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दमोह में तिरंगे का अपमान, दो अन्य झंडों से नीचे फहरा दिया राष्ट्रीय ध्वज

अंबेडकर प्रतिमा पर दो ध्वजों से नीच फहरा दिया तिरंगा.
अंबेडकर प्रतिमा पर दो ध्वजों से नीच फहरा दिया तिरंगा.

स्वतंत्रता दिवस पर मंगलवार सुबह से ही पूरे दमोह में तिरंगा फहराने को लेकर लोगों में जोश था. युवाओं ने तिरंगा यात्राओं के माध्यम से देश की आजादी का जश्न मनाया, लेकिन दमोह के प्रमुख चौराहे पर लगी संविधान निर्माता बाबा साहब की प्रतिमा के पास फहराए गए तिरंगे के अपमान का मामला सामने आया है.

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स्वतंत्रता दिवस पर मंगलवार सुबह से ही पूरे दमोह में तिरंगा फहराने को लेकर लोगों में जोश था. युवाओं ने तिरंगा यात्राओं के माध्यम से देश की आजादी का जश्न मनाया, लेकिन दमोह के प्रमुख चौराहे पर लगी संविधान निर्माता बाबा साहब की प्रतिमा के पास फहराए गए तिरंगे के अपमान का मामला सामने आया है.

जिस बाबा साहब ने संविधान में तिरंगा को हर ध्वज से ऊंचा फहराने का विधान बनाया था, उन्हीं बाबा साहब की प्रतिमा स्थल पर ही तिरंगे का अपमान किया गया. दरअसल यहां पर दो ध्वज पहले से लगाए गए थे, जिनमें एक ध्वज बौद्ध धर्म का है.

वहीं दूसरा नीला ध्वज है. लेकिन यहां पर ध्वजारोहन का आयोजन करने वालों ने इस पर ध्यान नहीं दिया और दोनों स्थायी ध्वजों के बाद तिरंगा बांध दिया. उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज की ऊंचाई स्थायी ध्वजों से कम रख दी और सुबह में जब यहां पर तिरंगा फहराया गया, तो उसे दोनों ही ध्वाजों से नीचे फहरा दिया गया. जो अब विवाद का कारण बन गया है.



वहीं यहां पर ध्वाजारोहण करने वाले मजदूर नेता झुन्नीलाल राही ने भी अपनी भूल स्वीकार की है. साथ ही इस भूल को कभी नहीं करने की बात कहते हुए युवाओं को भी सीख देने की बात कही है, लेकिन तिरंगा को अन्य ध्वजों से नीचा फहरा देने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है.
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