस्क्लेमरः

HDFC की ओर से जनहित में जारी HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (पूर्व में HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड). CIN: L65110MH2000PLC128245, IRDAI R­­­­eg. No. 101. कंपनी के नाम/दस्तावेज/लोगो में 'HDFC' नाम हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HDFC Ltd) को दर्शाता है और HDFC लाइफ द्वारा HDFC लिमिटेड के साथ एक समझौते के तहत उपयोग किया जाता है.
ARN EU/04/19/13626

News18 चुनाव टूलबार

  • 30
  • 24
  • 60
  • 60
चुनाव टूलबार