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स्विट्जरलैंड में लहराया बुंदेलखंड का परचम, दमोह में बनी डाक्यूमेंट्री फिल्म को अवार्ड

फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई फिल्म.

फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई फिल्म.

गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन के लिए पूरे देश में बदनाम बुंदेलखंड को अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सम्मान मिलने लगा है. इस बार दमोह में बनी एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म को स्विट्जरलैंड में अवार्ड हासिल हुआ है.

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गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन के लिए पूरे देश में बदनाम बुंदेलखंड को अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सम्मान मिलने लगा है. इस बार दमोह में बनी एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म को स्विट्जरलैंड में अवार्ड हासिल हुआ है.

बीते सालों में बुंदेलखंड पूरे देश की सुर्खियां में रहा. बीते साल ही बुंदेलखंड के दमोह शहर को देश के सबसे गंदे शहर का तमगा भी मिला, लेकिन इस इलाके की सूरत नेताओं, सरकारों और नुमाइंदों ने भले न बदली हो लेकिन यहां के कलाकारों ने दमोह और बुंदेलखंड का सम्मान कायम रखने में अहम भूमिका निभाई है.

इस कड़ी में विश्व प्रसिद्ध खजुराहों पर दमोह में बनी डाक्यूमेंट्री फिल्म को स्विट्जरलैंड में बेस्ट डाक्यूमेंट्री का अवार्ड हासिल हुआ है. 17 मिनट की यह डाक्यूमेंट्री फिल्म खजुराहों की बोलती दीवारें नाम से बनी इस फिल्म को खजुराहों को एक अलग अंदाज में पेश किया गया है.



दमोह के सरकारी पीजी कालेज में प्रोफेसर रश्मि जेता के निर्देशन में बनी इस डाक्यूमेंट्री में दमोह के कलाकारों ने भूमिका निभाई तो पूरी फिल्म का निर्माण भी दमोह में ही हुआ. निर्देशक मानती हैं कि दमोह बहुत छोटा शहर भले हो लेकिन यहां का टैलेंट देश में अलग है.
ये इत्तेफाक है कि फिल्म का निर्देशन पति ने किया तो निर्माता उनकी पत्नी है और दोनों पति पत्नी के नाम भी एक ही है. जी हां प्रोफ़ेसर जेता की पत्नी रश्मि जेता का कहना है कि जब उन्होंने ये फिल्म बनाई तब उन्हें ये उम्मीद नहीं थी कि तीन जगहों  पर इसे नवाजा जाएगा, लेकिन टीम की मेहनत ने इसे साकार रूप दिया है.

 

खजुराहों पर इसके पहले भी कई लोगों ने फिल्में बनाई हैं. देश दुनिया के सैलानी यहां बड़ी तादात में आते हैं लेकिन इस डाक्यूमेंट्री में दावा किया गया है कि खजुराहों की दीवारें मंदिरों को नये रूप में प्रस्तुत किया गया है जिस वजह ये फिल्म दो अवार्ड ले चुकी है और चार अंतरराष्ट्रीय नॉमिनेशन इस फिल्म के हुए हैं.

कुछ दिन पहले ही मुंबई में  5वें इंडियन सिने फ़िल्म फेस्टिवल में स्पेशल फेस्टिवल मेंशन अवार्ड से इसे नवाजा गया था और अब स्विट्जरलैंड में अंतररष्ट्रीय फ़िल्म कॉम्पिटिशन में डॉक्युमेंट्री केटेगरी में बेस्ट डाक्यूमेंट्री अवार्ड से नवाजा गया है. इस खास अवार्ड को मिलने के बाद पूरी टीम में ख़ुशी की लहर है तो लोग ये उम्मीद कर रहे है कि आने वाले दिनों में दमोह का मान और बढ़ेगा.
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